सोशल मीडिया

Date : 08-Aug-2019

बीबीसी न्यूज
सोशल मीडिया पर कुछ जलते हुए मकानों का एक वीडियो इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि भारतीय सेना ने भारत प्रशासित कश्मीर के बांदीपुरा इलाके में लोगों के घरों में आग लगा दी है। करीब सवा मिनट का यह वीडियो फेसबुक पर दस हजार से ज़्यादा बार शेयर किया गया है और तीन लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है। लेकिन अपनी पड़ताल में हमने इस दावे को गलत पाया है। ये कोई ताजा मामला नहीं है, बल्कि डेढ़ साल पुरानी घटना है।
कश्मीर से चलने वाले न्यूज पोर्टल राइजिंग कश्मीर और कश्मीर ऑब्जर्वर के अनुसार 27 मार्च 2018 को उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के लाचीपोरा गाँव में यह घटना हुई थी। इस गाँव के चार घरों में आग लगी थी जिसके कारण सात परिवार प्रभावित हुए थे और उनके करीब 20 मवेशी इस आग में झुलस गये थे।
गाँव के लोगों ने यह आरोप लगाया था कि पास में कोई अग्निशमन सुविधा न होने के कारण आग इतनी बढ़ गई। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों में इस बात का जिक्र नहीं मिलता कि लाचीपोरा गाँव में आग लगने का कारण क्या था?
सोमवार को भारत के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा भारत प्रशासित कश्मीर से धारा-370 हटाये जाने की घोषणा से पहले ही जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट और दूरभाष सेवाएं बंद कर दी गयी थीं।
शनिवार को जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती के ऑर्डर दिये गए थे जिसे लेकर काफी हलचल बढ़ी। अभी भी जम्मू-कश्मीर से संपर्क टूटा हुआ है और वहां की स्थिति के बारे में तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे हैं।
लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर जम्मू-कश्मीर से जुड़ी कुछ अफवाहें भी फैलाई जा रही हैं जिनकी सच्चाई हमने पता की।
दक्षिणपंथी रुझान वाले तमाम फेसबुक गु्रप्स में श्रीनगर के नागरिक सचिवालय की यह तस्वीर इस दावे के साथ शेयर की जा रही है कि सरकारी बिल्डिंग से अब कश्मीर का झंडा हटा दिया गया है।
अपनी पड़ताल में हमने पाया कि यह तस्वीर साल 2016 की है जिसे कल की तस्वीर और आज की तस्वीर में तुलना करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस पुरानी फोटो को एडिट कर इससे कश्मीर का झंडा मिटा दिया गया है और बिल्डिंग के ऊपर सिर्फ तिरंगा लगा दिया गया है। सोशल मीडिया पर गलत सूचना के साथ शेयर की जा रही इस तस्वीर को अगर आप गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि झंडों के अलावा इन दो तस्वीरों में बाकी सभी चीजें हूबहू हैं। सचिवालय के सामने खड़े लोग, उनके कपड़े और उनकी स्थिति भी एक जैसी है।
समाचार एजेंसी एएनआई, पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल और बीजेपी कश्मीर के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इस बात की पुष्टि की है कि नागरिक सचिवालय पर पहले की तरह दोनों झंडे अब भी लगे हुए हैं।
दक्षिणपंथी रुझान वाले कई यूजर सोशल मीडिया पर मुस्लिम लोगों की पिटाई का एक वीडियो इस दावे के साथ शेयर कर रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और पत्थरबाजों को पीटना शुरू कर दिया है। इस वीडियो में दिखाई देता है कि पुलिस ने कुछ लोगों पर लाठीचार्ज कर दिया है और उन्हें पीट रही है।
जिन गु्रप्स में यह वीडियो शेयर किया गया है, उनमें लिखा है, कश्मीर में धारा-370 और 35-ए के हटते ही प्रसाद बंटना शुरु हो गया है। लेकिन ये एक भ्रामक सूचना है। रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि वीडियो अगस्त 2015 का है और ये घटना बिहार की राजधानी पटना में स्थित गर्दनीबाग स्टेडियम के पास हुई थी।
पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मदरसों में पढ़ाने वाले टीचर्स ने राज्य के 2400 मदरसों में काम की स्थिति सुधारने की माँग को लेकर गर्दनीबाग स्टेडियम में प्रदर्शन किया था। जैसे ही ये प्रदर्शनकारी स्टेडियम से बाहर आये, पुलिस ने इन पर लाठीचार्ज कर दिया था। इस घटना के बाद बिहार पुलिस ने अपनी सफाई में कहा था कि प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की तरफ जाने की कोशिश कर रहे थे।
पाकिस्तान में भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी नेता और हुर्रियत काँफे्रंस (गिलानी गुट) के चेयरमैन सैय्यद अली शाह गिलानी का एक वीडियो काफी शेयर किया जा रहा है। जिन्होंने इस वीडियो को शेयर किया है, उन्होंने लिखा है कि भारत सरकार ने धारा-370 हटाने से पहले देखिए शाह गिलानी को कैसे कैद किया।
इस वीडियो में गिलानी को कहते सुना जा सकता है, दरवाजा खोलो। मैं भारतीय लोकतंत्र के जनाजे में शामिल होना चाहता हूँ। हमने पाया कि इस वीडियो का जम्मू-कश्मीर के मौजूदा घटनाक्रम से कोई वास्ता नहीं है। ये वीडियो अप्रैल 2018 का है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अप्रैल 2018 में शोपियाँ जिले में भारतीय फौज और चरमपंथियों के बीच हुए तीन बड़े एनकाउंटरों के बाद सैय्यद अली शाह गिलानी समेत अन्य अलगाववादी नेताओं ने मार्च का आह्वान किया था। लेकिन भारतीय सेना ने मार्च शुरु होने से पहले ही गिलानी को उनके घर में नजरबंद कर दिया था। ये वायरल वीडियो उसी समय का है।
पाकिस्तान में इससे पहले अलगाववादी नेता यासीन मलिक की दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में मौत की अफवाह फैली थी जिसे तिहाड़ जेल प्रशासन ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यासीन मलिक बिल्कुल ठीक हैं।
 


Date : 30-Jul-2019

जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिस्कवरी के बेहद चर्चित कार्यक्रम मैन वर्सेज वाइल्ड में नजर आएंगे। इस मशहूर शो के एंकर बेयर ग्रिल्स ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस कार्यक्रम का एक टीजर जारी किया है। उन्होंने लिखा है कि दुनिया के 180 देशों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक अनदेखा अंदाज देखने को मिलेगा। बेयर ग्रिल्स ने आगे लिखा कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण में आ रहे बदलावों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जंगल के सफर पर निकलेंगे।
इस वीडियो की चर्चा दुनिया भर के मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी हो रही है। सोशल मीडिया पर हैशटैग ‘पीएम मोदी ऑन डिस्कवरी’ के साथ इस पर कई अलग-अलग तरह की टिप्पणियां और मीम शेयर किए जा रहे हैं। इनमेें से कुछ दिलचस्प टिप्पणियां -
कौतुक श्रीवास्तव- अगर बेयर ग्रिल्स सचमुच में मोदीजी को किसी रोमांचक माहौल में ले जाना चाहते हैं तो उन्हें मोदी जी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ले जाना चाहिए।
संदीप ककडिय़ा- पीएम मोदी न्यूज चैनल्स पर आते रहे हैं। फिर वे (अपनी फिल्मों के जरिए) एंटरटेनमेंट चैनल पर आए। अब पीएम मोदी डिस्कवरी चैनल पर आ रहे हैं। मैं अब इंतजार कर रहा हूं कि वे आस्था और संस्कार चैनलों पर आएं।
फिर स्टार स्पोर्ट्स
और सबसे आखिर में वे नेटफ्लिक्स पर आएं।
निहाल किरनली- जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार
यश.यूके- मैन वर्सेस वाइल्ड का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वाला एपिसोड जारी होने के बाद डिस्कवरी नेटवर्क
अतुल खत्री- और मुझे लगा था कि प्तमैन वर्सेस वाइल्ड वीडियो वह होगा जिसमें आईआईटी बॉम्बे के क्लासरूम में गायें घास चरती हुई नजर आएंगी।
बॉलीवुड *** - बॉलीवुड म्यूजिक के साथ सब बेहतर लगता है।
 


Date : 12-Jul-2019

कर्नाटक में इस्तीफा देने वाले कांग्रेस विधायकों की संख्या बढ़ती जा रही है और इस बीच कल गोवा में पार्टी के 15 में से दस विधायक सत्ताधारी भाजपा में शामिल हो गए। यही वजह है कि कर्नाटक के साथ गोवा का राजनीतिक घटनाक्रम भी अब सोशल मीडिया पर चर्चा में है। यहां विरोधियों के साथ-साथ अन्य लोगों ने भी भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह अलोकतांत्रिक तरीके अपनाकर विरोधी पार्टी के विधायकों को अपने पाले में कर रही है।
राजनीतिक टिप्पणीकार और लेखक सुधींद्र कुलकर्णी ने इस घटनाक्रम पर ट्वीट किया है, 'जब सिर्फ एक विधायक अपनी पार्टी छोड़ता है तो बहुत संभावना होती है कि उसने यह कदम अपनी अंतरात्मा की आवाज पर उठाया हो। लेकिन जब कई विधायक एक साथ पार्टी छोड़ते हैं तो यह पक्का होता है कि यह किसी साजिश के तहत किया गया फैसला है। अगर आपको लगता है कि भाजपा कर्नाटक और गोवा में लोकतंत्र की भावना की हत्या कर रही है तो इसकी निंदा कीजिए।Ó
बताया जा रहा है कि गोवा में भाजपा के कई स्थानीय नेता इन कांग्रेस विधायकों के पार्टी में शामिल होने पर खुश नहीं हैं। इसी हवाले से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर का बयान भी यहां कई लोगों ने शेयर किया है। उन्होंने कहा है कि उनके पिता के निधन के बाद गोवा भाजपा अब 'नई दिशाÓ में मुड़ चुकी है और सिर्फ समय ही बताएगा कि वह सही पथ पर है या नहीं।
सोशल मीडिया में गोवा के इस राजनीतिक घटनाक्रम पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :
राजदीप सरदेसाई- गोवा में कांग्रेस के 15 में से दस विधायक भाजपा में शामिल हो गए हैं... 'उगता सूरज को सलामÓ वाली सोच तमाम राज्यों में दिख रही है... लोगों को सिर्फ सत्ता चाहिए, विचाराधारा से उन्हें कोई मतलब नहीं।
एनआरएस- सवाल ये नहीं है कि दस विधायक भाजपा में शामिल क्यों हुए, सवाल ये है कि बाकी पांच कांग्रेस में क्यों रुके हुए हैं।
कौस्तुभ- ईवीएम में गड़बड़ी वाली बात भूल जाइए, अब तो अगर आप कांग्रेस के विधायक चुनते हैं तो वे भी आखिर में भाजपा में शामिल हो रहे हैं।
दिनेश प्रभु-गोवा में कुछ ज्यादा राजनीतिक स्थिरता, अस्थिरता की वजह बनेगी और यह कुछ ही दिनों में दिख जाएगा।
किरण प्रकाश- पहले कर्नाटक, फिर गोवा। अब अगला नंबर किसका है? मध्य प्रदेश? राजस्थान? जो कुछ भी इस समय चल रहा है वो दिखाता है कि चुनाव बेमतलब हो गए हैं। (सत्याग्रह ब्यूरो)


Date : 11-Jul-2019

क्रिकेट विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की हार के बाद सोशल मीडिया पर शोक की लहर दिख रही है। हालांकि यहां एक बड़े तबके ने इस हार के बावजूद भारतीय टीम को सांत्वना दी है और उसका हौसला बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट करके कहा है, ‘निराशाजनक नतीजा, लेकिन अंत तक टीम इंडिया का जुझारूपन देखकर अच्छा लगा। भारत ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान काफी अच्छी बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण किया जिस पर हमें काफी गर्व है। जीत और हार जीवन का हिस्सा है। भविष्य के लिए टीम को शुभकामनाएं।’

वहीं दूसरी तरफ क्रिकेट के प्रशंसकों ने इस हार के लिए रोहित शर्मा से लेकर विराट कोहली तक सबसे भरोसेमंद कहे जाने वाले बल्लेबाजों को जिम्मेदार ठहराया है। अर्णब रे का ट्वीट है, ‘आज के मैच में हार के लिए कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार है तो वे हैं विराट कोहली। अगर आप नॉक आउट मुकाबले में बतौर कप्तान और मुख्य बल्लेबाज सिर्फ एक रन बनाते हैं तो विश्व कप की ट्रॉफी उठाने के कतई हकदार नहीं हैं। जो कप्तान विश्वकप जीते यानी धोनी और कपिल देव, वे कम से कम एक महत्वपूर्ण मैच में तो अच्छा खेले ही थे।’

इसके साथ ही यहां अपनी धुरंधर बल्लेबाजी से भारत को जीत की उम्मीद देने वाले रवींद्र जडेजा की जमकर तारीफ हुई है। एक यूजर की टिप्पणी है, ‘नतीजा चाहे जो रहा हो, लेकिन किसी भी विश्व कप में यह किसी भारतीय द्वारा खेली गई सबसे अच्छी पारी थी। बहुत बढिय़ा जड्डू (रवींद्र जडेजा)।’ वहीं दूसरी तरफ 77 गेंदों में 50 रन बनाने वाले महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बने हुए हैं। कुछ लोगों ने उन्हें भी यह कहकर हार के लिए जिम्मेदार बताया है कि उन्होंने बहुत धीमी गति से बल्लेबाजी की थी। हालांकि यहां धोनी के समर्थन में भी जमकर प्रतिक्रियाएं आई हैं। आशीष मिश्रा ने फेसबुक पर लिखा है, ‘राहुल, रोहित, कोहली, कार्तिक ने मिलकर नौ रन बनाए हैं, लेकिन 50 रन बनाने वाले धोनी को रिटायर हो जाना चाहिए!’ यही नहीं धोनी के रन आउट को भी कई लोगों ने मैच का टर्निंग प्वाइंट बताया है और प्रतिक्रियाएं देते हुए इसकी तस्वीर शेयर की है।

भारतीय क्रिकेट टीम का विश्व कप का सफर खत्म होने पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

कीर्तीश भट्टा- बुरा ना मानो क्रिकेट है...

हर्षा भोगले- एक बार फिर वही। 2015, 2017, 2019... दमदार दिख रही भारतीय टीम दबाव वाले मैच में बिखर जाती है।

उपेन पटेल- हम बस तीन इंच से विश्व कप हारे हैं...

राजदीप सरदेसाई-महान खिलाड़ी धोनी अपनी आखिरी पारी में रन आउट हो गए... जिंदगी के लिए सबक : कभी-कभी आपका दिमाग तो तैयार रहता है लेकिन शरीर नहीं! खैर, आज एक बेहतर टीम ने मैच जीता।

आइरनी मैन-

वनडे की शीर्ष टीम - भारत

टेस्ट की शीर्ष टीम - भारत

वनडे का शीर्ष बल्लेबाज - विराट कोहली

टेस्ट का शीर्ष बल्लेबाज - विराट कोहली

वनडे का शीर्ष गेंदबाज - जसप्रीत बुमराह

विश्व कप के गु्रप स्टेज में शीर्ष पर रहने वाली टीम - भारत

... इस सब के बावजूद भारतीय टीम 240 का आंकड़ा नहीं पा सकी। यह सबसे ज्यादा तकलीफदेह बात है।

कुणाल कामरा- भारत अपने सभी विश्व कप तब जीता है जब कांग्रेस सत्ता में थी!

कार्टूनिस्ट अभिषेक तिवारी- अब भारतीय टीम को न्यूज चैनलों के मूर्खतापूर्ण विश्लेषणों से कौन बचाएगा?


Date : 06-Jul-2019

आज मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश हुआ है और सोशल मीडिया पर इसकी दोपहर से ही सबसे ज्यादा चर्चा है। इसके चलते ट्विटर पर बजट 2019 लगातार टॉप ट्रेंडिंग टॉपिक में बना हुआ है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने जो भी खास बजट प्रस्ताव संसद में पेश किए, सोशल मीडिया में ज्यादातर पर सरकार समर्थक और विरोधी पक्षों के बीच बहस देखी जा रही है। अगर आयकर में आंशिक राहत को छोड़ दें तो फेसबुक और ट्विटर पर मध्यवर्ग के ज्यादातर लोगों ने इस बजट को निराशाजनक बताया है।

इस बीच आज यहां बजट भाषण से इतर बजट दस्तावेजों के 'कवर' ने भी काफी सुर्खियां बटोरी हैं। अब से पहले वित्तमंत्री अमूमन बजट दस्तावेज ब्रीफकेस में संसद लाते रहे हैं। लेकिन आज निर्मला सीतारमण बही-खाते वाले लाल कपड़े में बांधकर ये दस्तावेज लाई थीं। इस हवाले से मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने कहा है कि यह भारतीय परंपरा का हिस्सा है और पश्चिमी विचारों की गुलामी से निकलने का प्रतीक है। सोशल मीडिया में जहां एक तरफ लोगों ने इस 'बदलाव' का समर्थन किया है, वहीं एक बड़े तबके ने इसको लेकर एक से बढ़कर एक मजेदार टिप्पणियां की हैं और सरकार पर तंज भी कसे हैं। ऐसी ही कुछ प्रतिक्रियाएं :
द मंक...- एक छोटी सी जानकारी - मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन शिकागो यूनिवर्सिटी में पढ़े हैं। निर्मला सीतारमण की बेटी ने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से मास्टर की डिग्री हासिल की है... पश्चिमी विचारों की गुलामी से निकलने के लिए अभी बहुत कुछ बचा है!
पन्स्टर- निर्मला सीतारमण ब्रीफेकेस के बजाय लाल रंग के कपड़े की चार तहों के बीच बजट भाषण को ले गई थीं। यानी साफ है कि बजट में बैंकों के लिए बहुत कुछ है, खासकर हिंदू वोट बैंक के लिए।
उमाशंकर सिंह- जिस देश में आर्यभट जैसे गणितज्ञ पैदा हुए उस देश की सरकार ने अपने 'बही-खाते' में 'पांच ट्रिलियन डॉलर' के बजाय उसे रुपये में बदलकर और उसमें लगने वाले शून्यों को गिनकर बताने तक की जरूरत नहीं समझी! ये आर्यभट का अपमान हुआ...
कीर्तीश भट्ट- मोदी जी 70 साल से पेश हो रहे 'बजट' की 'हिंदी (बही-खाता)' करने वाले पहले प्रधानमंत्री बने।
दीपांकर पटेल- ब्रीफकेस गुलामी का प्रतीक है! और अंग्रेजी?
रिटायर्ड वसूली भाई- यह कहना बंद कीजिए कि मध्यवर्ग, जिसने भाजपा को वोट दिया उसे इस बार के बजट में कुछ नहीं मिला। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से उनको तारीफ (वित्तमंत्री ने बजट पेश करते हुए आयकरदाताओं को धन्यवाद दिया था) तो मिली है! (सत्याग्रह)


Date : 05-Jul-2019

दो हफ्ते पहले मध्य प्रदेश के भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय एक सरकारी कर्मचारी के साथ मारपीट करने के मामले में सोशल मीडिया पर चर्चा में थे तो आज कांग्रेस के महाराष्ट्र के एक विधायक नितेश राणे कुछ ऐसे ही मामले में यहां सुर्खियां बटोर रहे हैं। नितेश राणे महाराष्ट्र के कणकवली विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। आज मुंबई-गोवा हाइवे पर उनके समर्थकों द्वारा एक सरकारी इंजीनियर पर कीचड़ उड़ेलने की घटना सामने आई है और इस दौरान राणे इस इंजीनियर को डांटते-डपटते और धकियाते भी दिखे हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़ा वीडियो कई लोगों ने शेयर किया है और इसके साथ राणे की जमकर आलोचना की गई है।
कई लोगों ने इस घटना को लेकर कांग्रेस को भी घेरने की कोशिश की है, लेकिन वहीं इसके जवाब में इन्हें याद दिलाया गया है कि नितेश के पिता नारायण राणे भाजपा में शामिल हो चुके हैं और फिलहाल पार्टी की तरफ से राज्यसभा सांसद हैं। वहीं आकाश विजयवर्गीय के पिता कैलाश विजयवर्गीय भी भाजपा के नेता हैं। सागर ने आकाश विजयवर्गीय और नितेश राणे को निशाने पर लेते हुए तंजभरा ट्वीट किया है, ‘(नेताओं की) दूसरी पीढ़ी तीसरे दर्जे की है!’
सोशल मीडिया में नितेश राणे से जुड़े इस मामले को लेकर आईं कुछ और प्रतिक्रियाएं :
विशाल वी शितोले- नीतेश राणे, अगर आप में हिम्मत है तो कीचड़भरी बाल्टी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री या लोकनिर्माण मंत्री के ऊपर उड़ेलकर दिखाएं... एक निर्दोष अधिकारी को अपनी मर्दानगी न दिखाएं।
राजदीप सरदेसाई- कोंकण इलाके का प्रतिनिधित्व एक जमाने में बहुत ही सज्जन नेता किया करते थे - मधु दंडवते। लेकिन आज राणे (पिता-पुत्र) इस इलाके का चेहरा हैं। महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति में गिरावट डराने और दुखी करने वाली है।
ऐसी-तैसी डेमोक्रेसी- भाजपा के पास अब तीन विकल्प हैं :
1. नितेश को गिरफ्तार करवाना।
2. नितेश की उपेक्षा करना।
3. नितेश को पार्टी में शामिल करना।
...आपके हिसाब से भाजपा क्या करेगी?
केतकी परब- यह गुंडागर्दी है। नितेश राणे आप एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और सिर्फ इसलिए आपको यह हक नहीं मिल जाता कि ऐसी हरकत करें। एक इंजीनियर बनने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, उसे आपकी तरह पिता से तोहफे में कुछ नहीं मिला! (सत्याग्रह)
 

 

 


Date : 04-Jul-2019

राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा देने की खबर आज सोशल मीडिया में काफी चर्चा में है। राहुल गांधी ने यह जानकारी देते हुए अपने ट्विटर हैंडल से चार पेज की एक चि_ी साझा की है और इसे हजारों लोगों ने लाइक और रीट्वीट किया है। यह बड़ी ही भावुक सी चि_ी है और सोशल मीडिया पर कई लोगों ने राहुल के इस फैसले के साथ-साथ इस चि_ी की तारीफ भी की है। वहीं इस पर कार्टूनिस्ट मंजुल ने ट्विटर के जरिए चुटकी ली है, 'जिसने राहुलजी का इस्तीफा लिखा है अगर उसी ने उनके चुनावी भाषण भी लिखे होते तो कांग्रेस की हालत आज कहीं बेहतर होती।'
इस बीच आज भी कई कांग्रेसी नेताओं के बयान आए हैं कि राहुल गांधी को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। फेसबुक और ट्विटर पर इस बात का जिक्र करते हुए इन नेताओं की आलोचना की गई है। वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह का कहना है, 'अब कांग्रेस के नेताओं को मान लेना चाहिए कि राहुल गांधी नहीं मानने वाले इसलिए मिलकर मनाने या धरना प्रदर्शन में शामिल होने की नौटंकी छोड़कर नए अध्यक्ष के चयन में जुट जाना चाहिए। अपने 'पूर्व अध्यक्ष' की ये बात याद रहे कि 'पार्टी को पुनर्गठित करने के लिए कड़े फैसले लेने होंगे।Ó वहीं सोशल मीडिया पर यह कयासबाजी भी चल रही है कि कांग्रेस का अगला अध्यक्ष कौन होगा।
आज के इस घटनाक्रम पर सोशल मीडिया में आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
आलोक शिंदे- राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद देश में बेरोजगारी की दर और बढऩे वाली है। अब उन्हें गरियाने वाले कई पत्रकार, कॉमेडियन, दूसरे-तीसरे दर्जे के फिल्मकार, और 40 पैसा प्रतिट्वीट करने वाले लोग और एनजीओ खतरे में पड़ गए हैं।
सुशांत सिंह- राहुल गांधी ने अपने इस्तीफे के पहले पेज पर पार्टी की हार की जिम्मेदारी ली है, लेकिन जब आप तीसरे पेज तक पहुंचते हैं तो वे दावा करते मिलते हैं कि कांग्रेस इसलिए हारी क्योंकि सारे संस्थान- जैसे चुनाव आयोग, न्यायपालिया, मीडिया आदि को कब्जे में किया गया था। वे फिर कन्फ्यूज दिख रहे हैं? या फिर वे इस्तीफा देकर महात्मा तो दिखना चाहते हैं, लेकिन हार की जिम्मेदारी लेना नहीं चाहते?
राजदीप सरदेसाई- मेरे ख्याल से राहुल गांधी को वह काम करने का श्रेय मिलना चाहिए जो इस देश के नेता बहुत कम करते हैं... असल में इस्तीफा देना और चुनावों में हार की जिम्मेदारी लेना। लेकिन अब कांग्रेस 'सिरकटे मुर्गेÓ की तरह जहां-तहां भागकर उन्हें नीचा दिखा रही है।
बरखा दत्त- यह अच्छी बात है कि राहुल गांधी अपने इस्तीफे पर अड़े रहे लेकिन बिना चुनाव के कांग्रेस कार्यसमिति अगर अगला अध्यक्ष नियुक्त करती है तो वह व्यक्ति भी कठपुतली होगा और फिर बदलाव की प्रक्रिया का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
शकुनि मामा- कांग्रेस की बीमारी यही है कि उसके नेता न तो पहले राहुल गांधी की सुनते थे और न अब सुन रहे हैं। (सत्याग्रह)


Date : 02-Jul-2019

भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज शिखर धवन के क्रिके्रट विश्व कप से बाहर होने के बाद अब चोट लगने के कारण विजय शंकर भी यह टूर्नामेंट नहीं खेल पाएंगे। उनकी जगह बीसीसीआई के चयनकर्ताओं ने मयंक अग्रवाल को टीम में जगह दी है और सोशल मीडिया पर आज इसकी काफी चर्चा है। प्रथम श्रेणी और आईपीएल में खेलने वाले मयंक ने अभी तक कोई भी अंतरराष्ट्रीय वनडे मैच नहीं खेला है और इस दलील के साथ फेसबुक-ट्विटर पर एक बड़े तबके ने उनके चयन पर हैरानी जताई है और सवाल उठाए हैं।
वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया में यह भी कहा जा रहा है कि मयंक के बजाय टीम में अंबाती रायडू को शामिल किया जाना था। अंबाती चौथे नंबर के बहुत उम्दा बल्लेबाज माने जाते हैं और विश्वकप के पिछले मैचों में भारतीय टीम का मध्यक्रम कमजोर दिखा है। यही वजह है कि लोगों ने टीम में उनका चयन न होने पर काफी निराशा जताई है।
इसी बहस पर सोशल मीडिया में आई कुछ दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
हर्षा भोगले- मयंक अग्रवाल का खेल बीते बरसों के दौरान काफी अच्छा रहा और उनका टेस्ट मैचों में भी पदार्पण बढिय़ा था। वे दावेदारों में नहीं थे लेकिन उन्हें काफी अहम मौके पर विश्वकप में खेलने का मौका मिला है। यह अच्छा चयन है और मैं उनके लिए खुश हूं। लेकिन इससे यह भी पता चलता है कि बेचारे रायडू रडार (चयनकर्ताओं की नजरों से) से कितनी दूर चले गए हैं।
हर्षित सिंह- विजय शंकर क्रिकेट विश्व कप से बाहर हो गए हैं और उनकी जगह मयंक अग्रवाल को चुना गया है। इसके बाद अंबाती रायडू।
दुदेवा- अंबाती रायडू क्रिकेट के लालकृष्ण आडवाणी हैं।
केआर आदित्य- कुल मिलाकर मयंक अग्रवाल ने वो परीक्षा पास कर ली जिसमें वे शामिल भी नहीं हुए थे!
आकाश चोपड़ा- जब ओपनर (शिखर धवन) को चोट लगी तो मध्यक्रम के बल्लेबाज (ऋषभ पंत) को बुलाया गया। जब मध्य क्रम के बल्लेबाज को चोट लगी तो एक ओपनर (मयंक अग्रवाल) को मौका दिया गया है!
असीम साद- अंबाती रायडू के साथ यह अन्याय हुआ है। एक बल्लेबाज जिसने एक भी वनडे मैच नहीं खेला उसे उस बल्लेबाज के ऊपर तवज्जो दी गई है जिसका औसत 50 रनों का है। क्या ही कबाड़ा प्रबंधन है। राजनीति सभी जगह है।
 


Date : 27-Jun-2019

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश आज सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में हैं और यहां उनका एक वीडियो काफी शेयर किया गया है। मध्य प्रदेश के इंदौर से भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय ने बुधवार को नगर निगम कर्मचारियों की क्रिकेट के बैट से पिटाई की है और यह इसी घटना का वीडियो है। फेसबुक और ट्विटर पर इस खबर के हवाले से लोगों ने आकाश को खूब जमकर निशाने पर लिया है। पत्रकार कादंबिनी शर्मा का ट्वीट है, ‘सत्ता का अहंकार ऐसा दिखता है... इसमें बाकियों से कोई फर्क नहीं होता।’
आकाश के पिता कैलाश विजयवर्गीय की छवि एक विवादित नेता की रही है और उन्हें ऊटपटांग बयान देने के लिए भी पहचाना जाता है। आज की घटना को लेकर भी उन्होंने अपनी इसी छवि को मजबूत करने वाली प्रतिक्रिया दी है। एक टीवी पत्रकार ने जब उनसे इस बारे में पूछा तो उनका कहना था, ‘तुम्हारी औकात क्या है!’ यही वजह है कि आज सोशल मीडिया पर उनकी भी आलोचना की जा रही है। पश्चिम बंगाल में बीते कुछ समय से हो रही हिंसक घटनाओं से इस मामले को जोड़ते हुए फेसबुक पर आशीष मिश्रा ने चुटकी ली है, ‘कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं और आकाश विजयवर्गीय इंदौर को बंगाल बनाने का प्रभार संभाल रहे हैं।’ सोशल मीडिया में इसी घटना को लेकर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :
सतीश आचार्य- हमारे पास एक जोरदार बल्लेबाज है, शिखर धवन के बदले इसे टीम में शामिल किया जाए।
सलिल त्रिपाठी- वे (आकाश विजयवर्गीय) मध्य प्रदेश के भविष्य के मुख्यमंत्री हैं। और अपने बैट से करतब दिखा रहे हैं। (यह हमारी खुदकिस्मती है कि उन्हें क्रिकेट के विश्वकप में यह करतब दिखाने के लिए नहीं चुना गया।)

कप्तान- जिस तरह बल्ले का इस्तेमाल आपके (कैलाश विजयवर्गीय) सुपुत्र ने इंदौर की सडक़ों पर किया है उसे देखकर लगता है कि उसे इस वक़्त इंग्लैंड में होना चाहिए था। भारतीय टीम में चौथे नंबर के बल्लेबाज के स्थान पर।
उमाशंकर सिंह- कैलाश विजयवर्गीय के विधायक बेटे आकाश विजयवर्गीय को खतरनाक ‘बल्लेबाजी’ के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। जमानत पर बाहर आने के बाद वे भी एन्जॉय करेंगे।
चौकीदार नीरव मोदी- कुछ महान शख्सियतों के प्रसिद्ध नारे :
महात्मा गांधी : करो या मरो
भगत सिंह : इंकलाब जिंदाबाद
लालबहादुर शास्त्री : जय जवान, जय किसान
सुभाष चंद्र बोस : तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।
कैलाश विजयवर्गीय : तेरी क्या औकात है!


Date : 22-Jun-2019

21 जून 2015 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था और तब से लेकर अब तक हर बार इस दिन सोशल मीडिया पर इसी की धूम रहती है। इसमें भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दिन से जुड़े कार्यक्रम की यहां खूब तस्वीरें शेयर होती हैं। आज इस मौके पर उन्होंने झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित योग अभ्यास कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और सोशल मीडिया पर इसकी कई तस्वीरें और वीडियो शेयर हुए हैं।
इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यहां अपने एक ट्वीट की वजह से जमकर ट्रोल किए जा रहे हैं। दरअसल आज भारतीय सेना ने भी योग दिवस से जुड़े आयोजनों की कुछ तस्वीरें ट्विटर पर साझा की थीं। इन्हीं में से एक में ‘डॉग यूनिट’ के कुत्ते योगाभ्यास करते कुछ जवानों (डॉग हैंडलर) के साथ-साथ उनकी जैसी ही मुद्राओं में देखे जा सकते हैं। राहुल गांधी ने ये तस्वीरें अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर की हैं और इसके साथ कैप्शन दिया है ‘न्यू इंडिया’। माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने इस कैप्शन के जरिए मोदी सरकार पर तंज कसा है क्योंकि उसने अपने पिछले कार्यकाल में ‘न्यू इंडिया’ का नारा दिया था और इसके तहत 2022 तक कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए थे।
फेसबुक और ट्विटर पर इस ट्वीट को लेकर ज्यादातर लोगों ने राहुल गांधी पर सवाल उठाए हैं। पत्रकार राहुल कंवल का ट्वीट है, ‘यह समझ से परे है कि अगर सेना की डॉग यूनिट योग कर रही है तो इससे राहुल गांधी को क्या दिक्कत है। अगर खुद का मजाक नहीं उड़वाया जा रहा तो यहां किसका मजाक उड़ाया जा रहा है? जवानों का या कुत्तों का?’ सोशल मीडिया में राहुल गांधी के इसी ट्वीट पर आईं कुछ और प्रतिक्रियाएं -
आरती टिकू सिंह- तस्वीर बहुत खूबसूरत है लेकिन राहुल गांधी ने जो ट्वीट किया है, वह अप्रिय है। शानदार जानवर, बहादुर भारतीय सैनिक, लेकिन ओछी टिप्पणी।
अमृता भिंडर- आप (राहुल गांधी) सिर्फ एक काम करना जानते हैं। गलतियां, फिर और गलतियां। इनमें भी ज्यादातर में आपका ही मजाक उड़ता है।
प्रतीक शुक्ला- क्या आप (राहुल गांधी) 2024 के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा को थाली में सजाकर जीत देना चाहते हैं? कोई सबक नहीं सीखा गया।
सरल पटेल- न्यू इंडिया यानी जहां सरकार उत्तर प्रदेश/बिहार और देश के दूसरे हिस्सों में भी स्वास्थ्य सेवाओं और बच्चों की मौत से ज्यादा योग को तवज्जो देती है। (सत्याग्रह ब्यूरो)
 


Date : 11-Jun-2019

जाने-माने क्रिकेटर युवराज सिंह के क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने की खबर के चलते आज सोशल मीडिया पर लोगों ने उनको लेकर काफी भावुक प्रतिक्रियाएं दी हैं। इसके साथ ही यहां एक बड़े तबके ने 2011 के क्रिकेट विश्व कप की वे तस्वीरें और वीडियो भी शेयर किए हैं जब मैच की आखिरी बॉल के बाद वे महेंद्र सिंह धोनी से गले मिल रहे थे। और वह वीडियो भी जब अपनी पारी के बीच में ही उन्हें उल्टी हुई थी लेकिन इसके बावजूद वे पिच पर डटे रहे। इसके अलावा एक ओवर में छह छक्के मारने (2007 का टी20 विश्व कप) से जुड़ा वीडियो शेयर करके भी लोगों ने उनकी तारीफ में टिप्पणियां की हैं और उन्हें उनकी अगली पारी के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
जहां तक क्रिकेट के दिग्गजों की बात है तो सचिन तेंदुलकर ने अपने इस साथी खिलाड़ी की इस घोषणा पर ट्वीट किया है, 'युवराज आपका करियर बहुत ही शानदार रहा। जब भी टीम को जरूरत हुई आप चैम्पियन की तरह खेले। मैदान के अंदर और बाहर आपने जो जीवटता दिखाई वह कमाल की थी। आपको दूसरी पारी के लिए शुभकामनाएं और आप ने क्रिकेट के लिए जो भी किया उसके लिए शुक्रिया।'
टीम इंडिया के वर्तमान कप्तान विराट कोहली का ट्वीट है, '... आपने हमें कई यादगार पल और जीत दी हैं। मैं आपको भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।' वहीं टीम इंडिया के विस्फोटक बल्लेबाजों में शुमार रहे वीरेंद्र सहवाग का ट्वीट किया है, 'खिलाड़ी आएंगे और जाएंगे, लेकिन युवराज सिंह जैसा खिलाड़ी मिलना बहुत मुश्किल होता है। उन्होंने काफी मुश्किल वक्त का सामना किया, बीमारियों को हराया, गेंदबाजों को हराया और दिल जीते। अपनी लड़ाई और इच्छा-शक्ति से कई लोगों को प्रेरित किया...'
युवराज सिंह के संन्यास पर सोशल मीडिया में आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं -
गब्बर- मेरे ख्याल से युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट टीम के मध्यक्रम और हमारी उम्मीदों के बीच के पुल थे। उनके पहले हमारी टीम का मध्यक्रम हार की स्थिति में 'सम्मानजनक स्कोर' तक ही पहुंचने की कोशिश करता था। वे एक या दो रन लेते रहते थे और दर्शक कब का टीवी बंद कर चुके होते थे। लेकिन युवराज सिंह ने हमें मजबूर किया कि हम टीवी चालू रखें।
बाबू भैया- हम सब इन तस्वीरों को सुन सकते हैं। युवराज सिंह को हम कभी नहीं भूलेंगे।
सौरभ- अगर दादा (सौरव गांगुली) ने हमें विदेशी पिचों पर जीतना सिखाया, तेंदुलकर ने बैटिंग करना सिखाया, सहवाग ने विस्फोटक बल्लेबाजी सिखाई तो युवराज सिंह ने भारतीय टीम को फील्डिंग करना सिखाया।
रोफल गांधी- तुस्सी जा रहे हो युवराज सिंह पाजी। हमारा बचपन और हमारी जवानी अब ऑफीशियली गुजर गई है। (सत्याग्रह)


Date : 09-Jun-2019

टीम इंडिया के दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी के दस्तानों पर भारतीय सेना के 'बलिदान बैजÓ को लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की आपत्ति पर सोशल मीडिया में भी जमकर बहस हो रही है। यहां ज्यादातर भारतीयों ने महेंद्र सिंह धोनी का समर्थन करते हुए आईसीसी की आलोचना की है। पत्रकार आदित्य राज कौल का ट्वीट है, 'महेंद्र सिंह धोनी के बलिदान बैज पर आईसीसी का रुख बचकाना है। यह फैशन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि इसका प्रतीकात्मक महत्व है। आईसीसी ने भारतीय सेना का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का अपमान किया है।Ó
इसके साथ ही यहां आईसीसी पर चुटकियां भी ली गई हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि यहां सभी लोग धोनी के समर्थन में ही हैं। फेसबुक पर दीपांकर पटेल ने सवाल उठाया है,'एक छोटी सी बात है समझिये! कल को पाकिस्तानी टीम सेना की वर्दी पहनकर क्रिकेट खेलने लगी तो किसी को ऐतराज तो नहीं होगा न?Ó सोशल मीडिया में इस बहस पर आई कुछ दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
सागर- आईसीसी- माफ कीजिए, हम धोनी को 'बलिदान बैजÓ वाले ग्लव्ज पहनने की अनुमति नहीं दे सकते।
माणक गुप्ता- अगर धोनी के शरीर पर बना ऐसा टैटू सबको दिखता तब क्या होता?
गब्बर-धोनी अपना एक ग्लव्ज उतारें और आईसीसी को क्रिकेट प्रशासन से रन आउट कर दें।
सोनिया सिंह- अगर क्रिकेटर स्पॉन्सर लोगो अपने कपड़ों पर लगा सकते हैं तो धोनी अपनी रेजीमेंट का लोगो क्यों नहीं लगा सकते?
आकाश बब्बर- 
पहली तस्वीर - कमजोर अंपायरिंग पर आईसीसी।
दूसरी तस्वीर - धोनी के बलिदान बैज पर आईसीसी।
धोनीइज्म- आप सेना के प्रतीक को तो धोनी के पैड, कैप, बैट या जर्सी से हटा दोगे। लेकिन आप लेफ्टिनेंट कर्नल एमएस धोनी के दिल से उनके देश के लिए प्यार नहीं हटा सकते। (सत्याग्रह ब्यूरो)


Date : 12-May-2019

सोशल मीडिया पर आज की हलचल

सोशल मीडिया पर आज सुबह से 'टाइम' पत्रिका के कवर की चर्चा हो रही है। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में शुमार अमेरिका की 'टाइम' मैगजीन ने अपने ताजा अंक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो कवर पेज पर लगाई है और उनसे जुड़ी कवर स्टोरी का टाइटल दिया है : 'इंडियाज डिवाइडर इन चीफ' यानी 'भारत को बांटने वाला मुख्य कर्ताधर्ता।' इस कवर को भाजपा और नरेंद्र मोदी विरोधियों ने फेसबुक और ट्विटर पर जमकर शेयर किया है। साथ ही उनके खिलाफ बड़ी ही दिलचस्प टिप्पणियां की हैं। चूंकि भाजपा समर्थक और उसके नेता विरोधियों को देश विरोधी और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग का सदस्य' बताते रहे हैं तो इसी हवाले से फेसबुक पर दिलीप खान की तंजभरी पोस्ट है, 'यह अंतरराष्ट्रीय गौरव का पल है। टाइम के कवर पर डंका बाबू की तस्वीर छपी है। टाइम ने इन्हें टुकड़े-टुकड़े गैंग का सरगना बताया है।'
नरेंद्र मोदी पर यह स्टोरी आतिश तासीर ने की है। वे भारतीय पत्रकार तवलीन सिंह और पाकिस्तान के राजनेता रहे सलमान तासीर के बेटे हैं। सोशल मीडिया में भाजपा समर्थकों ने आतिश को पाकिस्तानी बताते हुए इस स्टोरी को प्रोपेगेंडा बताया है। टाइम के इस अंक की खास बात है कि इसमें इयान ब्रीमेर की एक और स्टोरी भी है जिसका शीर्षक है – मोदी द रिफॉर्मर। यह स्टोरी नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हुए आर्थिक सुधारों पर केंद्रित है और इसे सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थकों ने जमकर शेयर किया है। दिलचस्प बात है कि तवलीन सिंह ने भी इसे ट्वीट किया है। इस कवर पर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
द देशभक्त- टाइम मैगजीन के 'इंडियाज डिवाइडर इन चीफ' वाले अंतरराष्ट्रीय कवर पर विवाद होने के बाद... टाइम भारत में प्रकाशित होने वाले कवर की तैयारी कर रही है ताकि वह यहां पर बची रह सके!
स्वाति चतुर्वेदी-मोदी ने अपने कार्यकाल में 91 विदेश यात्राएं कीं ताकि वे खुद को एक अंतरराष्ट्रीय नेता के तौर पर स्थापित कर लें, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। उनको अब भी 'भारत को बांटने वाला' ही माना जाता है।
रोशन राय- जब टाइम मैगजीन ने मोदी की तारीफ की थी तब भक्त (भाजपा समर्थक) : देखिए, अब तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी नमो की तारीफ कर रहा है।
जब टाइम मैगजीन मोदी की आलोचना कर रही है तब भक्त : अबे वो पाकिस्तानी रिपोर्टर है। टाइम बिकी हुई है। कांग्रेस की एजेंट है... इस पत्रिका का बहिष्कार किया जाए।
संकासूर- टाइम मैगजीन यह बताना तो भूल ही गई कि मोदी ने एक दूसरे के कट्टर विरोधियों (विपक्षी पार्टियों) को भी एक कर दिया!