दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कुम्हारी, 3 अक्टूबर। जगत गुरु शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला छत्तीसगढ़ के प्रमुख बालब्रह्मचारी डॉ. भवानंद स्वामी का ा आगमन कुम्हारी नगर स्थित मानस भवन के गरुड़ पुराण कथा वाचन स्थल पर हुआ, जहां पर की नगर पालिका अध्यक्ष राजेश्वर सोनकर द्वारा श्रद्धा एवं भाव पूर्ण ढंग से उनका स्वागत एवं चरण वंदन किया गया।
डॉ. भवानंद ने अपने प्रवचन में बताया कि गरुड़ पुराण में भगवान नारायण वक्ता है और गरुड़ श्रोता वहीं गरूड़ पुराण में 19 हजार मंत्रो का वर्णन है। जिसमेें दो खंड वर्णित है, जिसमें पहला पूर्व खंड तथा दूसरा उत्तर खंड इसमें मनुष्य योनि के निर्माण से उनके मोक्ष प्राप्ति तक के कालखंड वर्णित है।
उन्होंने समाज पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आजकल अनाज को नाली में फेंक दिया जाता है। स्वामी ने गर्भपात को दुनिया का सबसे बड़ा पाप माना है। भ्रूण हत्या को जघन्य अपराध कहा है इस कार्य से मनुष्य कभी भी मुक्ति को प्राप्त नही करता।
उन्होंने अपने प्रवचन में बताया कि मनुष्य का जीवन का शुरुआत ही बड़ा कष्टपूर्ण होता है। उन्होंने उदहारण स्वरूप बताया कि भ्रूण गर्भअवस्था में 9 माह तक गर्भरूपी छोटी सी कोठरी में रहता है उसे भी बहुत कष्ट होता है।
प्रवचन में डॉ.भवानंद महाराज बताते है कि गुरु के बिना लोगों का कल्याण संभव नही है। तथा बिना योग गुरु जीवन व्यर्थ के समान है। वहीं गुरु का दायित्व भी है कि लोगों को अंधकार से मुक्त करा दे यही गुरु का सच्चा कार्य होता है।


