सोशल मीडिया

Posted Date : 14-Jul-2018
  • भारतीय एथलीट हिमा दास द्वारा फिनलैंड में आयोजित आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने की खबर आज सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रही. असम की रहने वाली 18 साल की हिमा दास यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हैं और इस उपलब्धि पर उन्हें चहुंओर से बधाई संदेश मिल रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमा को बधाई देते हुए ट्वीट में लिखा है कि आने वाले सालों में यह उपलब्धि कई नए एथलीटों को प्रेरित करती रहेगी. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हिमा दास की इस दौड़ का वीडियो ट्विटर पर पोस्ट करते हुए उन्हें बधाई दी है.


    सोशल मीडिया पर राजनीतिक छींटाकसी हर मुद्दे पर चलती रहती है सो यहां इस खबर की आड़ में भी नेताओं और राजनीतिक पार्टियों पर तंजभरी प्रतिक्रियाएं आई हैं. गोपाल कृष्ण‏ ने लिखा है, ‘काश मोदी जी 10 साल पहले प्रधानमंत्री बने होते तो ओलंपिक रेस में भी मेडल ही मेडल मिलते.... मनमोहन सिंह जी ने तो रफ्तार ही कम कर डाली थी.’ भारत को मिली इस उपलब्धि के हवाले से यहां कई लोगों ने कन्याभ्रूण हत्या के खिलाफ और महिला सशक्तिकरण के पक्ष में प्रतिक्रियाएं दी हैं. ट्विटर पर एक यूज़र ने लिखा है, ‘आज अगर आपको उत्तर-पूर्व की लड़की हिमा दास पर गर्व है तो प्लीज कल से उनके साथ भेदभाव न करें.’
    शौनक रॉय-...मैं इस बात को लेकर बहुत खुश हूं इंटरनेट पहले वनडे मैच में इंग्लैंड पर भारत को मिली जीत के बजाय गोल्ड मेडलिस्ट हिमा दास को लेकर खुशियां जता रहा है.
    सतीश आचार्य-असम के धान के खेतों से...
    अरुण नाइक-यह जरूरी नहीं कि देश को गौरवान्वित करने के लिए रूस (फुटबॉल विश्वकप) ही जाया जाए, फिनलैंड में दौड़ लगाकर भी यह काम किया जा सकता है.
    आनंद महिंद्रा-कुछ दिन पहले मुझे यह मेरे इनबॉक्स में मिला था. किसी वजह से मैंने इसे बचाए रखा... अब इसे इस्तेमाल कर रहा हूं, यह बताने के लिए कि हिमा दास के दौड़ जीतने के बाद मैंने कैसा महसूस किया...(सत्याग्रह)

    ...
  •  


Posted Date : 13-Jul-2018
  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के ‘हिंदू पाकिस्तान’ वाले बयान पर आज सोशल मीडिया में जमकर बहसबाजी हुई है. कल शशि थरूर ने तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि अगर भाजपा अगला आम चुनाव जीत गई तो भारत को ‘हिंदू पाकिस्तान’ में तब्दील कर देगी. भाजपा समर्थकों और अन्य लोगों ने इस बयान के आधार पर शशि थरूर की खूब आलोचना की है. ट्विटर पर माणक गुप्ता ने उनसे सवाल पूछा है, ‘चार साल में भारत कितना हिंदू पाकिस्तान बन गया जो मोदी सरकार दोबारा आने पर पूरा बन जाएगा?’ इसके साथ ही यहां कांग्रेस को भी घेरा जा रहा है. ट्विटर हैंडल आई सृजना पर तंजभरी टिप्पणी है, अगर भाजपा 2019 का चुनाव जीती तो भारत हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा, लेकिन अगर कांग्रेस जीती तो भारत पाकिस्तान (2) बन जाएगा.
    सोशल मीडिया पर थरूर के इस बयान के हवाले से भाजपा विरोधियों ने उसकी कथित सांप्रदायिक राजनीति को भी निशाना बनाया है और पार्टी की आलोचना की है. आलोक वर्मा का ट्वीट है, जब मोदी के कार्यकाल में एक मंत्री मॉब लिंचिंग करने वालों को माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर स्वागत कर रहा है तो इसका मतलब है कि भारत पहले ही हिंदू पाकिस्तान बन चुका है.
    सोशल मीडिया में शशि थरूर के इस बयान पर आई कुछ और टिप्पणियां :
    बट्टी-शशि थरूर का कहना है कि भाजपा भारत को हिंदू पाकिस्तान में तब्दील कर देगी. कोई भी इस बात से सहमत दिखेगा तो उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी जाएगी.
    सेंट सिनर-मैं शशि थरूर के इस बयान से सहमत नहीं हूं कि अगर भाजपा 2019 का चुनाव जीती तो भारत हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा. वह उससे भी बदतर बनेगा. वह सीरिया बन जाएगा.
    शशि थरूर-पूंथुरा शिवक्षेत्रम (त्रिवेंद्रम का एक शिव मंदिर) में, हिंदू विरोधी घोषित किए जाने से ठीक पहले! 
    आरती टिकू-अगर भाजपा सत्ता में वापस आती है तो भारत हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा, और कांग्रेस या ‘धर्मनिरपेक्ष गठबंधन’ सत्ता में आता है तो भारत गैर-हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा. चाहे जो हो, भारत का पाकिस्तान बनना तय है. सो ज्यादा तनाव मत लीजिए...
    शमसिदा तायब- मैं शशि थरूर के इस बयान से सहमत नहीं हूं कि अगर भाजपा 2019 का चुनाव जीतती है तो भारत हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा... दरअसल तब यह उससे भी बुरा...नागपुरिस्तान बनेगा. (सत्याग्रह)

    ...
  •  


Posted Date : 12-Jul-2018
  • मुंबई में बीते दस दिनों के दौरान करीब 865 मिलीमीटर बारिश हुई है. मौसम विभाग के अनुसार मुंबई में औसतन एक महीने में जितनी बारिश होती है, यह उतनी ही मात्रा है. जाहिर है कि इसके चलते देश की आर्थिक राजधानी अस्त-व्यस्त नजर आ रही है और सोशल मीडिया में इस पर लगातार चर्चा हो रही है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर अक्सर आरोप लगता है कि वह शहर में साफ-सफाई और जल-निकासी के प्रबंधन में कोताही बरतती है और इसी वजह से जरा सी बारिश में ही मुंबई का जन-जीवन थम जाता है. इसी हवाले से सोशल मीडिया पर आज भी बीएमसी को निशाना बनाया गया है. पूर्व पत्रकार विनोद कापड़ी का ट्वीट है, ‘देश के सबसे संपन्न, समृद्ध शहर मुंबई में सिर्फ बारिश होने पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (एनडीआरएफ) को तैनात करना पड़ता है. यह तथ्य ये बताने के लिए काफी है कि मुंबई में बीएमसी और राज्य सरकार दशकों से क्या कर रही हैं.’
    इस बीच फेसबुक और ट्विटर पर भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा और महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता केशव उपाध्याय की एक तस्वीर कई लोगों ने शेयर की है. इस तस्वीर में मुंबई की बारिश के बीच ये दोनों छाता लिए घुटने-घुटने तक पानी में कहीं जाते हुए दिख रहे हैं. इस तस्वीर के साथ सोशल मीडिया पर खूब मजेदार टिप्पणियां आई हैं. फेसबुक पर आशीष प्रदीप ने लिखा है, ‘रावण से युद्ध के लिए समुद्र पार कर जाती वानर सेना…’ श्रीकांत ढाकने का तंज है, ‘संबित पात्रा विकास को ढूंढ़ते हुए जो पानी में डूब गया है...’
    मुंबई में हो रही भारी बारिश पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं
    गब्बर- इस समय सभी मुंबईकर फुटबाल की टीम हैं और मुंबई थाईलैंड की गुफा बना हुआ है.
    भैरवी गोस्वामी-मुंबई की बारिश में तो सुपरमैन को भी मुश्किल हो जाती है :
    डीएसके-मुंबई में रियल एस्टेट के दाम अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं क्योंकि अब हर बिल्डिंग सी-फेसिंग है.
    इंडियन-पहली तस्वीर - आम दिनों में मुंबई
    दूसरी तस्वीर – बारिश के दिनों में मुंबई....
    कुदरत के पास अनुशासन सिखाने का बड़ा सख्त तरीका है.
    माधवन नारायणन-मुंबई को लगता था कि वो न्यूयॉर्क जैसा था और फिर उसे लगा कि वो शंघाई बनेगा. लेकिन असल में वो वेनिस में बदल गया है.
    कीर्तीश भट्ट-आज लिख रहे हैं (मीडिया वाले) ‘बारिश से थमी मुंबई’ कल बारिश में एक रेहड़ी वाले की फोटो लगाकर लिखेंगे ‘बारिश में भी नहीं थमी मुंबई’
    मोहित यादव-मुंबई में बारिश रोकने का अब एक ही उपाय बचा है… (बारिश के लिए मध्य प्रदेश में) जिन मेंढक-मेंढकी का ब्याह करवाया गया था, अब उनका तलाक करवा दिया जाए. (सत्याग्रह)

    ...
  •  


Posted Date : 11-Jul-2018
  • केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा रिलायंस समूह के प्रस्तावित जियो इंस्टिट्यूट को उत्कृष्ट संस्थानों की सूची में शामिल किए जाने की खबर कल से ही सोशल मीडिया पर चर्चा में है. जियो इंस्टिट्यूट अभी कागजों में ही है, फिर भी सरकार द्वारा इसे उत्कृष्ट संस्थानों की सूची में शामिल करने पर यहां कई लोगों ने सवाल उठाए हैं. प्रतिष्ठित इतिहासकार रामचंद्र गुहा का ट्वीट है, ‘अंबानी की वह यूनिवर्सिटी जिसका अभी अस्तित्व ही नहीं है, उसको इस तरह प्राथमिकता देना काफी चौंकाने वाली बात है. खासकर इसलिए भी क्योंकि (सूची में) कई प्रथम श्रेणी के निजी विश्वविद्यालयों की अनदेखी की गई है. क्या इन्हें बेहतरीन होने की और इस बात की सजा दी जा रही है कि यहां के लोग स्वतंत्र सोच-विचार के होते हैं.’
    इस खबर के चलते फेसबुक और ट्विटर पर चुटकुलों की भी बाढ़ आई हुई है. यहां एक बड़े तबके ने अलग-अलग नेताओं पर तंज कसते हुए सुझाव दिए हैं कि उन्हें जियो इंस्टिट्यूट के किस विभाग का प्रमुख होना चाहिए. आशुतोष उज्ज्वल ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है, ‘जियो यूनिवर्सिटी के प्रिंसिपल इन वेटिंग.’ वहीं राजस्थान एक भाजपा विधायक ज्ञानदेव आहूजा, जो जेएनयू में कंडोम के इस्तेमाल से जुड़ा बयान देकर चर्चा में आए थे, को लेकर दिलीप खान ने सुझाव दिया है कि उन्हें जियो इंस्टिट्यूट के सांख्यिकीय विभाग का प्रमुख बनाया जाना चाहिए.
    सोशल मीडिया में इस खबर पर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
    गब्बर-हर दिन सुबह सैकड़ो छात्र अहमदाबाद से बुलेट ट्रेन पकड़ते हैं और बॉम्बे के जियो इंस्टिट्यूट में पढ़ने जाते हैं. इन छात्रों को एजूकेशन लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि यहां लगने वाली भारी-भरकम ट्यूशन फीस उस 15 लाख रुपये से चुका दी गई है जो उन्हें पिछले साल मिले थे.
    जेट ली (वसूली भाई)- जियो इंस्टिट्यूट के बाहर अपनी डिग्री पाने के लिए लाइन लगाए छात्र-छात्राएं.
    अमित तिवारी-जियो यूनिवर्सिटी के टीचर - ‘सिलेबस पूरा न होगा तो क्या? हम तो फ़कीर हैं, झोला उठाकर चल पड़ेंगे जी.’
    डिटेक्टिव- पहले दीक्षांत समारोह में जियो इंस्टिट्यूट के टॉपर का भाषण.
    जियो इंस्टिट्यूट-जियो इंस्टिट्यूट के लिए कोई कागज इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और पेड़ों को बचाने के लिए पाठ्य-सामग्री वॉट्सएप पर उपलब्ध कराई जाएगी.
    उपाध्यक्ष, रामपाल युवा पार्टी- जियो इंस्टिट्यूट में हेडमास्टर हाजिरी लेते हुए.
    नितिन ठाकुर-जियो इंस्टिट्यूट पर चुटकुले बनाकर हंसना-हंसाना एक बात है… कुछ वक्त निकालकर इस सरकार का दुस्साहस भी महसूस कीजिए कि ये अब आपको किस लेवल का मूर्ख समझने लगी है.
    आयरनी ऑफ इंडिया-जियो इंस्टिट्यूट (2019 बैच) के बीस सर्वश्रेष्ठ छात्र. (सत्याग्रह)

    ...
  •  


Posted Date : 10-Jul-2018
  • उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की बागपत जिला जेल में गोली मारकर की गई हत्या की खबर सोशल मीडिया पर आज सुबह से ही चर्चा में है. इस खबर के चलते मुन्नाबजरंगी ट्विटर के ट्रेंडिंग टॉपिक में भी शामिल हुआ है. यहां कई लोगों ने इस हत्या को राजनीतिक साजिश बताया है. ट्विटर हैंडल ‏ राजीव शालीमार पर टिप्पणी है, ‘यह एक सोची-समझी हत्या है क्योंकि वो (मुन्ना बजरंगी) कई लोगों की असलियत उजागर कर सकता था. इसके (हत्या के) पीछे सरकार है.’
    मुन्ना बजरंगी की हत्या के हवाले से सोशल मीडिया में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर कई लोगों ने सवाल खड़े किए हैं और योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना की है. फेसबुक पर मोहम्मद अनस की पोस्ट है, ‘जेल के भीतर प्रेम प्रकाश सिंह ऊर्फ मुन्ना बजरंगी की हत्या यूपी में जंगलराज के चरम की निशानी है… बाहर इनकाउंटर हो रहे हैं और जेल के भीतर हत्या. कानून फिर रह ही कहां गया?’ रंजन रवि ने तंजभरी टिप्पणी की है, ‘यूपी में गजब का राम राज्य है. जेल में मुन्ना बजरंगी को दस गोली मारी गईं... ऐसे ही कारनामों के कारण योगी और मोदी विश्व में प्रसिद्ध हैं.’
    सोशल मीडिया में इस खबर पर आईं कुछ और प्रतिक्रियाएं :
    अमित तिवारी-मुन्ना बजरंगी को जेल में गोली मार दी गयी… यूपी में अब क्रिमिनल्स के लिये सबसे सेफ केवल विधानसभा है.
    अभिषेक द्विवेदी-11 सितम्बर, 1998 : जब मुन्ना बजरंगी एनकाउंटर के बाद पंत हॉस्पिटल में चमत्कारिक ढंग से जीवित हो उठा था.
    द्विवेदी344- 11 सितम्बर 1998- जब #मुन्नाबजरंगी #एनकाउंटर बाद चमत्कारिक ढंग से पंत हॉस्पिटल में जीवित हो उठा था.... मुन्ना_बजरंगी
    आशुतोष उज्ज्वल-बागपत जेल हाई सिक्योरिटी है, लेकिन जहां मुन्ना बजरंगी को गोली मारी गई वहां कोई सीसीटीवी नहीं है. इससे ज्यादा हाई सिक्योरिटी अग्रवाल स्वीट्स में होती है.
    नीलोत्पल शुक्ला-बागपत के हाई सिक्योरिटी जेल में गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी की हत्या... न सड़कों पर महिलाएं सुरक्षित न जेल में अपराधी… यूपी का बीजेपी राज.
    चंचल बीएचयू-जेल में कैदी की सामान्य मृत्यु भी शक के दायरे में होती है, बाकायदे उसकी आधिकारिक जांच होती है, क्योंकि कोई भी विचाराधीन कैदी हो या सजायाफ्ता, उसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार पर होती है. यहां तो मुन्ना बजरंगी की हत्या खुलेआम जेल में और गोली मार कर की गई... देश के जो मौजूदा हालात हैं, उसमें अब तक जेल सबसे महफूज जगह थी आज वह भी सुरक्षित नहीं रही.(सत्याग्रह)

    ...
  •  


Posted Date : 07-Jul-2018
  • पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी बेटी मरियम को भ्रष्टाचार के मामले में वहां की एक अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने की खबर आज भारतीय सोशल मीडिया यूजर के बीच भी काफी चर्चा में है. इस हवाले से यहां कई लोगों ने पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति पर चिंता जाहिर की है. लेखक और राजनीतिक चिंतक सुधींद्र कुलकर्णी का ट्वीट है, ‘मेरे जैसे पाकिस्तान के सभी शुभचिंतक महसूस करते हैं कि उसे एक सामान्य लोकतंत्र बनने की जरूरत है. बार-बार के झटके न तो उसकी राजनीति के लिए ठीक हैं, न ही समाज के लिए. पाकिस्तान के आगामी चुनाव की विश्वसनीयता अब सवालों के घेरे में है.’ वरिष्ठ पत्रकार हरिंदर बावेजा की प्रतिक्रिया है, ‘पत्नी (कुलसुम नवाज) अचेतन (लंदन के एक अस्पताल में) हैं और बाप-बेटी को जेल की सजा सुना दी गई है. पाकिस्तान कभी नहीं बदलेगा. यहां फैसला करने में सेना जजों से भी ऊपर है.’


    पनामा पेपर्स में नाम आने के बाद नवाज शरीफ और उनकी बेटी के ऊपर भ्रष्टाचार का यह मामला दर्ज किया गया था. पनामा पेपर्स में अमिताभ बच्चन सहित कुछ और भारतीयों के नाम भी शामिल थे. सोशल मीडिया में कई लोगों ने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया है कि आखिर भारत में इस मामले को लेकर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई.

    सोशल मीडिया में इस खबर पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

    आमिर खान-यकीन मानिए, आज नवाज शरीफ अगर इंडिया में होते तो पनामा पेपर्स में फंसने के बावजूद जेल नहीं जाते, बल्कि अमिताभ बच्चन की माफिक सरकारी ब्रांड एंबेसडर होते...

    बीइंग भट-अडियाला जेल नवाज शरीफ और मरियम सफदर का इंतजार कर रही है.

    पन्सटर-पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के मामले में दस साल जेल की सजा सुनाई गई है. अब वे सिर्फ नवाज कहलाएंगे.
    बट्टी-पहले आसाराम, फिर राम रहीम और अब नवाज शरीफ. मोदी जी के सभी दोस्त आखिरकार जेल पहुंच जाते हैं.
    कप्तान-मोदीजी पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए जिनके शासनकाल में नवाज़ शरीफ को जेल हुई. (सत्याग्रह)

    ...
  •  


Posted Date : 06-Jul-2018
  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चीन के सबसे बड़े सरकारी बैंकों में शुमार बैंक ऑफ चाइना को भारत में कामकाज के लिए लायसेंस जारी कर दिया है. मीडिया में यह खबर कल आई थी और उसके बाद से सोशल मीडिया में इस पर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. इन खबरों के मुताबिक पिछले दिनों जब शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में भाग लेने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन गए थे, उसी समय उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान बैंक ऑफ चाइना को लायसेंस जारी करने को लेकर प्रतिबद्धता जता दी थी. सोशल मीडिया पर एक बड़े तबके ने इस बात का जिक्र करते हुए इस चीनी बैंक के भारत में प्रवेश पर आशंका जाहिर की है. ऐसा ही एक ट्वीट है, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैंक ऑफ चाइना को लायसेंस जारी कर दिया है. यह बाबा रामदेव जैसे स्वदेशी कार्यकर्ताओं और भारतीय बैंकों के लिए एक बड़ा झटका है...’
    नरेंद्र मोदी 2014 के लोक सभा चुनाव के पहले यूपीए सरकार पर चीन के सामने झुकने का आरोप लगाते रहे हैं और एक बार उन्होंने यह भी कहा था कि चीन को ‘लाल आंखें’ दिखाते हुए उससे बात की जानी चाहिए. आज इस हवाले से भाजपा विरोधियों और अन्य लोगों ने यहां उन्हें जमकर घेरा है. इसके अलावा यहां उन भाजपा समर्थकों पर भी तंज किया गया है जो गाहे-बगाहे चीनी सामान के बहिष्कार का आह्वान करने लगते हैं. सुयश सुप्रभ की ऐसी ही एक फेसबुक पोस्ट है, ‘चीन की पिचकारी हटाओ, लेकिन चीनी बैंक लाओ. एंटी-रैशनल सरकार की ‘नेशनल’ सोच!’ इसके साथ ही फेसबुक और ट्विटर पर कई लोगों ने विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे भगोड़े बैंक डिफॉल्टरों का जिक्र करते हुए भी इस खबर पर कुछ मजेदार टिप्पणियां की हैं.

    आरबीआई द्वारा बैंक ऑफ चाइना को लायसेंस जारी करने की खबर पर सोशल मीडिया में आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :
    श्याम-चाईनीज़ का तो पता नहीं, मगर बैंक ऑफ चाइना जरूर मुंबई पहुंच गया और हम मोदी-मोदी करते रह गए!
    हिमांशु-मोदी जी चीन के राष्ट्रपति को ‘लाल आंखें’ दिखाते हुए और बैंक ऑफ चाइना को भारत में कामकाज के लिए आमंत्रित करके उनकी (चीन की) अर्थव्यवस्था बर्बाद करते हुए.
    कप्तान-सुना है ‘बैंक ऑफ़ चाइना’ भारत में खुलने वाला है. लेकिन चायनीज़ झालर की तरह इससे निकाले हुए नोट भी बाज़ार में ज्यादा दिन तक नहीं चलेंगे. सतर्क रहना, सावधान रहना!
    विनय कुमार दोकानिया-हमारे ब्रिलिएंट नरेंद्र मोदी का एक और मास्टर स्ट्रोक. इस वक्त हमारे बैंक डूब रहे हैं और इसलिए यह बैंक ऑफ चाइना को कामकाज की अनुमति देने का सबसे अच्छा मौका है ताकि अपने बैंकों के साथ-साथ उनके बैंक को भी बर्बाद करके चीनी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ी जा सके.
    जेट ली (वसूली भाई)-चीनी नेतृत्व से वादा करने के बाद आरबीआई ने बैंक ऑफ चाइना को भारत में कामकाज के लिए लायसेंस जारी कर दिया है. अब माल्या जैसे डिफॉल्टर बैंक ऑफ चाइना से लोन लेंगे और भाग जाएंगे. यह चाइना को बर्बाद करने के लिए मोदी जी का मास्टर स्ट्रोक है.(सत्याग्रह)

    ...
  •  


Posted Date : 05-Jul-2018
  • दिल्ली में चुनी हुई सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों के बंटवारे को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आज सोशल मीडिया पर खूब चर्चा है। इसके चलते ट्विटर पर दिल्लीपॉवरटसल  ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल हुआ है। यहां एक बड़े तबके ने इस फैसले पर दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और यहां की जनता को बधाइयां दी हैं। इसके साथ ही यहां सुप्रीम कोर्ट की भी तारीफ हो रही है। वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह का ट्वीट है, यह संविधान की मूल भावना और दिल्ली की जनता की जीत है। इसी तरीके से संवैधानिक अदालतें (संवैधानिक खंडपीठ) काम करती हैं। इस मौके पर सभी पांचों जजों ने आगे बढ़कर एक बार फिर हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों को मजबूत किया है...
    सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि दिल्ली के उपराज्यपाल भूमि, पुलिस और कानून-व्यवस्था के अलावा किसी दूसरे मसले पर राज्य सरकार के कामकाज में दखल नहीं दे सकते। इस हवाले से फेसबुक और ट्विटर पर कई लोगों ने इस फैसले को उपराज्यपाल और केंद्र सरकार के लिए एक झटका बताया है। हालांकि शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी भी की है कि दिल्ली में अराजकता की स्थिति पैदा नहीं की जा सकती और यहां भाजपा समर्थक इसे अपनी जीत बता रहे हैं। चूंकि इस मसले पर कांग्रेस अब भी दुविधा में दिख रही है और इसको लेकर भी यहां कुछ प्रतिक्रियाएं आई हैं। वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई का ट्वीट है, कांग्रेस को इस मसले पर पहले से अपनी रणनीति तैयार करनी चाहिए थी...आज के फैसले के बाद वह न तो यहां की रही, न वहां की...
    सोशल मीडिया में सुप्रीम के कोर्ट के इस फैसले पर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं-
    शकुनि मामा-अरविंद केजरीवाल की तरह अब मोदी जी को भी अपने काम में बाधा बन रहे नेहरू के खिलाफ केस करना चाहिए।
    राजेश प्रियदर्शी-सदा सत्य बोलो, मिल जुलकर काम करो, संविधान का पालन करो, अच्छे बच्चे झगड़ा नहीं करते, चलो घर जाओ और प्यार से रहो, दोनों बच्चे कह रहे हैं कि हम जीते, हम जीते।
    विष्णु नागर-केंद्र सरकार की ओर से नई डस्टबिन का ऑर्डर प्लेस कर दिया गया है ताकि दिल्ली के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को 'उचितÓ सम्मान दिया जा सके।
    फेकिंग न्यूज-पहली तस्वीर-सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले दिल्ली के उपराज्यपाल।
    दूसरी तस्वीर-सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल।
    सोनल-अरविंद केजरीवाल अपनी पत्नी से- आज डिनर में क्या है?
    पत्नी- बैजल का भर्ता! (सत्याग्रह)

    ...
  •  


Posted Date : 04-Jul-2018
  • विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ट्रोलिंग का मुद्दा आज फिर चर्चा में है. लखनऊ के पासपोर्ट सेवा केंद्र से एक हिंदू-मुसलमान दंपति को पासपोर्ट जारी होने से जुड़े विवाद को लेकर पिछले कुछ दिनों से सुषमा स्वराज लगातार ट्रोल किया जा रहा था. इस बीच विदेश मंत्री ने ऐसे ट्रोल्स को जवाब दिए बिना कुछ ट्वीट लाइक कर दिए थे जिससे यह मुद्दा और ये लोग मीडिया में चर्चा में आ गए थे. वहीं आज एक कथित भाजपा समर्थक ट्रोल ने स्वराज की आलोचना करते हुए ट्वीट किया कि वे उसे ब्लॉक करें. इस पर सुषमा स्वराज ने भी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है, ‘इंतजार क्यों? लीजिए अभी ब्लॉक कर दिया.’ इसके बाद विदेश मंत्री की यह प्रतिक्रिया आज तुरंत ही न्यूज वेबसाइटों पर खबर बन गई और सोशल मीडिया में भी इस पर खूब चर्चा हो रही है.
    इस मामले में आज एक बड़े तबके ने सोशल मीडिया पर सुषमा स्वराज का समर्थन किया है. आदित्य राज कौल का ट्वीट है, ‘सुषमा जी, आपने बहुत ही अच्छा जवाब दिया. ट्रोल्स और गाली गलौज करने वालों के लिए ट्विटर पर कोई जगह नहीं है. इन्हें ब्लॉक कीजिए.’
    सुषमा स्वराज को ट्रोल करने वालों में कई ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्हें भाजपा नेता फॉलो करते हैं. यही वजह है कि सोशल मीडिया में इस हवाले से भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया जा रहा है. साथ ही यहां सवाल भी उठाया जा रहा है कि इस मुद्दे पर भाजपा के नेता आगे बढ़कर सुषमा स्वराज का साथ क्यों नहीं दे रहे. ट्विटर पर एक यूज़र की टिप्पणी, ‘लगता है कि भाजपा वाले सुषमा स्वराज के ट्रोल्स की आलोचना तभी करेंगे जब इन्हें भस्मासुर कहा जाएगा.’

    सोशल मीडिया में सुषमा स्वराज की ट्रोलिंग के मुद्दे पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

    अशोक गरेकर-नारद असली ट्रोल थे, लेकिन उन्हें किसी देवी ने ब्लॉक नहीं किया, बल्कि सभी उनका खुश होकर स्वागत ही करती थीं.

    अनऑफीशियल सुसुस्वामी-ट्रोल आर्मी इसलिए नाराज नहीं है कि सुषमा स्वराज ने एक दक्षिणपंथी ट्रोल को ब्लॉक कर दिया. वो तो इसलिए नाराज है कि क्योंकि हालिया घटनाओं के बाद उन्होंने कुछ ‘सिकुलर्स’ को अनब्लॉक किया है.

    किरण कुमार एस-जो भी सुषमा स्वराज के ट्विटर अकाउंट को संभाल रहा है, उसे शांत रहने की जरूरत है, क्योंकि वो भाजपा के मजबूत ऑनलाइन समर्थन को नुकसान पहुंचा रहा है. (सत्याग्रह)

    ...
  •  


Posted Date : 03-Jul-2018
  • आज दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के चुनाव नतीजे घोषित हुए हैं और इनमें इंडिया टीवी के संस्थापक और एडीटर इन चीफ रजत शर्मा के पैनल को जीत मिली है. इंडिया टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘आप की अदालत’ के जरिए एक अलग पहचान हासिल करने वाले वरिष्ठ टीवी पत्रकार रजत शर्मा अब दिल्ली में क्रिकेट से जुड़ी गतिविधियों का प्रशासन देखने वाली इस संस्था के अध्यक्ष होंगे. सोशल मीडिया में आज इस खबर पर कई लोगों ने चर्चा की है और रजत शर्मा को बधाइयां दी हैं. वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का ट्वीट है, ‘डीडीसीए का अध्यक्ष चुने जाने पर रजत शर्मा को बधाई! उम्मीद की जाए कि न्यूज एंकरों की जिंदगी में खबरों से परे भी कोई दूसरी पारी हो!...’
    रजत शर्मा ने इस चुनाव में 1983 का क्रिकेट विश्वकप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे मदन लाल के पैनल को हराया है. सोशल मीडिया में कई लोगों ने इस खबर पर यह कहते हुए अफसोस जताया है कि डीडीसीए के शीर्ष पद पर पत्रकार के बजाय एक क्रिकेटर को ही होना चाहिए था.
    रजत शर्मा को वित्त मंत्री अरुण जेटली का करीबी माना जाता है. जेटली खुद 1999 से 2013 तक डीडीसीए के अध्यक्ष रह चुके हैं. सोशल मीडिया पर कई लोगों का कहना है कि रजत शर्मा को जेटली ने ही इस संस्था का अध्यक्ष बनवाया है. नितेश का इससे जुड़ा एक मजेदार ट्वीट है, ‘अरुण जेटली डीडीसीए के नए अध्यक्ष चुने गए हैं... माफ कीजिए, मेरा मतलब रजत शर्मा से था.’ एक जमाने में पत्रकार रह चुके कांग्रेस के नेता राजीव शुक्ला भी बीसीसीआई के पदाधिकारी हैं. रजत शर्मा की उनसे तुलना करते हुए एक यूज़र ने तंज किया है, ‘...रजत शर्मा दरअसल राजीव शुक्ला का दक्षिणपंथी जवाब हैं.’

    रजत शर्मा के डीडीसीए का अध्यक्ष चुने जाने की खबर पर सोशल मीडिया में आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :

    यात्रिक‏-अगर रजत शर्मा डीडीसीए के अध्यक्ष बन सकते हैं तो मैं मांग करता हूं कि वीरेंदर सहवाग को पीटीआई न्यूज का अध्यक्ष बनाया जाए.

    मनोज पांडे-डूसू (दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ) से लेकर डीडीसीए चुनावों तक..
    जर्नो-आमिर खान ने अपनी दो फिल्मों ‘अव्वल’ और ‘लगान’ में रजत शर्मा से ज्यादा क्रिकेट खेली थी.

    जेट ली (वसूली भाई)-पत्रकार रजत शर्मा डीडीसीए के अध्यक्ष बन गए हैं. अब दिल्ली के मैदानों पर होने वाले सभी मैचों में थर्ड एंपायर वाले फैसले ‘आप की अदालत’ में लिए जाएंगे.

    गप्पिस्तान रेडियो-पत्रकार बहुत बड़े स्पिनर (बातें घुमाने वाले) होते हैं, तो फिर वे क्रिकेट का संचालन क्यों नहीं कर सकते! (सत्याग्रह)

    ...
  •