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Date : 10-Sep-2019

युवा बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने युवा रोजगार एवं मार्गदर्शन केन्द्र  -ङ्घशह्वह्लद्ध श्वद्वश्चद्यश4द्वद्गठ्ठह्ल ड्डठ्ठस्र त्रह्वद्बस्रड्डठ्ठष्द्ग ष्टद्गठ्ठह्लह्म्द्ग द्बठ्ठस्रद्बड्ड (वाई ई जी एन) कार्यक्रम शुरू किया है।  
वाई ई जी एन युवा पुरुषों और महिलाओं को विभिन्न कौशल में प्रशिक्षित करता है और नौकरी पाने या कोई अपना रोजगार शुरू करने में मार्गदर्शन करता है। यह कार्यक्रम उन्हें सेना और अर्धसैनिक बलों सहित विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती होने के लिए तैयार करता है और स्वरोजगार के लिए दक्षता हासिल करने में भी मदद करता है।
वाई ई जी एन के सद्भावना कार्यक्रम के अंतर्गत अनेक युवा सेना, अर्धसैनिक बलों, रेलवे और बैंकों में भर्ती हो गए हैं। इसके तहत अनेक युवाओं ने जीविकोपार्जन और अपना कार्य करने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वाई ई जी एन के केंद्रों में कम्प्यूटर प्रशिक्षण सुविधाएं, विभिन्न कौशल में प्रशिक्षण सुविधाएं, योग्य कर्मचारी और युवाओं को लाभदायक रोजगार पाने, उच्च शिक्षा ग्रहण करने या बैंक, रेलवे की परीक्षाओं में बैठने या अन्य क्षेत्रों के लिए मार्गदर्शन करने हेतु विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।
इस कार्यक्रम के तहत मेकैनिक्स, वैल्डिंग, मुर्गीपालन, हेयर ड्रेसिंग और सिलाई का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्वरोजगार का दायरा बढ़ाने के लिए नर्सिंग और मछली पालन का प्रशिक्षण भी शामिल किया जा रहा है। 
 


Date : 31-Jul-2019

हाईड्रोजन-एक रंगहीन, गंधहीन गैस है, जो पर्यावरणीय प्रदूषण से मुक्त भविष्य की ऊर्जा के रूप में देखी जा रही है। वाहनों तथा बिजली उत्पादन क्षेत्र में इसके नए प्रयोग किए गए हैं। हाईड्रोजन के साथ सबसे बड़ा लाभ यह है कि ज्ञात ईंधनों में प्रति इकाई द्रव्यमान ऊर्जा इस तत्व में सबसे ज्यादा है और यह जलने के बाद उप उत्पाद के रूप में जल का उत्सर्जन करता है। इसलिए यह न केवल ऊर्जा क्षमता से युक्त है बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है। 
वास्तव में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय गत दो दशकों से हाईड्रोजन ऊर्जा के विभिन्न पहलुओं से संबंधित वृहत् अनुसंधान, विकास एवं प्रदर्शन (आरडीएंडडी) कार्यक्रम में सहायता दे रहा है। जिसके कारण  वर्ष 2005 में एक राष्ट्रीय हाईड्रोजन नीति तैयार की गई, जिसका उद्देश्य हाईड्रोजन ऊर्जा के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, सुरक्षा, वितरण एवं अनुप्रयोगों से संबंधित विकास के नये आयाम उपलब्ध कराना है। हालांकि, हाईड्रोजन के प्रयोग संबंधी मौजूदा प्रौद्योगिकियों के अधिकतम उपयोग और उनका व्यावसायिकरण किया जाना बाकी है, परन्तु इस संबंध में प्रयास शुरू कर दिये गये हैं। 
हाईड्रोजन पृथ्वी पर केवल मिश्रित अवस्था में पाया जाता है और इसलिए इसका उत्पादन इसके यौगिकों के अपघटन प्रक्रिया से होता है। यह एक ऐसी विधि है जिसमें ऊर्जा की आवश्यकता होती है। विश्व में 96 प्रतिशत हाईड्रोजन का उत्पादन हाईड्रोकार्बन के प्रयोग से किया जा रहा है। लगभग चार प्रतिशत हाईड्रोजन का उत्पादन जल के विद्युत अपघटन के जरिए होता है। तेल शोधक संयंत्र एवं उर्वरक संयंत्र दो बड़े क्षेत्र हैं जो भारत में हाईड्रोजन के उत्पादक तथा उपभोक्ता हैं। इसका उत्पादन क्लोरो अल्कली उद्योग में उप उत्पाद के रूप में होता है।
हाईड्रोजन का उत्पादन तीन वर्गों से संबंधित है, जिसमें पहला तापीय विधि, दूसरा विद्युत अपघटन विधि और प्रकाश अपघटन विधि है। कुछ तापीय विधियों में ऊर्जा संसाधनों की जरूरत होती है, जबकि अन्य में जल जैसे अभिकारकों से हाईड्रोजन के उत्पादन के लिए बंद रासायनिक अभिक्रियाओं के साथ मिश्रित रूप में उष्मा का प्रयोग किया जाता है। इस विधि को तापीय रासायनिक विधि कहा जाता है। परन्तु यह तकनीक विकास के प्रारंभिक अवस्था में अपनाई जाती है। उष्मा मिथेन पुनचक्रण, कोयला गैसीकरण और जैव मास गैसीकरण भी हाईड्रोजन उत्पादन की अन्य विधियां हैं। कोयला और जैव ईंधन का लाभ यह है कि दोनों स्थानीय संसाधन के रूप में उपलब्ध रहते हैं तथा जैव ईंधन नवीकरणीय संसाधन भी है। विद्युत अपघटन विधि में विद्युत के प्रयोग से जल का विघटन हाईड्रोजन  और ऑक्सीजन में होता है तथा यदि विद्युत संसाधन शुद्ध हों तो ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी आती है।