अंतरराष्ट्रीय
इसराइल के विपक्षी नेता, यायर लैपिड ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने सेना को बिना किसी रणनीति के युद्ध में भेज दिया है.
उनका कहना है कि सेना को कम सैनिकों के साथ युद्ध के मैदान में उतारा गया है.
हिब्रू भाषा में दिए गए एक वीडियो बयान में लैपिड ने कहा, "आईडीएफ़ अपनी क्षमता की सीमा तक पहुँच चुकी है और उससे भी आगे निकल गई है. सरकार सेना को घायल हालत में ही युद्ध के मैदान में छोड़ रही है."
लैपिड का कहना है कि सरकार सेना को "बिना किसी रणनीति, बिना ज़रूरी संसाधनों और बहुत ही कम सैनिकों के साथ कई मोर्चों वाले युद्ध" में भेज रही है.
उन्होंने आगे कहा, "रिज़र्व सैनिक पूरी तरह से थक चुके हैं और अब हमारी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नहीं हैं."
उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह अति रूढ़िवादी हरेदी समुदाय के पुरुषों को सेना में भर्ती करे - ये वे लोग हैं जो अपना पूरा समय पवित्र यहूदी ग्रंथों के अध्ययन में समर्पित करते हैं, और जिन्हें 1948 में इसराइल के गठन के बाद से आम तौर पर अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट मिलती रही है.
इसराइली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनका यह बयान सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर की उस चेतावनी के बाद आया है, जो उन्होंने कल सुरक्षा कैबिनेट को दी थी.
एयाल ज़मीर ने कहा था कि "आईडीएफ़ पतन के कगार पर है."
ठीक एक महीने पहले 28 फ़रवरी को इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए थे. उसके बाद से ही इसराइल लगातार मध्य पूर्व में जंग लड़ रहा है.
इस दौरान इसराइली सेना लगातार ईरान और लेबनान में हमले कर रही है. इसके साथ ही उसने सीरिया में भी अपने दुश्मन के ठिकानों पर हमले किए हैं.
इसके साथ ही इसराइली सेना को हिज़्बुल्लाह और ईरान की ओर से हो रहे हमलों से भी निपटना पड़ रहा है, जिससे सेना कई मोर्चों पर एक साथ उलझी हुई है. (bbc.com/hindi)


