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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 10 नवंबर। प्रेम विवाह करने के बाद पति द्वारा धर्म परिवर्तन का दबाव डालने के आरोप के मामले में हाईकोर्ट ने पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को सही ठहराते हुए पति की अपील खारिज कर दी है। अब पति को अपनी पत्नी को हर माह 12 हजार रुपये भरण-पोषण के रूप में देना होगा।
मामला कोरबा का है, जहां जैन धर्म का पालन करने वाले युवक ने ईसाई युवती से प्रेम विवाह किया था। पत्नी का आरोप है कि विवाह के बाद पति और ससुराल वालों ने उस पर ईसाई धर्म छोड़कर जैन धर्म अपनाने का दबाव डाला। उसने बताया कि शादी के बाद से ही पति ने उसे अपने साथ नहीं रखा और वह मायके में ही रहने को मजबूर है।
पत्नी ने अदालत में कहा कि उसे गंभीर शारीरिक परेशानी है> कमर और सीने में दर्द के इलाज पर हर माह 20 से 25 हजार रुपये खर्च होते हैं। उसके पास किसी भी प्रकार की आय का साधन नहीं है, जबकि पति एक इंजीनियर है और उसे लगभग 85,940 रुपये प्रति माह वेतन मिलता है। इस आधार पर पत्नी ने हर महीने 45,000 रुपये भरण-पोषण की मांग की थी।
पति की ओर से कहा गया कि पत्नी शिक्षित है और अपनी इच्छा से अलग रह रही है, इसलिए वह खुद का खर्च उठा सकती है। उसने यह भी दावा किया कि उस पर और उसके परिवार पर झूठे आरोप लगाए गए हैं। लेकिन अदालत ने माना कि पत्नी के पास कोई स्वतंत्र आय नहीं है और उसकी चिकित्सा संबंधी आवश्यकता वास्तविक है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने फैमिली कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि पति की स्थायी आय है और पत्नी आर्थिक रूप से निर्भर है। इसलिए 12 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देना न्यायसंगत और आवश्यक है।


