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नयी दिल्ली, 6 जनवरी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईआरसीटीसी कथित घोटाला मामले में आरोप तय किए जाने के आदेश के खिलाफ दायर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव की याचिका पर मंगलवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने तेजस्वी की याचिका और मुकदमे पर रोक के आवेदन पर जवाब दाखिल करने के लिए सीबीआई को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जनवरी की तारीख तय की। इसी दिन उनके पिता लालू प्रसाद यादव की ऐसी ही याचिका पर भी सुनवाई की जाएगी।
उच्च न्यायालय ने सोमवार को मामले में आरोप तय करने के खिलाफ लालू की एक याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। हालांकि अदालत ने सीबीआई के जवाब पर गौर किए बिना फिलहाल अदालती कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
इस बीच, न्यायमूर्ति शर्मा ने लालू के पूर्व विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) और इस मामले में सह आरोपी भोला यादव की ऐसी ही याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया और आठ जनवरी को सुनवाई के लिए इसे एक अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दिया।
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी और पूर्व रेल मंत्री लालू ने इस मामले में निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया है। यह मामला भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के दो होटलों के परिचालन अनुबंध एक निजी कंपनी को देने में कथित अनियमितताओं से संबंधित है।
सीबीआई के आरोपपत्र के अनुसार, 2004 से 2014 के बीच एक साजिश रची गई थी, जिसके तहत भारतीय रेलवे के पुरी और रांची में स्थित बीएनआर होटलों को पहले आईआरसीटीसी को सौंपा गया और बाद में इसे संचालन, रखरखाव एवं देखभाल के लिए बिहार के पटना में स्थित सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को पट्टे पर दे दिया गया।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि निविदा प्रक्रिया में धांधली की गई थी और निजी कंपनी सुजाता होटल्स को फायदा पहुंचाने के लिए शर्तों में हेरफेर की गई थी।
आरोपपत्र में आरसीटीसी के समूह महाप्रबंधक वी. के. अस्थाना और आर.के. गोयल के साथ-साथ विजय कोचर और विनय कोचर का भी नाम शामिल है। दोनों सुजाता होटल्स के निदेशक और चाणक्य होटल के मालिक हैं।
लारा प्रोजेक्ट्स के नाम से जानी जाने वाली डिलाइट मार्केटिंग कंपनी और सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपपत्र में आरोपी कंपनी के रूप में नामजद किया गया है।
निचली अदालत ने कहा था कि इस मामले में भूमि और शेयर लेनदेन "संभवतः रांची और पुरी में रेलवे के होटलों में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की आड़ में साठगांठ वाले पूंजीवाद का उदाहरण है।
लालू यादव के अलावा, अदालत ने प्रदीप कुमार गोयल, राकेश सक्सेना, भूपेंद्र कुमार अग्रवाल, राकेश कुमार गोगिया और विनोद कुमार अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ धारा 13(1)(डी)(दो) और (तीन) के तहत आरोप तय किए थे।
धारा 13 (2) किसी लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार के लिए दंड से संबंधित है, तथा धारा 13 (1) (डी) (दो) और (तीन) किसी लोक सेवक द्वारा पक्षपात के लिए पद का दुरुपयोग करने से संबंधित है।
अदालत ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, विजय कोचर, विनय कोचर, सरला गुप्ता और प्रेम चंद गुप्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने कहा था, "सभी (14) आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) और आईपीसी की धारा 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) और धारा 13(1)(डी)(दो) और (तीन) के तहत एक समान आरोप तय करने का निर्देश दिया जाता है।"
भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत अधिकतम सजा 10 साल है, जबकि धोखाधड़ी के मामले में सात साल तक की सजा हो सकती है। (भाषा)


