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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 8 नवंबर। मरवाही पुलिस ने 10 वर्षीय मासूम की रहस्यमय मौत का पर्दाफाश कर एक सनसनीखेज सच्चाई उजागर की है। जांच में पता चला कि बच्चे की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या थी और आरोपी कोई और नहीं, बल्कि उसका ही रिश्तेदार था।
2 नवंबर को थाना मरवाही क्षेत्र के एक गांव में सूचना मिली कि एक दस वर्षीय बालक अपने घर के पास निर्माणाधीन भवन में फांसी पर लटका हुआ है।
पुलिस मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच में मामला संदिग्ध पाया। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया, जिसके बाद डीएसपी दीपक मिश्रा और फॉरेंसिक अधिकारी शांतनु राठौर मौके पर पहुंचे।
जांच के दौरान बालक के शरीर पर ऐसे चोटों के निशान मिले जो आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या की ओर इशारा कर रहे थे।
पुलिस अधीक्षक एस.आर. भगत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की टीम गठित कर पोस्टमार्टम करवाया। रिपोर्ट में साफ हुआ कि बालक की मौत फांसी से पहले ही हो चुकी थी। इसके बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच शुरू की।
जांच टीम ने गांव के हर व्यक्ति से पूछताछ की। इसी दौरान मृतक के रिश्ते की बुआ के बेटे अर्जुन (25 वर्ष) पर शक गहराया। अर्जुन मूल रूप से ग्राम अमझर, थाना पसान का रहने वाला था और हाल में मरवाही में अपने रिश्तेदारों के घर रह रहा था। जब पुलिस ने उसके मोबाइल की जांच की, तो उसमें बड़ी संख्या में अप्राकृतिक कृत्यों से जुड़े वीडियो मिले। पूछताछ में आखिरकार अर्जुन ने अपराध कबूल कर लिया।
अर्जुन ने बताया कि 1 नवंबर की रात वह शराब पीकर अपने मामा (मृत बालक के पिता) के घर पहुंचा। मामा-मामी के सो जाने के बाद बाहर आग तापते हुए उसकी मुलाकात बच्चे से हुई।
नशे में धुत आरोपी ने बच्चे से झगड़ा किया, उसे गाली दी और गुस्से में मारपीट की। बालक के बेहोश हो जाने पर उसने उसके साथ अप्राकृतिक कृत्य किया।
फिर अपने अपराध को छिपाने के लिए उसने बच्चे को निर्माणाधीन घर में ले जाकर साड़ी से फंदा लगाकर लटका दिया, ताकि मामला आत्महत्या जैसा लगे।
पुलिस ने आरोपी से घटना स्थल पर सीन रिक्रिएट करवाया और फॉरेंसिक टीम की मौजूदगी में सबूत एकत्र किए। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।


