रायपुर

बैंक और ई-कॉमर्स कम्पनियाँ देश के व्यापारियों के लिए बड़ी खलनायक - केंद्रीय वित्तमंत्री से कैट की शिकायत
30-Nov-2020 4:32 PM 51
बैंक और ई-कॉमर्स कम्पनियाँ देश के व्यापारियों के लिए बड़ी खलनायक - केंद्रीय वित्तमंत्री से कैट की शिकायत

रायपुर, 30 नवंबर। कैट के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी, कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोशी आदि ने बताया कि देश के कुछ प्रमुख बैंकों को व्यापारियों के लिए एक बड़े खलनायक का दर्जा देते हुए कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीथारमन को एक ज्ञापन भेज कर विभिन्न बैंकों द्वारा अमेजन और वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट सहित अन्य ई कॉमर्स कंपनियों पर बैंकों पर ई कॉमर्स कंपनियों के साथ अवैध साठ-गाँठ और व्यापारियों एवं लोगों के साथ भेद -भाव करने का बड़ा आरोप लगाया है और इस सारे मामले की तुरंत जांच की मांग की है। अपनी शिकायत में कैट ने कहा है कि अमेजन, फ्लिपकार्ट एवं अन्य ई कॉमर्स कंपनियों के ऑनलाइन पोर्टल से माल की खरीद करने पर कुछ प्रमुख बैंकों द्वारा 10 प्रतिशत कैश बैक या डिस्काउंट दिया जा रहा है जिससे देश के व्यापारियों का बड़ा अहित हो रहा है। कैट ने बैंकों पर ई कॉमर्स कंपनियों के साथ मिलकर एक कार्टल बनाने का आरोप नहीं लगाया है जो सीधे तौर पर अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है। कैट ने  बैंकों पर देश के लोगों के मौलिक अधिकार  के हनन तथा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के फेयर प्रैक्टिस कोड के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है। कैट ने यह भी कहा है की बैंक और ई कॉमर्स कंपनियों का नापाक गठजोड़ कम्पटीशन एक्ट 2002 का भी सीधे तौर पर उल्लंघन करता है।

श्रीमती सीतारमण को भेजे अपने ज्ञापन में कैट ने कहा कि  मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर हम आपके दरवाजे पर दस्तक देने को मजबूर हो गए हैं क्योंकि देश के अनेक बैंक अपनी मनमर्जी से ई कॉमर्स कंपनियों के साथ अपवित्र गठबंधन कर देश के व्यापारियों के व्यापार को प्रतिस्पर्धा से बाहर रखने के षड्यंत्र में लिप्त हैं। वित्त मंत्री के तौर पर आप इस मामले का तुरंत संज्ञान लें और बैंकों की इस मनमानी को तत्काल रोकें तथा तुरंत इस गंभीर मामले की जांच कराई जाए की आखिरकार बैंक किस आधार पर 10 प्रतिशत का कैश बैक या डिस्काउंट ई कॉमर्स पोर्टल से खरीद पर दे रहे हैं। कैट ने इस आशय का एक ज्ञापन केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री पियूष गोयल को भी भेज कर इस मुद्दे पर उनके हस्तक्षेप का आग्रह किया है।

कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अमर पारवानी ने अपने शिकायती ज्ञापन में बैंकों पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 301 के गंभीर उल्लंघन तथा  भारतीय रिजर्व बैंक के निष्पक्ष व्यवहार संहिता के उल्लंघन का आरोप बैंकों पर लगाया है। उन्होंने कहा की इसके अलावा बैंक कम्पटीशन एक्ट 2002 की धारा 3 (1) का भी सीधा उल्लंघन कर देश में छोटे व्यवसायों के लिए बड़े पैमाने पर व्यवधान पैदा का रहे हैं। उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, सिटी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचएसबीसी बैंक, आरबीएल बैंक का नाम प्रमुख रूप से लेते हुए कहा की ये बैंक भारत के व्यापारियों और नागरिकों के बीच भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहे हैं जो भारत के संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि ये बैंक आमेजान एवं फ्लिपकार्ट सहित अन्य ई कॉमर्स पोर्टलों से माल खरीदने पर अपने बैंक के कार्ड से उसका  भुगतान पर 10 प्रतिशत कैश बैक और अन्य प्रोत्साहन दे रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यदि उसी बैंक के कार्ड का उपयोग करके वो ही उत्पाद ऑफलाइन बाजार से खरीदा जाता है, तो संबंधित बैंक कोई कैश बैक या प्रोत्साहन नहीं दे रहा है। इन कंपनियों के साथ बैंकों की ऐसी मिलीभगत से ऑफलाइन व्यापारियों को निर्बाध कारोबार करने से रोका जा सकता है और इसलिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 301 के उल्लंघन है जो भारत के प्रत्येक नागरिक को व्यापार के अधिकार की गारंटी देता है।
 

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