कोण्डागांव

जमीन विवाद, गांव वालों ने परिवार का हुक्का-पानी बंद किया
30-Oct-2020 9:51 PM 56
जमीन विवाद, गांव वालों ने परिवार का हुक्का-पानी बंद किया

'छत्तीसगढ़' संवाददाता

विश्रामपुरी / केशकाल, 30 अक्टूबर। जमीन विवाद पर गांव वालों ने बैठक करके ग्रामीण घासीराम एवं उनके सगे संबंधियों का हुक्का पानी बंद कर दिया। उसके घर में कोई भी आना-जाना नहीं करेगा। मजदूर भी उनके घर नहीं जाएगा, न ही किसी दुकान से सामान खरीदेगा। कोई ग्रामीण घासीराम का साथ नहीं देगा। यदि इसका उल्लंघन करते पाया गया तो 50 हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया जाएगा। दंड का भुगतान नहीं करने पर उसे भी बहिष्कार कर दिया जाएगा। 

इस संबंध में कलेक्टर कोंडागांव पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने कहा कि वे मामले को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं और यदि बैठक में सरपंच और उपसरपंच उपस्थित थे, तो उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। वह मामले को बारीकी से देख रहे हैं तथा तत्काल जांच का आदेश दे दिए हैं।

एसडीओपी केशकाल अमित पटेल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जमीन संबंधी झगड़ा है। लड़की से मारपीट करने की शिकायत के पश्चात एफआईआर दर्ज किया गया है। अभी मामले की जांच शुरू की गई है।

मामला केशकाल से 25 किमी दूर धनोरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सवाला का है। जहां गुरुवार को घासीराम के घर के सामने ही एक बैठक रखी गयी। जिसमें सरपंच पति, उपसरपंच मनीष नाग सहित गांव के कई लोग शामिल हुए थे। जिसमें घासीराम के परिवार को हुक्का-पानी बंद करने का फैसला लिया गया। अब घासीराम एवं उनके परिवार जिसमें उनके भाई एवं परिवार के कुल 10 परिवार के सामने विकट समस्या उत्पन्न हो गई है। एक माचिस भी खरीदना है तो 5 किलोमीटर दूर धनोरा जाकर खरीदेगा। घासीराम खवास आदिवासी है। उसके घर में उसकी पत्नी एक पुत्र एवं दो पुत्रियां रहती हैं। इस फैसले के बाद उनके परिवार में भय का माहौल है।

घासीराम ने बताया कि मामले की रिपोर्ट थाने में कर दी गई है। घासीराम ने यह भी बताया कि उसकी  22 वर्षीया पुत्री ने ग्रामीणों के फैसले का विरोध किया तो उससे मारपीट किया गया, जिसकी सूचना भी थाने में दी गई है।

घासीराम ने बताया कि उसका गांव के ही एक व्यक्ति से जमीन का प्रकरण न्यायालय में चल रहा था। एसडीएम के द्वारा उनके पक्ष में फैसला दिया गया है। तत्पश्चात वह खेत में धान का फसल लगाया था, जिससे उस व्यक्ति ने गांव वाले को एकत्र करके भड़काया तथा तथा उसी के तहत मुझे गांव वालों ने बहिष्कार कर दिया है।

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