दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 1 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डा.किरणमयी नायक ने जिला कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिले से आयोग को प्राप्त प्रकरणों की सुनवाई की। सुनवाई के लिए 27 प्रकरण आयोग के समक्ष रखे गए थे, जिसमें से पक्षकारों की उपस्थिति में 22 प्रकरणों की सुनवाई की गई. सुनवाई पूर्ण हो जाने पर 18 प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया। संवेदनशील 2 प्रकरण को रायपुर में सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया है, जिसकी सुनवाई आयोग के कार्यालय रायपुर में 22 अक्टूबर को की जाएगी।
आयोग के समक्ष सुनवाई में मानसिक उत्पीडऩ, शारीरिक उत्पीडऩ, दहेज प्रताडऩा, घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद, कार्यस्थल पर प्रताडऩा व दैहिक शोषण से संबंधित प्रकरण थे, सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को सुना गया। इनमें एक प्रकरण में आवेदिका ने अपनी पति की मृत्यु के उपरांत पारिवारिक संपत्ति पर हिस्सा नहीं दिए जाने का मामला दर्ज कराया था। सुनवाई के दौरान यह पता चला कि आवेदिका के पति की मृत्यु हो गई है। ससुर के नाम पर 3 मकान हैं, जिसकी मृत्यु भी हो गई है। ससुर की मृत्यु के उपरांत नामांतरण में एक मकान में पति का नाम अंकित है। शेष 2 मकान में सास व उनकी 3 पुत्रियों का नाम दर्ज है, जिस मकान में पति का नाम दर्ज है उसमें अपना हिस्सा चाहती है. आयोग ने कहा कि चूंकि एक मकान में पति का नाम दर्ज है इसलिए उस मकान पर पत्नी का हिस्सा बनता है सुनवाई में कहा गया कि सास व 3 पुत्रियों के साथ ही पति का नाम दर्ज होने के चलते उक्त संपत्ति पर पति का बराबर हिस्सा बनता है. आयोग ने दोनों पक्षकारों को समझाइश दिया कि आपसी समझौता कर सकते हैं।
अंजोरा कामधेनु विश्वविद्यालय से 2 प्रकरण आयोग के समक्ष सुनवाई के लिए रखा गया था। इनमें एक प्रकरण में दोनों पक्षों को आयोग ने विस्तार से सुना. जिसमें अनावेदक ने आपत्ति दर्ज किया कि यह प्रकरण 3 वर्ष पुराना है। इस प्रकरण में आवेदिका की शिकायत पर लगातार विभागीय जांच और कार्यवाही लंबित है। आवेदिका द्वारा आयोग को एक सीडी प्रस्तुत किया गया है। उक्त सीडी का आडियो अनावेदक को सुनाया गया जिसमें उन्होंने अपनी आवाज होना बताया। आवेदिका के द्वारा आडियो के समर्थन में किसी प्रकार का कोई गवाह व तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। दोनों पक्षकारों ने गवाह प्रस्तुत करने के लिए आगामी तिथि का मांग की, जिस पर आयोग द्वारा अगली सुनवाई के लिए समय दिया गया है। अंजोरा विश्वविद्यालय एक दूसरे प्रकरण में बताया गया कि यह मामला उच्च न्यायालय में चल रहा है। इस प्रकरण में अनावेदक व विश्वविद्यालय द्वारा आवेदक पर प्रकरण वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है। आयोग द्वारा आवेदिका को समझाइश दी गई कि अपने शिकायत को संशोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव को भी पक्षकार बनाते हैं तो आयोग द्वारा आगामी सुनवाई की जाएगी।


