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कोल लेवी घोटाले में जमानत अर्जी खारिज, 35 आरोपियों पर जारी रहेगी कार्रवाई
01-Nov-2025 12:19 PM
कोल लेवी घोटाले में जमानत अर्जी खारिज, 35 आरोपियों पर जारी रहेगी कार्रवाई

कोर्ट ने कहा- व्हाइट कॉलर क्राइम से राष्ट्रीय हित को नुकसान

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 1 नवंबर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले में हाईकोर्ट ने आरोपी नवनीत तिवारी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध ठंडे दिमाग से, व्यक्तिगत लाभ के लिए किए जाते हैं, जिनका असर समाज और देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ता है। जस्टिस ने यह भी टिप्पणी की कि हत्या कभी गुस्से में की जाती है, लेकिन आर्थिक अपराध योजनाबद्ध और सोची-समझी रणनीति के तहत होते हैं।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पी. चिदंबरम बनाम निदेशालय प्रवर्तन मामले का हवाला देते हुए कहा कि व्हाइट कॉलर क्राइम यानी आर्थिक अपराधों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अगर ऐसे अपराधियों को दंड नहीं मिला, तो पूरा समुदाय प्रभावित होगा। अदालत ने कहा कि ये अपराध देश की आर्थिक व्यवस्था को खोखला कर देते हैं, इसलिए आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती।

आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और एंटी करप्शन ब्यूरो की संयुक्त कार्रवाई में जनवरी 2024 में इस मामले का खुलासा हुआ था। जांच में सामने आया कि राज्य में कोयले के परिवहन के नाम पर एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था, जो प्रति टन 25 रुपए की अवैध कोल लेवी वसूलता था।

जांच के अनुसार, इस सिंडिकेट में कई वरिष्ठ अधिकारी, नेता और निजी लोग शामिल थे। इन पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर तत्कालीन भू-विज्ञान एवं खनिज विभाग के निदेशक को प्रभावित कर 15 जुलाई 2020 को ऐसा आदेश जारी करवाया जिससे कोल परिवहन परमिट की ऑनलाइन प्रक्रिया को मैनुअल में बदला जा सके, जिससे अवैध वसूली का रास्ता बना।

मामले के 35 आरोपियों में सौम्या चौरसिया समीर विश्नोई रानू साहू, संदीप कुमार नायक, शिवशंकर नाग, सूर्यकांत तिवारी, मनीष उपाध्याय, रोशन कुमार सिंह, निखिल चंद्राकर, राहुल सिंह, पारेख कुरैशी, मोइनुद्दीन कुरैशी, वीरेंद्र जायसवाल, रजनीकांत तिवारी, हेमंत जायसवाल, जोगिंदर सिंह, नवनीत तिवारी, दीपेश टोंक, देवेंद्र डड़सेना, राहुल मिश्रा, रामगोपाल अग्रवाल, देवेंद्र सिंह यादव, शिशुपाल सोरी,  रामप्रताप सिंह, विनोद तिवारी, अमरजीत भगत, चंद्रदेव प्रसाद राय,बृजपत सिंह, इदरीश गांधी,  गुलाब कमरी, यू. डी. मिज़, सुनील कुमार अग्रवाल, जय, चंद्रप्रकाश जायसवाल एवं लक्ष्मीकांत तिवारी शामिल हैं।

11 जनवरी 2024 को प्रवर्तन निदेशालय के डिप्टी डायरेक्टर संदीप आहूजा ने एसीबी-ईओडब्ल्यू रायपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। यह रिपोर्ट प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 की धारा 66(2) के तहत दायर की गई थी।

कोर्ट ने कहा कि अगर आर्थिक अपराधियों को सजा नहीं दी गई, तो पूरा समाज भुगतेगा। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आर्थिक अपराधों को सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध के रूप में भी देखा जाना चाहिए। ये अपराध सार्वजनिक विश्वास को तोड़ते हैं, और राज्य की वित्तीय स्थिरता को प्रभावित करते हैं।


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