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अमित जोगी के बरी होने की चुनौती पर नया मोड़
कृष्णदास राजगोपाल
नई दिल्ली, 6 नवंबर। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला सुनाया- सीबीआई की 1,373 दिन की देरी को माफ कर दिया, जो छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे अमित जोगी की 2007 में हुई बरी होने की अपील करने में हुई थी। यह मामला 2003 में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या का है, जिसमें अमित जोगी पर राजनीतिक साजिश का आरोप था।
जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा, ‘न्याय के हित में सीबीआई की देरी माफ की जाती है।’ हाईकोर्ट ने 2011 में सीबीआई की अपील को ‘बहुत देर से’ कहकर खारिज कर दिया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को नई अपील पर ताजा सुनवाई का आदेश दिया। अमित जोगी को भी हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
क्या हुआ था 22 साल पहले?
2003 : एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या। छत्तीसगढ़ पुलिस ने केस दर्ज किया, फिर सीबीआई को सौंपा।
31 मई 2007 : सेशन कोर्ट ने अमित जोगी को सबूतों की कमी से बरी कर दिया, लेकिन 28 अन्य आरोपियों पर सीबीआई और आम्र्स एक्ट के तहत चार्ज बरकरार रखे।
2011: सीबीआई ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की, लेकिन 1,373 दिन की देरी के कारण खारिज।
2025 : सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील को मंजूर कर लिया।
जस्टिस संदीप मेहता का अहम सवाल
जजमेंट लिखते हुए जस्टिस संदीप मेहता ने एक बड़ा कानूनी सवाल उठाया :
‘क्या राज्य सरकार सीबीआई केस में अलग से अपील कर सकती है?’
यह सवाल इसलिए क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार ने भी 2007 में अमित जोगी की बरी होने के खिलाफ अलग से अपील की थी। जस्टिस मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस पर गहन विचार-विमर्श करना चाहिए। उन्होंने 5 बिंदु गिनाए :
क्या शिकायत राज्य पुलिस ने दर्ज की थी?
क्या जांच का कुछ हिस्सा राज्य पुलिस ने किया?
क्या मुकदमा राज्य के कहने पर शुरू हुआ?
क्या राज्य का हित जुड़ा हुआ है?
क्या सीबीआई को राज्य सरकार के कहने पर लगाया गया?
‘गंभीर आरोप थे’-कोर्ट
हालांकि जजमेंट में केस के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई, लेकिन जस्टिस मेहता ने कहा :
‘अमित जोगी पर बहुत गंभीर आरोप थे – एक विपक्षी पार्टी के नेता की हत्या की साजिश। हाईकोर्ट को ष्टक्चढ्ढ की अपील पर उदार रवैया अपनाना चाहिए था।’
अब क्या होगा?
हाईकोर्ट को सीबीआई की अपील को ताजा आधार पर सुनना होगा।
अमित जोगी को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका।
छत्तीसगढ़ सरकार की अपील पर भी अलग से विचार हो सकता है।
यह फैसला सीबीआई विरूद्ध राज्य सरकार के अधिकारों पर एक नया अध्याय खोलता है। क्या राज्य सीबीआई के केस में ‘दूसरी अपील’ कर सकता है? इसका जवाब आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच तय करेगी। (द हिंदू)


