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दिल्ली दंगों के साज़िश मामले में ज़मानत याचिका ख़ारिज होने पर शरजील इमाम के भाई मुजम्मिल इमाम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है.
बीते सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी थी.
हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने पाँच अन्य अभियुक्तों- गुलफ़िशा फ़ातिमा, मीरान हैदर, शिफ़ा उर रहमान, मोहम्मद सलीम ख़ान और शादाब अहमद को ज़मानत दे दी थी.
मुजम्मिल इमाम ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक बयान जारी कर कहा, "शरजील भाई ने फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है."
मुजम्मिल इमाम की ओर से जारी बयान के मुताबिक़, शरजील ने कहा, "मुझे इस बात की ख़ुशी है कि दूसरे लोगों को ज़मानत मिल गई है, हालांकि मैं इस बात की निंदा करता हूं कि उन्हें इतने लंबे समय तक अन्याय झेलना पड़ा."
उन्होंने कहा, "जहां तक हमारी बात है, मेरा पक्का मानना है कि उमर और मुझे उस आंदोलन को संगठित करने और उसका नेतृत्व करने की सज़ा दी जा रही है, जो हाल के भारतीय इतिहास के सबसे अहम जन आंदोलनों में से एक था. यह फ़ैसला संगठित विरोध प्रदर्शनों को अपराध की श्रेणी में डालता है और किसी भी तरह की बाधा को आतंकी गतिविधि के रूप में देखता है. इससे आतंकवादी गतिविधियों और लोकतांत्रिक विरोध और असहमति के बीच का अंतर और भी धुंधला हो जाता है."
व्यक्तिगत तौर पर अपनी चिंता ज़ाहिर करते हुए शरजील ने कहा, "मेरी इकलौती चिंता मेरी बुज़ुर्ग मां की शारीरिक और मानसिक सेहत को लेकर है. इसके अलावा मैं इस मामले को लेकर आशावादी हूं और मुझे भरोसा है कि आख़िरकार सच की जीत होगी. इंशाल्लाह, हम कामयाब होंगे." (bbc.com/hindi)


