गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजिम, 30 दिसंबर। अखिल भारतीय छात्र संगठन के 72वें स्थापना दिवस के अवसर पर राजिम में गरियाबंद जिला कमेटी द्वारा छात्र सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्र-युवाओं ने शिक्षा से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं पर खुलकर अपनी बात रखी।
सभा को संबोधित करते हुए गरियाबंद जिला अध्यक्ष नंदकिशोर साहू ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था दिन-प्रतिदिन बदहाल होती जा रही है। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, शिक्षकों एवं प्राध्यापकों की भारी कमी बनी हुई है। जो सीमित संख्या में शिक्षक कार्यरत हैं, उनसे भी गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जा रहे हैं। उन्होंने फीस वृद्धि, शाला प्रबंधन समिति के नाम पर लूट तथा साय सरकार द्वारा वादा किए जाने के बावजूद पिछले दो वर्षों से 57 हजार शिक्षकों की भर्ती नहीं किए जाने पर कड़ा सवाल उठाया। जिला सचिव जीवन साहू ने कहा कि शिक्षा सभ्य समाज की नींव है। यह केवल ज्ञान का संचार नहीं करती, बल्कि वैज्ञानिक सोच, तार्किकता और मानवीय मूल्यों का निर्माण भी करती है। राज्य कार्यालय सचिव मेनका निषाद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाठ्य पुस्तकों से क्रांतिकारी और लोकतांत्रिक विषयों में कटौती की जा रही है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में लगभग 10,463 सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है, कॉलेजों को सेमेस्टर सिस्टम व ऑटोनॉमस किया जा रहा है तथा आंगनबाड़ी को फाउंडेशन कोर्स के नाम पर स्कूली शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, जिससे निजी स्कूलों और कॉलेजों को लाभ पहुंचेगा। सभा के अंत में वक्ताओं ने कहा कि संगठन की शुरुआत से ही शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर संघर्षरत रहा है और आगे भी शिक्षा बचाने के लिए छात्रों-युवाओं को संगठित कर एक व्यापक आंदोलन खड़ा करेगा, ताकि आने वाली पीढ़ी को बेहतर और न्यायपूर्ण समाज दिया जा सके।


