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जी-राम-जी पर विपक्ष भ्रम फैला रहा, कांग्रेस ने हटाया था नेहरू और राजीव का नाम, बाद में जोड़ा गांधी : तोखन
09-Jan-2026 10:50 AM
जी-राम-जी पर विपक्ष भ्रम फैला रहा, कांग्रेस ने हटाया था नेहरू और राजीव का नाम, बाद में जोड़ा गांधी : तोखन

नया कानून योजना को खत्म नहीं, बल्कि अधिक प्रभावी बनाने की पहल

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 9 जनवरी। केंद्रीय राज्य मंत्री सह बिलासपुर लोकसभा सांसद तोखन साहू ने कहा कि विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी, ग्रामीण भारत को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर विकसित भारत–रोज़गार एवं आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 का लागू होना किसी योजना को समाप्त करना नहीं है, बल्कि उसे समय के अनुरूप अधिक सशक्त, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाना है।

प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा बिलासपुर स्थित एक निजी होटल में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुएतोखन साहू ने कहा कि जो लोग आज केवल नाम परिवर्तन पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अतीत के तथ्यों को देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि अलग-अलग सरकारों ने समय और परिस्थितियों के अनुसार ग्रामीण रोज़गार योजनाओं में बदलाव किए हैं। 1989 में कांग्रेस सरकार के दौरान प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में जवाहर रोज़गार योजना की शुरुआत हुई। 1993 में प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिंह राव के कार्यकाल में इसका विस्तार कर रोज़गार आश्वासन योजना बनाई गई। 1999 में एनडीए सरकार के समय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसका पुनर्गठन कर जवाहर ग्राम समृद्धि योजना शुरू की। साहू ने कहा कि उस दौर में ‘जवाहर’ नाम हटाया नहीं गया, बल्कि योजना को अधिक प्रभावी बनाया गया। 2004–05 में यूपीए सरकार ने इसे कानून का रूप देकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम बनाया। 2009 में इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम कर दिया गया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार और आजीविका को टिकाऊ बनाना है। नया अधिनियम पारदर्शिता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और ज़मीनी स्तर पर ठोस परिणाम सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नाम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत का वास्तविक विकास है।


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