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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोरबा, 7 जनवरी। कोरबा स्थित बाल्को पर पर्यावरण नियमों की अनदेखी और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों को दरकिनार कर अनुमति लेने का आरोप लगा है। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इस संबंध में नई दिल्ली में एनजीटी के अध्यक्ष को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बाल्को को जारी कंसेंट टू एस्टैब्लिश (सीटीई) और कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) को शुरू से ही शून्य घोषित करने की मांग की है।
अग्रवाल ने पत्र में कहा कि एनजीटी के 14 नवंबर 2022 के आदेश के अनुच्छेद-20 में स्पष्ट प्रावधान है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग और नगर निगम की पूर्व अनुमति के बिना सीटीई और सीटीओ जारी नहीं की जा सकती।
हालांकि रिकॉर्ड के अनुसार, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अनुमति 24 नवंबर 2023 को और कोरबा नगर निगम से भवन अनुमति 13 फरवरी 2024 को प्राप्त की गई, जो कि एनजीटी आदेश के काफी बाद की तारीखें हैं। इसके बावजूद ट्रिब्यूनल के समक्ष यह दर्शाया गया कि सभी आवश्यक अनुमतियां पहले से उपलब्ध थीं।
पूर्व मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि एल्यूमिनियम स्मेल्टर/प्रोसेसिंग उद्योग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार रेड कैटेगरी यानी अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों में आता है। इसका प्रदूषण सूचकांक 96.6 से 99.1 के बीच है। ऐसे उद्योगों के लिए भूमि उपयोग और भवन की पूर्व स्वीकृति केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा की अनिवार्य शर्त है।
अग्रवाल ने कानूनी विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर या गलत घोषणाओं के आधार पर आदेश प्राप्त करना ट्रिब्यूनल से धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। उन्होंने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि धोखाधड़ी से प्राप्त कोई भी आदेश स्वतः शून्य होता है।
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि एनजीटी के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की गई, जो न केवल ट्रिब्यूनल की गरिमा को चुनौती है, बल्कि शासन को भी कमजोर करती है। यदि ऐसे मामलों में सख्त और निवारक कार्रवाई नहीं हुई, तो यह कानून के राज पर सीधा प्रहार होगा और यह खतरनाक संदेश जाएगा कि संवैधानिक ट्रिब्यूनलों के आदेशों को भी नजरअंदाज किया जा सकता है।
अग्रवाल ने बाल्को को जारी सीटीई और सीटीओ को शुरू से ही निरस्त करने के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच और पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।


