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लोकपाल ही रोक सकेंगे निजी विवि. की मनमानी
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
रायपुर, 2 जनवरी । छत्तीसगढ़ प्रदेश आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंह ठाकुर ने मांग की है कि प्रदेश स्तर पर छत्तीसगढ़ निजि विश्वविद्यालय लोकपाल की नियुक्ति कर दंडात्मक अधिकार भी दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों में वि.वि स्तर पर जो लोकपाल नियुक्त होते हैं उनकी नियुक्ति भी राज्य सरकार को स्वयं करना चाहिए।
ठाकुर ने बताया कि वर्तमान में सभी विश्व विद्यालयों को अपनी आंतरिक गतिविधियों के संदर्भ में लोकपाल नियुक्त करना अनिवार्य होता है लेकिन यह लोकपाल निष्प्रभावी रहते हैं क्योंकि इनकी नियुक्ति स्वयं निजी विश्वविद्यालय ही करते हैं। जिसके कारण यह लोकपाल किसी कर्मचारी की तरह ही काम करने वालों की तरह होकर रह जाते हैं।
ठाकुर ने कहा की प्रदेश स्तर पर लोकपाल की नियुक्ति अत्यंत आवश्यक हो गयी है क्योंकि छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालय किस तरह मनमानी पर उतारू है और सरकार इसके प्रति किस तरह असंवेदनशील है इसका जीता जागता उदाहरण रिटायर्ड आईएएस श्री अशोक अग्रवाल की राज्य निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के सचिव पद पर हैरान करने वाली नियुक्ति है।
एक सचिव स्तर का आईएएस अधिकारी जो हाई कोर्ट के जज के समकक्ष पद सूचना आयुक्त रहा हो वह कैसे प्रोफेसर अथवा डिप्टी कलेक्टर स्तर के पद पर डिमोशन के साथ आसीन हो सकता है, यह हजम नहीं होता। जांच तो इस बात की भी होना चाहिए कि जो व्यक्ति हाईकोर्ट जज के समकक्ष पद पर सेवाएं दे चुके हों वह कई पायदान नीचे के पद पर काम करने के लिए कैसे तैयार हो गए। इस तरह से अनुग्रहित व्यक्ति किस तरह न्याय कर पायेगा समझा जा सकता है। ठाकुर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालय के द्वारा जो डिग्रियां व उपाधियां दी गई है उनकी गंभीरता से जांच होना चाहिए कि विद्यार्थियों ने जो डिग्री पढ़ के ली है अथवा खरीदकर। यह जांच सिर्फ अधिकार संपन्न लोकपाल ही कर सकता है।


