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राज्य शासन को नई परीक्षा कराने की छूट
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 3 जनवरी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेवेन्यू इंस्पेक्टर पदोन्नति परीक्षा में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस एनके व्यास ने अपने फैसले में कहा कि प्रमोशन परीक्षा की प्रक्रिया संदेह के घेरे में है और इसे वैध नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि कोर्ट ने राज्य शासन को नए सिरे से पदोन्नति परीक्षा आयोजित करने की छूट भी दी है।
गौरतलब है कि पटवारी से आरआई पदोन्नति की लिखित परीक्षा 7 जनवरी 2024 को आयोजित हुई थी, जिसमें 2600 से अधिक पटवारी शामिल हुए थे। 29 फरवरी 2024 को घोषित परिणाम में 216 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया था, लेकिन अंतिम रूप से केवल 13 उम्मीदवारों का चयन हुआ। इसके बावजूद 22 लोगों को नियुक्ति दे दी गई, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए।
प्रमोशन से वंचित रह गए पटवारियों ने इस प्रक्रिया को गलत और अनुचित बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को भी प्रमोशन दे दिया गया, जबकि योग्य उम्मीदवार बाहर रह गए। कोर्ट ने इन तर्कों को गंभीर मानते हुए पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द कर दिया।
आरआई प्रमोशन घोटाला सामने आने के बाद पटवारी संघ और शासन के पत्र के आधार पर ईओडब्ल्यू ने 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इनमें से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है, जबकि आठ की गिरफ्तारी अभी शेष है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस घोटाले में 18 से अधिक लोगों की संलिप्तता सामने आई है।
जांच में खुलासा हुआ है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक किए गए थे। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों को जानबूझकर पास कराया गया, यहां तक कि एक फेल उम्मीदवार को बाद में पास घोषित कर दिया गया। पति-पत्नी और भाइयों को एक ही परीक्षा केंद्र में पास-पास बैठाने के भी प्रमाण मिले हैं, जिससे कई उम्मीदवारों के एक जैसे अंक आए। एजेंसी को इस संबंध में दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं।
जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि कथित अनियमितता के जरिए प्रमोशन पाने वाले पटवारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य में आरआई पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर बड़ा प्रशासनिक और कानूनी असर देखने को मिल सकता है।


