धमतरी

मगरलोड/ धमतरी, आदिवासी समाज के कार्यक्रम में शामिल हुईं राज्यपाल, कहा- कहीं से न्याय न मिले तो राजभवन आ सकते हैं
मगरलोड/ धमतरी, आदिवासी समाज के कार्यक्रम में शामिल हुईं राज्यपाल, कहा- कहीं से न्याय न मिले तो राजभवन आ सकते हैं
Date : 10-Aug-2019

आदिवासी समाज के कार्यक्रम में शामिल हुईं राज्यपाल
कहा- कहीं से न्याय न मिले तो राजभवन आ सकते हैं 
छत्तीसगढ़ संवाददाता 
मगरलोड/ धमतरी, 10 अगस्त।
विश्व आदिवासी दिवस पर मगरलोड के कृषि उपज मंडी में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में राज्यपाल अनुसुइया उइके शामिल हुईं। उनका कार्यक्रम एकाएक बना। उन्होंने कहा कि जब कहीं से न्याय न मिले। हर तरफ से निराश हो जाएं, तो लोग राजभवन भी आ सकते हैं। उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। इंसाफ दिलाया जाएगा। उप मंडी प्रांगण में जिला स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आदिवासी युवाओं ने समाजिक एकता संगठन का संदेश देते हुए बाइक रैली निकाली। नगर में जय बूढ़ादेव के जयकारे गूंजते रहे। 

मुख्य अतिथि राज्यपाल अनसुइया उइके ने वीरनारायण, गुंडाधुर, रानी दुर्गावती, विरसामुण्डा को नमन किया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार आदिवासी समाज को न्याय मिलना चाहिए।

 यह उनका हक एवं अधिकार है। उन्होंने आदिवासी समाज के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनजातीय समाज अपनी गौरवशाली भाषा, संस्कृति और परम्पराओं के संरक्षण के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान परिदृश्य में अन्य समाजों की तुलना में आदिवासी समाज का विकास अपेक्षाकृत नहीं हो पाया है। भारत के संविधान में प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करने के लिए आदिवासियों को जागरूक व शिक्षित होने की आवश्यकता है। जल, जंगल और जमीन की विरासत को संजोने वाले आदिवासी स्वभावत: सहज व भोले होते हैं। समय की मांग के अनुरूप अब उन्हें अपने अधिकार के प्रति सतर्क व सचेत होने की जरूरत है। राज्यपाल ने आदिवासी समाज को आश्वास्त किया कि वे समाज के विकास एवं उद्धार के लिए प्रयास करेंगी। 
सम्मेलन में अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंद कुमार साय ने समाज के उत्थान के लिए अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की बात कही। सिहावा विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने क्षेत्र में निवासरत आदिवासियों की मूलभूत समस्याओं का उल्लेख करते हुए शासन की योजनाओं एवं नीतियों और उनके क्रियान्वयन पर समाजजनों को जागरूक होने की अपील की। 

आदिवासी परंपरा से किया गया राज्यपाल का स्वागत
उन्होंने आदिवासियों को विलुप्तप्राय कोलांग नृत्य का प्रदर्शन करने वाली छात्राओं के समूह को 5001 एक रुपए की नकद राशि तथा प्रशस्ति-पत्र भी प्रदान किया। साथ ही रंग तरंग नाम के कला जत्था को भी 1001 रुपए प्रोत्साहन स्वरूप दिए। इसके पहले, राज्यपाल का स्वागत समाज के वरिष्ठ लोगों मोरपंख, खुमरी व साफा पहनाकर किया गया। 

 

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