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नाबालिग की सड़क हादसे में मौत, हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द कर 13 लाख मुआवजा तय किया
31-Dec-2025 1:50 PM
नाबालिग की सड़क हादसे में मौत, हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द कर 13 लाख मुआवजा तय किया

छत्तीसगढ़' संवाददाता 

बिलासपुर, 31 दिसंबर। सड़क दुर्घटना से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के आदेश को आंशिक रूप से गलत ठहराते हुए मृतक के परिजनों को बड़ा राहत दी है। हाईकोर्ट ने नाबालिग की आय का आकलन न्यूनतम मजदूरी के आधार पर करते हुए कुल 13.09 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया है।

यह मामला 4 फरवरी 2018 का है। सुबह करीब 9 बजे नैला निवासी 17 वर्षीय प्रशांत यादव, रेलवे स्टेशन से साइकिल से घर लौट रहा था। रास्ते में ट्रक क्रमांक सीजी 14-ए-1591 के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए उसे टक्कर मार दी। गंभीर चोटों के कारण प्रशांत की मौके पर ही मौत हो गई।

दुर्घटना के बाद मृतक के पिता प्रकाश यादव और माता ने मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण दायर किया। मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल जांजगीर-चांपा ने साक्ष्यों के आधार पर कुल 3.50 रुपये लाख मुआवजा तय किया था। इसमें से वाहन स्वामी द्वारा पहले से दिए गए 2 लाख घटाकर बीमा कंपनी को 1.50  लाख रुपये भुगतान करने का निर्देश दिया गया था, साथ ही बीमा कंपनी को वाहन चालक और मालिक से वसूली की छूट दी गई थी।

कम मुआवजे से असंतुष्ट होकर मृतक के माता-पिता ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को निरस्त करते हुए मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन किया।

मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल ने अपने आदेश में कहा कि ट्रिब्यूनल द्वारा मृतक की आय का अनुमान बहुत कम लगाया गया था। यदि दुर्घटना की तिथि पर लागू न्यूनतम मजदूरी को देखा जाए, तो प्रशांत एक श्रमिक के रूप में 7,930 रुपये प्रतिमाह आसानी से कमा सकता था।
चूंकि मृतक की उम्र 17 वर्ष थी, इसलिए 18 का मल्टीप्लायर लागू किया गया।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रिब्यूनल ने भविष्य की आय वृद्धि के लिए मुआवजा नहीं दिया, जो कि त्रुटिपूर्ण है। मृतक की उम्र 40 वर्ष से कम होने के कारण 40 प्रतिशत भविष्य संभावनाएं जोड़ने का लाभ भी परिजनों को दिया गया।

इन सभी आधारों पर हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को निरस्त करते हुए अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया और मृतक के आश्रितों को कुल 13.09 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश पारित किया।

 


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