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सोनपैरी के हिन्दू सम्मेलन में मोहन भागवत का उद्बोधन
रायपुर, 31 दिसंबर। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को हिन्दू सम्मेलन में जात-पात को नजरअंदाज कर सामाजिक समरसता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज में समस्या तो है, लेकिन देश में उच्च विचार भी हैं, जिससे समस्याएं दूर की जा सकती है।
रायपुर से सटे सोनपैरी में हिन्दू सम्मेलन में मोहन भागवत ने कहा कि जितने भी हिन्दू हैं, उनसे मित्रवत व्यवहार करना चाहिए, यह आज से शुरू हो जाए। इसके लिए जात-पात नहीं देखना, सभी अपने हैं, ऐसा व्यवहार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दुनिया में व्यक्ति अकेला हो जाता है, तो व्यसनों में ज्यादा फंस जाता है। इसके लिए लोगों से मेलजोल होना चाहिए। सप्ताह में एक दिन अपने घर में रहें और आपस में बातचीत करें। इससे कुटुम्ब प्रबोधन कहा जा सकता है। आरएएसएस प्रमुख ने देश और समाज के लिए समय भी देना जरूरी है। उन्होंने पर्यावरण सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने पानी बचाओ के साथ-साथ सिंगलयूज प्लोस्टिक के उपयोग छोडऩे और पेड़ लगाने पर जोर दिया।
डॉ. भागवत ने कहा अपने घर के चौखट के अंदर अपनी मातृभाषा ही बोलनी चाहिए। स्वभाषा का आग्रह रखना चाहिए। अपनी जरूरत के लिए अपने देश का बना माल खरीदना चाहिए। दूसरे देश का माल अपनी शर्तों पर खरीदना चाहिए। इससे स्वबोध से जीना आता है। हमें नागरिक जीवन के सारे नियमों का पालन करना है। कुछ नियम ऐसे भी हैं जो कहीं लिखे नहीं है उनका भी पालन करना चाहिए, करते हैं तो मनुष्य जीवन में श्रेष्ठता आती है। जैसे घर में बड़ों का पैर छूकर नमस्कार करना। यह नियम नहीं परम्परा है। इसके कारण नम्रता को याद रखने में हम सफल होते हैं क्योंकि मन में अहंकार नहीं रहता। उन्होंने कहा घर में कोई मांगने वाला आए, तो उसे खाली हाथ न भेजे कुछ न कुछ अवश्य दें। ऐसे नियमों का पालन करेंगे, तो आपस में भाईचारा संकटों का सामना करने वाली शक्ति समाज में पैदा होगी।
यही संदेश लेकर संघ के कार्यकर्ता आपके बीच आएंगे। डॉ. भागवत ने कहा ये नियम अपने कुटुंब, देश के कल्याण का मार्ग है, और यही विश्व कल्याण का मार्ग है। यह विश्वधर्म ही हिन्दू धर्म है। और हिन्दू धर्म ही भविष्य में विश्व कल्याण करेगा।


