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75 की स्पीड में उसी ट्रैक पर चलाकर क्षमता की जांच की गई
छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 8 नवंबर। गत 4 नवंबर को गतौरा स्टेशन के पास हुई भीषण रेल दुर्घटना की जांच पूरी हो गई है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) बी.के. मिश्रा ने अपनी टीम के साथ तीन दिनों तक बिलासपुर में कैंप कर घटनास्थल का निरीक्षण किया और संबंधित कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की। अब फाइनल जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जो कुछ दिनों में रेलवे बोर्ड को सौंपी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि गेवरा से बिलासपुर आ रही मेमू लोकल ट्रेन गतौरा रेलवे स्टेशन के पास पहले से खड़ी एक मालगाड़ी से टकरा गई थी। इस हादसे में लोको पायलट विद्या सागर कुशवाहा सहित 12 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 20 यात्री घायल हुए थे।
रेलवे ने इस घटना को लेकर तुरंत संयुक्त जांच समिति गठित की थी, जिसने प्रारंभिक रिपोर्ट में मृत लोको पायलट को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि यह अंतिम निष्कर्ष नहीं माना गया है, क्योंकि अंतिम निर्णय सीआरएस जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। रेलवे सुरक्षा आयुक्त बी.के. मिश्रा ने बुधवार को घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया था। इसके बाद दो दिनों तक डीआरएम कार्यालय में दुर्घटना से जुड़े कर्मचारियों से बंद कमरे में अलग-अलग पूछताछ की गई। सीआरएस ने पहले 19 कर्मचारियों को तलब किया था, बाद में संख्या बढ़ाकर 25 से अधिक कर दी गई। सभी से लिखित बयान, तकनीकी रिकॉर्ड और ड्यूटी दस्तावेज लिए गए।
इधर डीआरएम राजमल खोईवाल ने शुक्रवार को इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल विभाग के अधिकारियों के साथ दुर्घटना स्थल पर ट्रायल किया। घटनास्थल, जो गतौरा स्टेशन के आउटर सिग्नल क्षेत्र में है, वहां एक मेमू लोकल ट्रेन चलाकर विभिन्न गति (75 किमी/घंटा और 100 किमी/घंटा) पर इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोकने की क्षमता की जांच की गई।जानकारी के मुताबिक ट्रायल में पाया गया कि उच्च गति पर ब्रेक लगाने पर ट्रेन पूरी तरह नहीं रुक पा रही थी, जो हादसे के तकनीकी कारणों पर नए सवाल खड़े करता है।


