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छत्तीसगढ़ सरकार और सतीश जग्गी की याचिकाएं खारिज, मगर सीबीआई को हाईकोर्ट में आवेदन लगाने की छूट
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 7 नवंबर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र पूर्व विधायक अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ राज्य सरकार और सतीश जग्गी द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए, अमित जोगी की दोषमुक्ति को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि इस मामले में नए साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, इसलिए दोषमुक्ति में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने 6 नवंबर 2025 के आदेश में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दायर दोषमुक्ति के खिलाफ अपील खारिज की। साथ ही सतीश जग्गी की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को अपील में बदलने का आवेदन अस्वीकार कर दिया। मगर, उच्च न्यायालय को निर्देश दिया गया कि वह सीबीआई के देरी माफी आवेदन पर कानूनी और तथ्यगत आधार पर पुनर्विचार करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सीबीआई द्वारा की गई देरी के मुद्दे पर अब उच्च न्यायालय पुनर्विचार करेगा, जिसमें सभी पक्षों, अमित जोगी, छत्तीसगढ़ सरकार और सतीश जग्गी को सुनवाई का अवसर मिलेगा।
मालूम हो कि 4 जून 2003 को रायपुर के मौहदापारा क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया था। प्रारंभिक जांच राज्य पुलिस ने की, लेकिन पीड़ित परिवार की शिकायत पर मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई ने जांच में अमित जोगी सहित 29 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें हत्या, साजिश और अवैध हथियार रखने के आरोप थे। 31 मई 2007 को सत्र अदालत ने साक्ष्य के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया, जबकि अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजाएं सुनाई गईं।
सत्र अदालत ने चिमन सिंह (मुख्य शूटर), याहया ढेबर (रायपुर के तत्कालीन मेयर ऐजाज ढेबर के भाई), अभय गोयल, फिरोज सिद्दीकी, विनोद सिंह उर्फ बादल, श्याम सुंदर, अविनाश सिंह, और कई अन्य को आजीवन कारावास की सजा दी थी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 26 नवंबर 2024 को अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी को जमानत दे दी थी।
शेष 18 दोषियों की आजीवन सजा अप्रैल 2025 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बरकरार रखी गई।
यह हत्या 2003 विधानसभा चुनाव से कुछ माह पहले हुई थी, जब एनसीपी और कांग्रेस के बीच तीखा राजनीतिक संघर्ष चल रहा था। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह हत्या राजनीतिक महत्वाकांक्षा का परिणाम थी। कुछ लोग अपने राजनीतिक आकाओं के प्रति वफादारी दिखाने के लिए अपराध में शामिल हुए।
अमित जोगी का वक्तव्य है सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर यह निर्णय मेरी निर्दोषता की आधिकारिक पुष्टि है। न्याय की जीत हुई है, न कि किसी व्यक्ति की। मैं अपनी कानूनी टीम और उन समर्थकों का आभारी हूं जिन्होंने दो दशक तक मेरा साथ दिया।


