दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 4 अगस्त। सुबह से शिवनाथ नदी तट पर शिवभक्तों का मेला देखने को मिला हजारों की संख्या में अलग अलग टोली में शिवनाथ नदी से जल लेकर भगवान भोले बाबा को जल चढ़ाने निकले। सत्तीचौरा में शनिवार को अधिक मास की अंतिम अमावस्या पर कांवड़ यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा सुबह शिवनाथ नदी के घाट से शुरू हुई, जो 11 बजे सत्तीश्वर महादेव मंदिर पहुंची।
गोपाल शर्मा ने बताया कि सुबह शिवनाथ नदी पहुँचकर सभी भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। नदी के जल से कांवड़ भरने के पैदल चलकर सभी श्रद्धालु सत्तीश्वर महादेव मंदिर सत्तीचौरा पहुंचे। यहां अभिषेक और आरती का आयोजन किया गया। विभिन्न स्थानों में शिवभक्तों के ऊपर फूलों की वर्षा की गई कांवडय़ात्री हर-हर महादेव, घर घर महादेव और श्री शिवाय नमस्तुभ्यं का जयघोष करते रहे।
गंजपारा की कावड़ यात्रा की विशेष बात यह रही कि इस कावड़ यात्रा में शिवनाथ नदी तट से सत्तीचौरा तक लगभग 20 से अधिक छोटे बच्चे जिनकी उम्र 4 से 6 वर्ष है वे कावड़ लेकर पैदल चलकर सत्तीश्वर महादेव तक आये और जल चढ़ाये, और पूरे रास्ते झूमते रहे। कांवड़ यात्रा में के लिए 2-3 दिन पहले से ही तैयारी की जा रही थी वार्ड पार्षद प्रतिभा सुरेश गुप्ता ने कहा, कांवड़ यात्रा का उद्देश्य जहां दुर्ग नगर की जीवनदायिनी शिवनाथ नदी का उत्थान है तो वहीं पवित्र मास सावन में कांवड़ से भगवान शिव पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व भी है। सावन के अद्भुत संयोग पर निकली शहर में अलग अलग निकली कांवड़ यात्रा भक्ति का सैलाब है। सभी भक्त कम से कम एक लोटा जल अपने गांव, शहर और घरों में स्थित शिवलिंग पर आज चढ़ाये है।
कांवड़ यात्रा में देखने को मिला कि आज नगर निगम के कर्मचारी रविवार पर अवकाश था परंतु समिति के सदस्यों ने ही पूरे गंजपारा में सफाई की समिति के राजू पुरोहित के नेतृत्व में पूरी सफाई की गई। सावन के अवसर पर कांवड़ यात्रा के अवसर पर वार्ड पार्षद की निधि से मंदिर के समाने डोम का निर्माण किया गया, जिसका उद्घाटन भी किया गया, जिसमें दुर्ग सभापति श्याम शर्मा द्वारा उद्घाटन किया गया वार्ड पार्षद प्रतिभा सुरेश गुप्ता ने पूरे वार्ड में निरंतर विकाश कर रही है। कांवड़ यात्रा में गयानगर दुर्ग ने काशोधन गुप्ता समाज द्वारा कांवड़ यात्रा निकली गई जो गंजपारा वासियों के साथ शिवनाथ नदी से निकली और सत्तीचौरा में एक लोटा जल चढ़ाया कांवड़ यात्रा में आर्चाय डॉ पंडित विक्रांत दुबे द्वारा सर्वप्रथम पूजा अर्चना एवं आरती करवाई उसके बाद कांवड़ यात्रा प्रारंभ हुई, आकर्षित झांकी के साथ यह कांवड़ निकाली गई।



