रायपुर

छत्तीसगढ़ी हमर अस्मिता -प्रो.केएल वर्मा
29-Nov-2020 4:35 PM 30
छत्तीसगढ़ी  हमर  अस्मिता -प्रो.केएल वर्मा

रायपुर, 29 नवंबर। छत्तीसगढ़ी  राजभाषा  दिवस  के  अवसर  पर  विगत दिवस साहित्य  एवं  भाषा-अध्ययनशाला,  रविशंकर शुक्ल  विश्वविद्यालय  में  राष्ट्रीय  ई-संगोष्ठी  का  आयोजन  किया  गया।  छत्तीसगढ़ी  भाषा,  साहित्य, अउ  संस्कृति  विषयक संगोष्ठी  में  कुलपति  प्रो. वर्मा ने कहा  कि  छत्तीसगढ़ी  भाषा,  साहित्य,  अउ  संस्कृति  के  मान  सम्मान  हमर  मान  सम्मान  हे।  छत्तीसगढ़ी  साहित्य  के  अध्ययन के  लिए  लइका  मन  ला  प्रेरित  करना  है। ताकि  छत्तीसगढ़ी  भाषा-संस्कृति,  समृद्ध  हो  सके।

माई  पहुना  प्रो.  चितरंजन  कर  ने  छत्तीसगढ़ी लाके भाषा दशा  अउ  दिशा  पर  व्याख्यान दिया। कार्यक्रम  के  खास  पहुना  श्री  रामनाथ  साहू ने  छत्तीसगढ़ी  में  उपन्यास  लेखन  परम्परा  के विस्तृत  चर्चा  कर  हुए  हीरू  की  कहनी  की  चर्चा  की,  चंदा अमरित  बरसाइस,  कहाँ  बिलागे  मोर  धान  के कटोरा,  आवा,  उढ़रिया,  भुईयां    आदि  के  कथानक  और  संस्कृति  के  विषय  वस्तु  को  विस्तार  से बताया।

कार्यक्रम के पहुना डॉ. अनिल भतपहरी ने प्रागैतिहासिक काल के कबरा पहाड़, जोगीमारा  गुफा  से  लेकर  आर्य,  अनार्य,  द्रविड़  संस्कृति  के  समागम  की  चर्चा  की  तथा  मौखिक  गाथा के  प्राचीन  और  अर्वाचीन  स्वरूप  पर  विस्तृत  चर्चा  की।  
खास  पहुना  प्रो.  राजन  यादव  ने  छत्तीसगढ़ी  लोक  भाषा  की  ताकत  और  लोक  गीत  के विकास  और  समृद्धि  का  उदाहरण  सहित  उल्लेख  किया।  उन्होंने  कहा  कि  साहित्य  में  गेयता  ही  हमारे जीवन  में  महत्व  रखती  है।  उन्होंने गोरखनाथ  की  बानी  से  लेकर  जन्म  गीत,  विवाह  गीत,  सुआ  गीत,  भोजली गीत  देवार  गीत  के  शब्दों  को  व्याख्यायित  किया।  निर्गुण  और  सगुण  रूप  का  र्वणन  करते  हुए  सस्वर कविता  एवं  गीत  की  प्रस्तुति  दी।  

कार्यक्रम  के  संयोजक  प्रो.  शैल  शर्मा रहीं तथा कार्यक्रम  का  संचालन  डॉ.  स्मिता  शर्मा  और  डॉ.  गिरजा  शंकर  गौतम  ने  किया।  विभाग की  प्राध्यापक  सहसंयोजक  डॉ.  मधुलता  बारा  ने  कार्यक्रम  का  समाहार  प्रस्तुत  करते  हुए  धन्यवाद ज्ञापन  दिया।  दीपमाला  शर्मा  तथा  उनके  सहयोगियों  ने  राजगीत  तथा  संगीतमय  लोक  गीत  प्रस्तुत किया।
 

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