राजनीति

शरद पवार मंगलवार से शुरू करेंगे विपक्ष को एकजुट करना
22-Jun-2021 8:03 AM (236)

मुंबई/नई दिल्ली, 21 जून | राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार एक बड़ी पहल के तहत मंगलवार से 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता के लिए कदम उठाएंगे। पार्टी के एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। राकांपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि पहले दौर में पवार मंगलवार शाम नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों के अन्य प्रमुख विशेषज्ञों से मुलाकात करेंगे।

राजनीतिक नेताओं में तृणमूल कांग्रेस के यशवंत सिन्हा, जद-यू के पूर्व नेता पवन वर्मा, आम आदमी पार्टी (आप) के संजय सिंह, नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के फारूक अब्दुल्ला, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के डी. राजा और अन्य शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा, न्यायमूर्ति ए. पी. सिंह (सेवानिवृत्त), जावेद अख्तर, के.टी.एस. तुलसी, करण थापर, आशुतोष, ए. मजीद मेमन, वंदना चव्हाण, एस.वाई. कुरैशी, के.सी. सिंह, संजय झा, सुधींद्र कुलकर्णी, कॉलिन गोंसाल्वेस, घनश्याम तिवारी और प्रीतिश नंदी सहित अन्य भी शामिल हो सकते हैं।

इससे पहले शरद पवार ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से दस दिनों में दूसरी बार मुलाकात की। चर्चा यह है कि किशोर-पवार की मुलाकात अगले आम चुनावों के मद्देनजर और समान विचारधारा वाली पार्टियों को एकजुट करने के उद्देश्य से बड़ी योजना का हिस्सा हो सकती है।

हालांकि विपक्षी दलों की बैठक का एजेंडा स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह जम्मू-कश्मीर पर प्रधानमंत्री की बैठक की पृष्ठभूमि में है। 15 विपक्षी दलों को निमंत्रण दिया गया है, लेकिन उनमें से कुछ ने अब तक भागीदारी की पुष्टि की है। कांग्रेस ने अभी तक बैठक के लिए हां नहीं कहा है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस बैठक में शामिल होगी या नहीं। सोमवार दोपहर तक कांग्रेस की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन 7 दलों ने बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है।

विपक्षी दलों की बैठक से पहले राकांपा ने मंगलवार सुबह अपने राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी।(आईएएनएस)

एक महीने में दूसरी बार लखनऊ पहुंचे बीजेपी के केंद्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष, चढ़ा सियासी पारा
21-Jun-2021 12:32 PM (195)

 

-अनामिका सिंह

लखनऊ. यूपी विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियों से पहले सरकार से संगठन तक कील कांटे दुरूस्त करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी में इन दिनों तेजी से घटनाक्रम आगे बढ़ रहे हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर चिंताओं में घिरी पार्टी में मई के महीने से शुरू हुआ मंथनों का दौर लगातार जारी है और अब केंद्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष का लखनऊ आने का कार्यक्रम भी इस सियासी गुणा गणित के तौर पर तय हुआ है. बीएल संतोष सोमवार से तीन दिन लखनऊ में मौजूद रहेंगे. इस दौरान वह सरकार के मंत्रियों से लेकर संगठन के पदाधिकारियों के साथ 2022 के चुनाव की रणनीति तय करेंगे. हांलाकि बीएल संतोष का एक ही महीने में दूसरी बार राजधानी लखनऊ का रूख करना अलग-अलग तरह की चर्चाओं को हवा दे रहा है.

इसके पहले बीएल संतोष 31 मई से 2 जून तक मैराथन बैठकें कर पार्टी आलकमान को यूपी की रिपोर्ट सौंप चुके हैं. जबकि इस बीत तेजी के साथ पार्टी के भीतर घटनाक्रम आगे भी बढ़ा रहा है, क्योंकि बीएल संतोष की लखनऊ में हुई बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद दो दिनों का दिल्ली दौरा कर प्रधानमंत्री मोदी समेत गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात कर चुके हैं. इसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ा, लेकिन राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय से इस बाबत कोई जानकारी नहीं मिल पायी है. इस बीच केंद्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष के लखनऊ दौरे को कई मायनों में अहम माना जा रहा है.

हांलाकि पार्टी की तरफ से बीएल संतोष के लखनऊ दौरे को लेकर दी गयी जानकारी के मुताबिक, संगठन मंत्री बीएल संतोष पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठकें करके पार्टी की तरफ से प्रारंम्भ किये पोस्ट कोविड सेंटर, टीककरण जनजागरण अभियान और अन्य सेवा कार्यों की समीक्षा कर मार्गदर्शन करेंगे. जबकि सूत्र ये बता रहे है कि बीएल संतोष के पिछले दौरे के बाद जिस तरीके से प्रदेश संगठन के प्रकोष्ठ और मोर्चों के पदाधिकारियों की नियुक्ति हुई, ठीक वैसे ही इस दौरे के बाद भी 2022 के चुनाव को लेकर बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है.

पिछली बार केंद्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष के दौरे का क्या हुआ असर
बीएल संतोष के पिछले दौरे के दौरान कई पदाधिकारियों ने निगम और आयोगों में खाली पदों को भरने का मुद्दा साथ ही अधिकारियों के साथ सामंजस्य ना होने का मुद्दा उठाया था. जिसके बाद बड़े पैमाने पर अफसरों के तबादले के साथ-साथ पिछले दिनों बुधवार को अनुसूचित जाति और अनुसुचित जनजाति आयोग के गठन के बाद कल उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग का गठन किया गया. पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष इसी आयोग के उपाध्यक्ष रहे जसंवत सैनी को बनाया गया है जो पार्टी में लंबे समय से अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं. अब बीएल संतोष के दूसरी बार लखनऊ आने की खबर से बड़े बदलाव की सुगबुगाहट से इनकार नहीं किया जा सकता. (news18.com)

दूसरों के लिए सबक हो सकती है चिराग पासवान की नकारात्मक राजनीति
20-Jun-2021 12:37 PM (137)

-अजय कुमार 

पटना, 20 जून| बिहार में चिराग पासवान ने जून के तीसरे सप्ताह में ही अपनी ही पार्टी के भीतर अपनी राजनीतिक स्थिति खो दी थी। उनके चाचा पशुपति कुमार पारस ने स्वर्गीय रामविलास पासवान द्वारा स्थापित पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर तख्तापलट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

घटनाओं की समग्र श्रृंखला अन्य राजनीतिक दलों और व्यक्तिगत नेताओं के लिए एक सबक हो सकती है, जो नकारात्मक राजनीति के जरिये अपना नफा-नुकसान देखने की कोशिश करते हैं।

चिराग पासवान की राजनीति में नकारात्मकता पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान सामने आई जब उन्होंने अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। इससे उनकी कोशिश जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को अधिकतम नुकसान पहुंचाने की कोशिश थी । उस वक्त उन्होंने खुले तौर पर भाजपा का समर्थन करने के साथ ही खुद को पीएम नरेंद्र मोदी का हनुमान बताया था।

चिराग पासवान को जदयू को नुकसान पहुंचाने के अपने एक सूत्रीय एजेंडे के कारण एनडीए छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि बीजेपी और जदयू दोनों एनडीए का हिस्सा हैं। चिराग की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से ज्यादातर जदयू के खिलाफ थे।

लोजपा ने अपने गेमप्लान के मुताबिक साल 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू को सिर्फ 43 सीटें मिलीं, जबकि 2015 के चुनावों में इसके सीटों की संख्या 69 थीं। इस तरह के ²ष्टिकोण ने चिराग पासवान को और अधिक आहत किया क्योंकि साल 2020 के चुनावों में उनकी पार्टी ने सिर्फ एक ही सीट पर जीत हासिल की थी। सिर्फ एक सीट जीतने का प्रबंधन किया। बाद में मटिहानी निर्वाचन क्षेत्र से जीते लोजपा के इकलौते विधायक राज कुमार सिंह ने जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार से हाथ मिला लिया था।

पशुपति कुमार पारस ने विधानसभा चुनाव के दौरान चिराग पासवान की नकारात्मक राजनीति की ओर इशारा करते हुए कहा, "2020 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हम संसदीय चुनाव की तरह एनडीए के तहत चुनाव लड़ना चाहते थे। चिराग ने इसका विरोध किया और विधानसभा चुनाव में अकेले जाने का फैसला किया और सिर्फ एक ही सीट जीत सके। पार्टी का राजनीतिक रूप से सफाया हो गया है। पार्टी कार्यकर्ता और नेता उनके फैसले से नाराज हैं।"

लोजपा में राजनीतिक अशांति के बीच चिराग पासवान ने खुले तौर पर आरोप लगाया कि जदयू नेता उनके खिलाफ काम कर रहे हैं और पार्टी को तोड़ रहे हैं। राजद ने भी जदयू पर इसी तरह के आरोप लगाए थे। राजद के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा, "चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस के बीच विभाजन के पीछे नीतीश कुमार हैं।"

इसका जवाब देते हुए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर.सी.पी. सिंह ने कहा कि चिराग पासवान वही काट रहे हैं जो उन्होंने बोया है।

सिंह ने कहा, "चिराग पासवान ने हाल के दिनों में बहुत सारी गलतियां की हैं। बिहार के लोग और उनकी अपनी पार्टी के कार्यकर्ता और नेता बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान जो कुछ भी उन्होंने किया उससे खुश नहीं थे। अब पार्टी में दरार इसका परिणाम है।"  (आईएएनएस)

 

पंजाब विधानसभा चुनाव: भाजपा ने अभी से कसी कमर, राज्य नेताओं संग जेपी नड्डा बनाएंगे रणनीति
15-Jun-2021 5:19 PM (347)

 

चंडीगढ़. पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और भारतीय जनता पार्टी ने अभी से इसके लिए अपनी तैयारियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है. इसी सिलसिले में भाजपा ने मंगलवार को चुनावी राज्य में संभावित गठबंधन और पार्टी द्वारा लक्ष्य निर्धारित करने को लेकर विचार-विमर्श किया. प्रदेश के आगामी चुनाव में भाजपा बिना शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के मैदान में अपनी किस्मत आजमाएगी. हाल ही में कृषि कानूनों को लेकर मतभेद के चलते शिअद ने भाजपा के साथ अपना 23 साल पुराना साथ छोड़ दिया था.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी शर्मा राज्य के चुनाव प्रभारी दुष्यंत गौतम के साथ मंगलवार शाम को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से मुलाकात करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक के दौरान पंजाब में नए राजनीतिक गठबंधनों और समीकरणों को लेकर चर्चा हो सकती है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) संग शिअद के गठबंधन के बाद, भाजपा 117 विधानसभा सीटों वाले राज्य में बदली जातीय और राजनीतिक समीकरणों पर ध्यान दे रही है. (news18.com)

जेडीयू के मिशन पंजा से कांग्रेस में हड़कंप! नीतीश के करीबी का दावा- 10 विधायक संपर्क में
15-Jun-2021 5:17 PM (438)

-रवि एस नारायण

पटना. लोजपा में टूट के बाद अब कांग्रेस के संभावित बिखराव की खबर से बिहार की सियासत गरमाई हुई है. जेडीयू के नेता और मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस डूबती हुई नाव है और कांग्रेस के कई नेता जेडीयू के संपर्क में हैं. समय आने पर सबकुछ जल्द सामने आ जायेगा. बता दें कि लोजपा में हुई बड़ी टूट में भी जेडीयू की बड़ी भूमिका मानी जा रही है. अब जेडीयू ने कांग्रेस नेताओं के समपर्क में होने की बात कहकर हड़कंप मचा दिया है. माना जा रहा है कि जेडयू ने अब मिशन पंजा शुरू कर दिया है जिसके तहत जेडीयू के कुछ कद्दावर नेताओं को कांग्रेस के विधायकों को साथ लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

सूत्रों से यही खबर सामने आ रही है कि जेडीयू ने मिशन पंजा के तहत अपना काम शुरू कर दिया है. सूत्रों की जानकारी के मुताबिक आधा दर्जन कांग्रेस नेताओं की बारी-बारी से बैठक जेडीयू नेताओं के साथ हो चुकीं है. जेडीयू के कई नेता कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं से मुलाकात हो रही है. माना जा रहा है कि कांग्रेस के 10 विधायक जेडीयू के समपर्क में हैं. बता दें कि कांग्रेस की विधानसभा में 19 सीटें हैं. कांग्रेस से टूटकर जेडीयू में मिलने के लिए कम से कम 13 विधायकों का साथ होना जरूरी है. इंतजार 13 विधायकों के साथ का है.

कांग्रेस में बैठकों का दौर शुरू
गौरतलब है कि कांग्रेस में टूट की खबर समय समय पर आती रही है, लेकिन यह अंजाम तक नहीं पहुंच पायी है. पर  लोजपा में टूट के बाद जेडीयू नेता के दावे को कांग्रेस आलाकमान हल्के में नहीं लेना चाहते. सूत्रों की जानकारी के मुताबिक कांग्रेस आलाकमान ने कांग्रेस वरिष्ठ नेता अशोक राम को जिम्मेदारी सौंपी है कि वो कांग्रेस विधायकों से हर दिन संपर्क में रहें और गतिवीधियो पर नजर रखें. इधर कांग्रेस के भीतर अनऑफिशियल बैठकों का दौर भी शुरू है. सभी को एकजुट रहने की बात कही जा रही है.

कांग्रेस किसी भी संभावित टूट से कर रही इंकार
जेडीयू के कांग्रेस विधायकों के सम्पर्क में होने की बात को कांग्रेस सिरे से नकार रही है. कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित शर्मा का कहना है कि जीतनराम मांझी और मुकेश साहनी ने जिस तरीके से तेवर दिखाये हैं उसे देखते हुए जेडीयू का यह स्टंट मैनेजमेंट है जिसके तहत इज अफवाह फैलाई जा रही है. कांग्रेस का कोई विधायक टूटने वाला नहीं.(news18.com)

बंगाल को बांटने की कोशिश कर रही भाजपा : ममता बनर्जी
15-Jun-2021 9:27 AM (308)

कोलकाता, 14 जून| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने हार को स्वीकार नहीं किया है और अब वह राज्य को बांटने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री की आलोचना ऐसे समय में सामने आी है, जब भाजपा के कई सांसदों और विधायकों ने केंद्र सरकार से उत्तर बंगाल को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने का अनुरोध करने का फैसला किया है।

ममता ने कहा, हमने कभी भी उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल के बीच अंतर नहीं किया है। पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल है और राज्य के इन दो हिस्सों में कोई अंतर नहीं है। हमने बंगाल के दोनों हिस्सों को समान महत्व देने की कोशिश की है और उन्हें समान रूप से विकसित किया है।

बनर्जी ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, मैं यह भी कहना चाहूंगी कि कुछ मामलों में उत्तर बंगाल में दक्षिण बंगाल की तुलना में अधिक विकास हुआ है। हम केंद्र को किसी भी तरह से राज्य को विभाजित करने की अनुमति नहीं देंगे।

मुख्यमंत्री का आरोप भाजपा विधायकों और सांसदों की रविवार शाम को हुई एक बैठक के बाद सामने आया है, जिसमें केंद्र से पांच जिलों - कूच बिहार, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और कलिम्पोंग को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की अपील करने का फैसला किया था।

बैठक में मौजूद एक भाजपा सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, इस क्षेत्र में चीन और बांग्लादेश से बहुत घुसपैठ हुई है और कोई भी सुरक्षित नहीं है। यहां तक कि जनप्रतिनिधियों को भी इस स्थिति के कारण सुरक्षा कवच लेना पड़ता है। ऐसे में हम केंद्र से अपील करेंगे कि उत्तर बंगाल के इन जिलों को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए।

इस कथित साजिश के पीछे भाजपा के केंद्रीय नेताओं का हाथ होने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, भाजपा हार स्वीकार नहीं कर सकती और इसलिए वह कूचबिहार, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और कलिम्पोंग को बेचने की कोशिश कर रही है। हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे। भाजपा को बांटो और राज करो की इस नीति को बंद कर अपने काम पर ध्यान देना चाहिए।

कश्मीर में भाजपा की नीति का जिक्र करते हुए बनर्जी ने कहा, उन्होंने कश्मीर में जो किया वह यहां करने की कोशिश कर रहे हैं। कश्मीर में क्या हो रहा है? क्या यह लोकतंत्र है? आप किसी को बोलने की अनुमति नहीं देते हैं। आप नेताओं को नजरबंद रखते हैं और लोगों की आवाज दबाते हैं। क्या वे यहां भी ऐसा ही करने की कोशिश कर रहे हैं? हम इसकी अनुमति कभी नहीं देंगे।

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, भाजपा लंबे समय से ऐसा करने की कोशिश कर रही है और चुनाव प्रचार के दौरान भी उसने कहा था कि अगर वह सत्ता में आई तो वह उत्तर बंगाल और दक्षिण बंगाल को बांट देगी।

टीएमसी नेता ने कहा, अब जब उन्हें लोगों ने खारिज कर दिया है, तो वे अपनी योजना को गोल चक्कर में पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। यह एक खतरनाक संकेत है और हम सभी को इस अन्याय के खिलाफ खड़ा होना चाहिए और विरोध करना चाहिए।

उन्होंने कहा, हम उत्तर बंगाल की स्थिति से डरे हुए हैं। चीन कुछ अन्य पड़ोसी देशों के साथ देश की संप्रभुता को नष्ट करने की कोशिश कर रहा है और इस क्षेत्र में कोई भी सुरक्षित नहीं है।

वहीं इस मुद्दे पर उत्तर बंगाल से भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, हमारे पास 2.28 करोड़ लोगों का समर्थन है और हम एक आंदोलन शुरू करेंगे ताकि उत्तर बंगाल केंद्र शासित प्रदेश बन सके। केवल केंद्र सरकार ही लोगों को बचा सकती है और हम केंद्र से इस पर गंभीरता से विचार करने का अनुरोध करेंगे। (आईएएनएस)

अन्नाद्रमुक ने शशिकला से बात करने पर 17 नेताओं को किया निष्कासित
14-Jun-2021 9:53 PM (325)

चेन्नई, 14 जून | अन्नाद्रमुक की पार्टी मुख्यालय में हुई बैठक में पूर्व अंतरिम महासचिव वी.के. शशिकला से संपर्क करने पर पार्टी प्रवक्ता वी. पुगाझेंडी समेत 17 नेताओं को निष्कासित कर दिया गया। पूर्व मंत्री एम.आनंदन और पूर्व सांसद चिन्नास्वामी उन अन्य वरिष्ठ नेताओं में शामिल है, जिन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। बैठक में शशिकला के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें पार्टी के कुछ नेताओं से संपर्क करने के कारण उन्हें फटकार लगाई गई। प्रस्ताव में शशिकला पर पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश करने और कुछ नेताओं से बात करके नाटक रचने और फिर बातचीत के कुछ हिस्सों को लीक करने का भी आरोप लगाया गया।

आय से अधिक संपत्ति से जुड़े एक मामले में चार साल की कैद की सजा काटने के बाद बेंगलुरु सेंट्रल जेल से रिहा होने के बाद शशिकला ने तमिलनाडु की राजनीति में धमाकेदार एंट्री करने की कोशिश की थी।

वह 7 फरवरी, 2021 को बेंगलुरु से 1000 वाहनों के काफिले में तमिलनाडु पहुंची थीं और 350 किलोमीटर के सफर, जिसमें 6 से 7 घंटे लगे, पूरे दिन उनका भव्य स्वागत किया गया था।

राज्य की राजनीति में कुछ दिनों के दबदबे के बाद, शशिकला ने अचानक घोषणा की कि वह सक्रिय राजनीति से हट रही हैं, राजनीतिक पर्यवेक्षकों और पार्टी के प्रति सहानुभूति रखने वालों के लिए यह आश्चर्य की बात थी।

हालांकि विधानसभा चुनाव के नतीजे आने और अन्नाद्रमुक के चुनाव हारने के बाद शशिकला ने पार्टी में अपना दखल फिर से शुरू कर दिया और राज्यभर में अन्नाद्रमुक के कई वरिष्ठ, मध्यम और निचले स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ अपनी चुनिंदा टेलीफोन बातचीत को उन्होंने लीक कर दिया। उन्होंने चैट के माध्यम से सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि वह सक्रिय राजनीति में लौट रही हैं और समर्थक उनके प्रति बहुत आदर-भाव रखते हैं।

अन्नाद्रमुक नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम ने उनके बयानों की खुले तौर पर निंदा की है और पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने शशिकला से संपर्क किया तो उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया जाएगा।(आईएएनएस)

जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होना पार्टी के लिए बड़ी क्षति : अदिति सिंह
10-Jun-2021 8:45 AM (369)

लखनऊ, 9 जून| कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता जितिन प्रसाद के बुधवार को भाजपा में शामिल होने के कदम को कांग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह ने पार्टी की बड़ी क्षति बताया है। इसको लेकर कांग्रेस की बागी विधायक ने पार्टी को नसीहत दी है। उन्होंने कहा पार्टी को आत्ममंथन करने की जरूरत है। रायबरेली सदर से विधायक अदिति सिंह को कांग्रेस ने निलंबित कर रखा है। कांग्रेस से विधायक रहे दिवंगत बाहुबली अखिलेश सिंह की बेटी अदिति सिंह ने कहा कि वरिष्ठ नेता जितिन प्रसाद का पार्टी को छोड़कर जाना एक बड़ी क्षति है। अब तो पार्टी को आत्ममंथन करना चाहिए। पार्टी में सुनवाई न होने के कारण युवा नेताओं में निराशा है। जितिन प्रसाद का कांग्रेस से जाना बहुत बड़ा नुकसान है। उनका खमियाजा उन्हें 2022 के चुनाव में भुगतना पड़ेगा।

विधायक अदिति सिंह ने कहा कि हमारी समस्या शीर्ष नेतृत्व नहीं सुनता है। इसका उदाहरण समय-समय पर देखने को मिलता है। जनप्रतिनिधि की बात हाईकामान नहीं सुनता है। जबकि आपको उनकी बात सुननी पड़ेगी। अगर आप नहीं सुनते हैं तो भला आपकी पार्टी में लोग कैसे रहेंगे। इसीलिए धीरे-धीरे करके युवा कांग्रेस छोड़ रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया और कुंवर जितिन प्रसाद जैसे वरिष्ठ नेता क्यों जा रहे हैं। यह तो तय हो गया है कि कांग्रेस एक परिवार की पार्टी बनती जा रही है। भाजपा में जितिन प्रसाद जी का भविष्य काफी उज्‍जवल होगा।

अदिति सिंह ने कहा, "जितिन प्रसाद का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए समस्या है। अब तो बड़े नेताओं को उत्तर प्रदेश में जमीन पर काम करने की जरूरत है। मंथन करें कि आखिर बड़े नेता पार्टी क्यों छोड़ रहे हैं।" उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश की सियासत में जमीन पर कांग्रेस को काम करने की जरूरत है। मैं सच और साफ बोलती हूं। मेरी बात अगर किसी को बुरा लगती है तो हम इसका कुछ नहीं कर सकते। मैं प्रियंका गांधी पर कोई टिप्पणी नहीं करती, लेकिन उन्हें खुद देखने की जरूरत है।" (आईएएनएस)

एमपी में भाजपा की कार्यसमिति की सूची से जाति को ब्योरे को हटाया गया
10-Jun-2021 8:45 AM (166)

भोपाल, 9 जून| मध्य प्रदेश में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में सदस्यों के नाम के आगे जाति का उल्लेख किए जाने के बाद मचे बवाल के चलते जाति के ब्यौरे को हटाना पड़ा है और नई कार्यसमिति की सूची जारी की गई है। कांग्रेस पदाधिकारियों के नाम के साथ जाति बताने पर तंज भी कसा। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने स्थायी आमंत्रित सदस्यों और कार्यसमिति सदस्यों की सूची जारी की। इस सूची में 23 स्थायी आमंत्रित सदस्य है, 162 कार्यसमिति सदस्य है और इसके अलावा 217 विशेष आमंत्रित सदस्य है। पार्टी की ओर से जारी की गई सूची में सभी की जाति का उल्लेख किया गया था। इस बात के सामने आने पर सियासी गलियारे में हलचल मचे तो पार्टी ने इसमें बदलाव किया, दूसरी सूची जारी की गई जिसमें जाति का उल्लेख नहीं है।

भाजपा की इस कार्यसमिति की सूची में स्थायी आमंत्रित सदस्य, कार्यसमिति सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्यों के नाम के आगे जाति का उल्लेख करने वाली सूची मंगलवार की देर रात को सोशल मीडिया पर आई, उसके कुछ देर बाद ही पार्टी को उसमें बदलाव करना पड़ा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने भाजपा की कार्यसमिति की सूची से जाति हटाए जाने पर तंज कसा और ट्वीट किया है कि अच्छा हुआ भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की सूची के आगे से जाति का कालम हटा दिया, नहीं तो वो 'भारतीय जाति पार्टी' बन गई थी।

अब से पहले किसी भी राजनीतिक दल ने पदाधिकारियों के नाम के आगे जाति का उल्लेख नहीं किया गया, ऐसा घटनाक्रम पहली बार सामने आया है, सवाल उठ रहा है कि क्या यह किसी की साजिश का हिस्सा था या किसी ने चूक कर दी है। (आईएएनएस)

पंजाब में कांग्रेस सरकार की सबसे बड़ी दुश्मन क्या खुद कांग्रेस है?
07-Jun-2021 9:43 PM (239)

-अमन शर्मा

चंडीगढ़. पंजाब में आठ महीनों के भीतर चुनाव होने वाले हैं, वहां सत्तारूढ़ कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा राजनीतिक विरोध कांग्रेस हाई कमांड से ही है और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने सबसे बड़ा मुद्दा 2017 में किए चुनावी वादे को निभाना है. उन्होंने चुनाव में वादा किया था कि सत्ता में आते ही वो ताकतवर बादल परिवार को 2015 में हुए गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान वाले मामले में सजा दिलवाएंगे. ये वो वादा था जिसने उन्हें सत्ता के सोपान पर चढ़ने में मदद की थी.

79 की उम्र में अमरिंदर सिंह का तीसरी बार मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है. यही नहीं पंजाब का चुनाव, पार्टी के लिए 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले खेले जाने वाला प्रैक्टिस मैच होगा, जिसे जीतने पर ठंडी पड़ी पार्टी में एक नए उत्साह का संचार हो सकता है. किसान आंदोलन के समर्थन से भी पार्टी को अच्छा खासा लाभ मिला है और कैप्टन को किसान समुदाय का प्रिय बना दिया है. किसान पंजाब के चुनाव में कितनी अहमियत रखते हैं ये बात किसी से छिपी नहीं है.

2017 चुनाव में शिअद को काफी नुकसान हुआ था
वहीं इनके मुख्य विरोधी, शिरोमणी अकाली दल (शिअद) को नए किसान बिल की वजह से काफी नुकसान झेलना पड़ा है. जब ये बिल पारित हुआ उस वक्त शिअद, एनडीए सरकार के गठबंधन का हिस्सा थी. उसके बाद शिअद का एनडीए से अलग होना अपनी छवि सुधार का एक तरीका था. ऐसा अनुमान है कि गुरुग्रंथ साहिब पवित्र ग्रंथ मामले ने भी 2017 के चुनाव में शिअद को खासा नुकसान पहुंचाया था. आम आदमी पार्टी जो पिछले चुनाव में नंबर दो पार्टी बनकर उभरी है, उसकी छवि भी धूमिल पड़ती जा रही है क्योंकि उनके पास राज्य में कोई भरोसेमंद नेतृत्व नहीं है, वहीं भाजपा के पास भी ना के बराबर उम्मीद है.

अमरिंदर सिंह के खिलाफ सिद्धू ने झंडा बुलंद कर रखा है
लेकिन कांग्रेस हाई कमांड यहां अपने घर की लड़ाई को सार्वजनिक मंच पर लाकर सारा मामला पेचीदा बना सकती है. सिंह को पिछले हफ्ते एक कमेटी के सामने पेश होना था. हाई कमांड ने इस समिति का निर्माण सिंह और नवजोत सिंह सिद्धु के बीच पड़ी खटास के बारे मे जानने के लिए किया था. सिद्धू ने पंजाब में अमरिंदर सिंह के खिलाफ झंडा बुलंद कर रखा है. उन्हें कांग्रेस से राज्य सभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दुल्लो का खुला समर्थन प्राप्त है, ये दोनों ही काफी लंबे वक्त से सिंह को निशाना बनाए हुए हैं.

सिद्धू को मिलता आया है राहुल-प्रियंका का समर्थन
सिद्धू उस कहावत की तर्ज पर काम करते आए कि ‘जब सैंया भए कोतवाल तो फिर डर काहे का’, वैसे भी उन्हें गांधी भाई-बहन का भी समर्थन मिलता आया है और वह चुनाव से पहले राज्य का पार्टी अध्यक्ष की भूमिका में खुद को देखते आए हैं. लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने खिलाफ इस साज़िश को सही वक्त पर भांप लिया और 2017 चुनाव से पहले पार्टी के प्रमुख बनने के बाद खुद को सीएम घोषित करने पर काम किया और सिद्धू के अरमान पर पानी फेर दिया. वहीं गांधी यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि सिद्धू को कैंपेन समिति में बड़ा रोल मिले, बावजूद इसके कि सिंह बार-बार कहते आए हैं कि असल तवज्जो वरिष्ठता को दी जाए,, न कि ऐसी प्रतिभा पर जिसे अभी तक आंका न गया हो.

सबसे बड़ा मुद्दा
वरिष्ठ राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सिद्धू-कैप्टन के बीच कलह दरअसल छोटी बात है. आने वाले चुनाव में असल मुद्दा तो 2015 में हुए गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान वाले मामले में उचित कार्रवाई का है. सिद्धू और बाजवा के खेमे के लोग इस बात पर भी सिंह को घेर रहे हैं कि पिछले साढ़े चार साल में बादल के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया है. सीएम को भी शायद यह एहसास हो गया है कि राजनीतिक वादे करना एक बात है और मामले को कानूनी तौर पर किसी नतीजे पर पहुंचाना अलग बात है. हालांकि उन्होंने कांग्रेस समिति को भरोसा दिया है कि चुनाव से पहले वह इस मामले में उचित कार्रवाई करेंगे.

सीएम कैंप के लोगों का मानना है कि लोग सरकार से नाराज़ नहीं हैं. सीएम के एक करीबी नेता कहते हैं – नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत साफ करती है कि ताकतवर विपक्ष की गैर मौजूदगी में कांग्रेस को जनता का समर्थन मिल रहा है. कांग्रेस समिति से मुलाकात से पहले सिंह ने आप के तीन विधायकों को कांग्रेस में शामिल करके यह संदेश दे दिया कि राज्य चुनाव उनके नेतृत्व में जीतना आसान होगा. उन्होंने यह तक कह दिया कि सिद्धू, बाजवा जैसे नेताओं की लगाम खींचकर रखी जाए क्योंकि वही कांग्रेस के असल दुश्मन हैं. तो क्या कांग्रेस हाई कमांड सिंह की बात को कान देंगे? (news18.com)

नड्डा के नेतृत्व में भाजपा महासचिवों ने की पीएम मोदी से भेंट, चुनावी तैयारियों पर हुई चर्चा
07-Jun-2021 8:43 AM (154)

नई दिल्ली, 6 जून | भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवों की टीम ने रविवार को प्रधानमंत्री आवास पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में पहुंची टीम के साथ प्रधानमंत्री मोदी की मीटिंग भी चली। माना जा रहा है कि इस मीटिंग में अगले साल 7 राज्यों में होने जा रहे चुनावों तैयारियों और कोरोना काल में पार्टी के सेवा कार्यों की समीक्षा हुई। वर्ष 2017 में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, पंजाब, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें से पंजाब छोड़कर सभी राज्यों में भाजपा की सरकार है। लिहाजा, इन भाजपा को सत्ता पर कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है। चुनाव नजदीक आने पर भाजपा संगठन तैयारियों में जुट गया है। अब संगठनात्मक बैठकों का सिलसिला तेज हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिन के भीतर भाजपा नेताओं के साथ यह दूसरी बैठक है।

इससे पूर्व शनिवार को भाजपा के सभी मोर्चा अध्यक्षों के साथ भी प्रधानमंत्री मोदी ने मीटिंग की थी। भाजपा के एक नेता ने आईएएनएस को बताया कि पार्टी ने कोरोना काल में जरूरतमंदों की सेवा के लिए अभियान चलाया है। इस अभियान की पार्टी समीक्षा कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी को भी पूरे अभियान की सफलता की जानकारी दी जा रही है।

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि सेवा ही संगठन नामक अभियान का मकसद जनसंपर्क का है। इससे मतदाताओं की नाराजगी की भी दूर करने की कोशिश हो रही है।(आईएएनएस)

कोर कमेटी की बैठक में केरल भाजपा अध्यक्ष की आलोचना
07-Jun-2021 8:22 AM (219)

तिरुवनंतपुरम, 7 जून| भाजपा के केरल अध्यक्ष के. सुरेंद्रन को रविवार को कोर कमेटी की बैठक में आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

कोर कमेटी में सभी चार राज्य महासचिवों के साथ-साथ सभी पूर्व राज्य प्रमुखों के सदस्य हैं। राज्य में पार्टी केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन के नेतृत्व वाले गुट और पूर्व प्रमुख पी.के. कृष्णदास गुट में विभाजित है। यही वजह है कि बैठक तूफानी रही।

भाजपा सूत्रों ने बताया कि बैठक में कृष्णदास, प्रदेश महासचिव ए.एन. राधाकृष्णन और एम.टी. रमेश ने मुरलीधरन और सुरेंद्रन के खिलाफ जमकर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य नेतृत्व सभी के साथ आम सहमति बनाने में विफल रहा है और यह चुनावों में पार्टी की हार का मुख्य कारण था।

एक और आरोप यह था कि उम्मीदवार चयन प्रक्रिया अपारदर्शी थी और राज्य नेतृत्व उचित उम्मीदवारों को मैदान में उतारने में विफल रहा, जिससे सफाया हो गया। भाजपा ने 2021 के विधानसभा चुनाव में एक भी सीट हासिल नहीं कर पाई, यहां तक कि नेमोम सीट भी हार गई थी जो उसने 2016 में जीती थी।

प्रतिद्वंद्वी गुट ने बसपा उम्मीदवार के. सुंदरा द्वारा लगाए गए आरोपों को उठाया, जिन्होंने मंजेश्वर विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन वापस ले लिया था, जहां से सुरेंद्रन ने मीडिया को बताया था कि उन्हें वापस खींचने के लिए 2.5 लाख रुपये और एक स्मार्टफोन दिया गया था। उन्होंने कहा कि सुरेंद्रन के जीतने पर उन्हें कर्नाटक में 15 लाख रुपये, एक घर और एक वाइन पार्लर की भी पेशकश की गई थी।

सुरेंद्रन और मुरलीधरन ने हालांकि तर्क दिया कि पार्टी के उम्मीदवारों को पार्टी के सर्वोत्तम हित में अंतिम रूप दिया गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि सुरेंद्रन किसी भी तरह से धन की चोरी में शामिल नहीं थे।

राज्य भाजपा उस समय से दबाव में है जब आरएसएस कार्यकर्ता धर्मराजन ने कोडकारा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि लोगों के एक समूह ने मतदान से कुछ दिन पहले तीन अप्रैल को उनकी कार को रोककर उन पर हमला किया था और उनसे 25 लाख रुपये लूट लिए थे।

पुलिस ने कई जाने-माने अपराधियों को गिरफ्तार किया और जांच के दौरान भाजपा की युवा शाखा के पूर्व कोषाध्यक्ष सुनील डी. नाइक का भी नाम सामने आया. नाइक सुरेंद्रन का करीबी सहयोगी था और गिरफ्तार लोगों से पूछताछ में एक करोड़ रुपये से अधिक का खुलासा होने के बाद मामला चर्चा का प्रमुख विषय बन गया।

पुलिस ने भाजपा के प्रदेश महासचिव, संगठन और आरएसएस के वरिष्ठ नेता एम. गणेशन और पार्टी के राज्य कार्यालय सचिव जी. गिरीशन से पूछताछ की। सूत्रों ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में सुरेंद्रन के बेटे हरिकृष्णन से भी पूछताछ की जाएगी।

कोर कमेटी की बैठक से पहले रविवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष कुम्मनम राजशेखरन ने मीडिया से कहा कि पार्टी सुरेंद्रन को निशाना नहीं बनने देगी। (आईएएनएस)

भाजपा ने नामांकन वापस लेने के लिए 15 लाख रुपये की पेशकश की: के. सुरेंद्रन के हमनाम का दावा
06-Jun-2021 8:52 AM (177)

कसारगोड. राज्य में छह अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में काले धन के इस्तेमाल के आरोपों में घिरी भाजपा की केरल इकाई शनिवार को उस समय फिर विवादों में आ गई जब एक उम्मीदवार ने दावा किया कि उसे भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख के़ सुरेंद्रन के खिलाफ नामांकन वापस लेने के लिए 15 लाख रुपये की पेशकश की गई थी. भाजपा ने आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि यह पार्टी के खिलाफ षड्यंत्र है.

सुरेंद्रन के हमनाम कसारगोड जिले के मंजेश्वरम विधानसभा क्षेत्र से बसपा के उम्मीदवार के. सुंदर ने 22 मार्च को नामांकन पत्र वापस ले लिया था. बहरहाल, सुरेंद्रन चुनाव हार गए थे. 2016 के विधानसभा चुनावों के दौरान दोनों के नामों में समानता के कारण निर्दलीय उम्मीदवार सुंदर को 467 वोट मिले थे. इस चुनाव में सुरेंद्रन आईयूएमएल के उम्मीदवार पी. बी. अब्दुल रज्जाक से 80 वोटों से हार गए थे.

सुंदर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘भाजपा नेताओं ने मुझसे उम्मीदवारी वापस लेने के लिए कहा. मैंने 15 लाख रुपये की मांग की लेकिन उन्होंने केवल ढाई लाख रुपये और 15 हजार रुपये का एक मोबाइल फोन दिया. सीट जीतने पर मैंने उनसे कर्नाटक में शराब की एक दुकान आवंटित करने की मांग की थी. लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उन्होंने मुझे फोन तक नहीं किया.’’

भाजपा ने किया आरोपों से इंकार
उम्मीदवारी वापस लेने के अलावा सुंदर भाजपा में शामिल हो गए. मंजेश्वरम विधानसभा उन सीटों में शामिल थी जहां भाजपा को केरल में जीत की उम्मीद थी. बहरहाल, भाजपा ने आरोपों से इंकार किया.
भाजपा के जिला अध्यक्ष के. श्रीकांत ने कहा, ‘‘नामांकन वापस लेने के लिए हमने किसी भी चीज की पेशकश नहीं की थी. हमने खुलेआम बताया था कि उन्होंने अपनी उम्मीदवारी क्यों वापस ली. अब उन्होंने अपना रूख बदल लिया है. लगता है कि कोई उन पर दबाव बना रहा है. हमें संदेह है कि वह माकपा और आईयूएमएल के दबाव में ये आरोप लगा रहे हैं.’’

इस बीच माकपा उम्मीदवार वी वी रमेशन ने कसारगोड पुलिस प्रमुख से इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है. वह 2021 के चुनावों में तीसरे स्थान पर रहे थे.
आईयूएमएल के ए. के. एम. अशरफ ने 65,758 मतों के साथ जीत दर्ज की थी जबकि सुरेंद्रन को 65,013 वोट मिले थे और रमेशन को 40,639 वोट हासिल हुए. (news18.com)

ममता के खिलाफ बंगाल उप-चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार नहीं उतारना चाहिए: सोनिया से अधीर
06-Jun-2021 8:03 AM (207)

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने शुक्रवार को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कहा कि वह भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र उप-चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवार उतारने के इच्छुक नहीं हैं। चौधरी ने कहा, "टीएमसी के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी...लेकिन इस मुद्दे पर मुझे लगता है कि हमें...कोई उम्मीदवार नहीं उतारना चाहिए।" (inshorts.com)

पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह: सोनिया गांधी की हाई लेवल कमेटी के सामने 25 विधायकों की परेड, कल कैप्टन-सिद्धू भी मिलेंगे
31-May-2021 3:45 PM (175)

नई दिल्ली, 31 मई : देश के कुछ चुनिंदा राज्यों में ही कांग्रेस की सरकार है, ऐसा राज्यों में एक पंजाब है. लेकिन पंजाब कांग्रेस फिलहाल अंदरूनी झगड़े की चपेट में है. झगड़ा नहीं थमा तो मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. विधानसभा चुनाव से पहले कैप्टन सिंह और विधायक नवजोत सिंह सिद्धू के झगड़े को निपटाने के लिए अब कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी सक्रिय हो गयी हैं. 

सोनिया गांधी के पंजाब की कलह पर तीन सदस्यीय हाई लेवल कमेटी बनायी है. सोनिया गांधी द्वारा बनाई गई इस उच्चस्तरीय कमेटी में मल्लिकार्जुन खड़गे, जेपी अग्रवाल और हरीश रावत शामिल हैं. यह कमेटी आज दिल्ली में पंजाब के 25 विधायकों से मिल रही है. कल और परसों भी कमेटी 25-25 विधायकों से मुलाकात करेगी. इसके बाद फिर यह हाई लेवल कमेटी पहले कैप्टन और फिर नवजोत सिंह सिद्धू से भी मिलेगी. 

सोनिया गांधी की बनायी हाई लेवल कमेटी से मिलने पहुंचे पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने एबीपी न्यूज़ से बात की. सुनील जाखड़ ने कहा, ''कमेटी के सामने हमने क्या बातें रखीं, मेरे और कमेटी के बीच है. लेकिन मुख्य मुद्दा यह है कि पार्टी को कैसे मजबूत किया जाए. पिछली बार पंजाब की जनता ने हमें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी. अगर कहीं किसी तरह का मतभेद है तो उसे कैसे दूर किया जाए और आगे की प्लानिंग कैसे हो, इसी सब चीजों को लेकर कमेटी से बात हुई है.''

बता दें कि पिछले एक महीने से कैप्टन अमरिंदर सिंह के ख़िलाफ़ नवजोत सिद्धू के अलावा दो मंत्रियों और कई विधायकों ने मोर्चा खोल रखा है. कोटकपूरा पुलिस फ़ायरिंग केस की जाँच हाईकोर्ट में ख़ारिज होंने के बाद कैप्टन पर कई कांग्रेसी नेता बादल परिवार से मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं. CM कैप्टन अमरिंदर सिंह गुरुवार या शुक्रवार को दिल्ली में हाईकमान की कमेटी से मिलेंगे. (ndtv.in)
 

कर्नाटक के मंत्री का दावा : सरकार 'तीन पार्टियों गठबंधन
28-May-2021 9:23 AM (139)

बेंगलुरु, 28 मई | कर्नाटक के पर्यटन मंत्री सी.पी. योगेश्वर, जो मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के खिलाफ बोलते हैं, उनका अब दावा है कि राज्य में मौजूदा सरकार भाजपा की सरकार नहीं, बल्कि 'तीनों दलों का गठबंधन सेटअप है। यहां राज्य कैबिनेट की बैठक से इतर पत्रकारों को संबोधित करते हुए योगेश्वर ने कहा कि वह सरकार में हर संभव स्तर पर अपमान का सामना करते रहे हैं और यही सब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को बताने के लिए नई दिल्ली गए थे।

उन्होंने कहा, "क्या हमारे यहां एक पार्टी की सरकार है? जब हमने 2019 के मध्य में सरकार बनाने के लिए सभी कष्ट उठाए, तो हम सबने मान लिया कि हम भाजपा की सरकार बना रहे हैं, लेकिन आज हमारे पास यहां तीन दलों का गठबंधन है।"

विस्तार से पूछे जाने पर, योगेश्वर ने कहा कि वह निश्चित रूप से जद-एस और कांग्रेस से आए 17 विधायकों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। लेकिन वर्तमान व्यवस्था में, यह (सरकार) भाजपा और उसके कार्यकर्ताओं व नेताओं की कीमत पर सर्वोच्च शासन करने के लिए राजनीति को एडजस्ट (समायोजित) कर रही है।"

उन्होंने कहा, "मेरे अपने मामले (चन्नापटना विधानसभा सीट) में, भाजपा का मेरे कट्टर प्रतिद्वंद्वियों (जद-एस नेता, एचडी कुमारस्वामी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार) के साथ समायोजन है। अगर यह आगे भी जारी रहता है, तो क्या यह 2023 में चुनावी संभावनाओं को प्रभावित नहीं करेगा? क्या मुझे इसे दिल्ली में अपनी पार्टी के शीर्ष अधिकारियों के सामने नहीं लाना चाहिए?"

प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष और येदियुरप्पा के सबसे छोटे बेटे बी.वाई. विजयेंद्र पर परोक्ष हमला करते हुए योगेश्वर ने कहा कि मंत्री बनने के बाद उन्होंने महसूस किया कि येदियुरप्पा के नाम पर जारी किए जा रहे आदेशों के बोझ को संभालना कितना मुश्किल है। उन्होंने कहा, "कोई कब तक सभी स्तरों पर इस तरह के अपमान को सहन कर सकता है?"

एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि वह अपनी सीमाएं अच्छी तरह जानते हैं। (आईएएनएस)

कांग्रेस ने गोवा के मुख्यमंत्री से पूछा, आइवरमेक्टिन की गोलियां क्यों गायब हो गईं?
25-May-2021 8:48 AM (195)

पणजी, 24 मई| गोवा में कांग्रेस ने सोमवार को राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आइवरमेक्टिन की गोलियां उपलब्ध कराने में भाजपा नीत गठबंधन सरकार की विफलता पर सवाल उठाया, क्योंकि 10 मई को घोषणा की गई थी कि परजीवी को मारने वाली एक दवा है कोविड के मामलों की रोकथाम में कारगर है। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडनकर ने सोमवार को कहा कि बताया गया था कि आइवरमेक्टिन बढ़ते कोविड मामलों से निपटने के लिए नए निवारक उपचार प्रोटोकॉल का हिस्सा है।

एक आधिकारिक बयान में, चोडनकर ने आइवरमेक्टिन टैबलेट की खरीद में घोटाले का भी आरोप लगाया।

चोडनकर ने कहा, "यह चौंकाने वाला है कि पूरे गोवा में लगभग 15 स्वास्थ्य केंद्रों के साथ हमारी पूछताछ में, उनमें से किसी को भी आज तक आइवरमेक्टिन की गोलियां नहीं मिली हैं। हमने विभिन्न गांवों के लोगों से भी पूछताछ की है, जिन्होंने हमें पुष्टि की है कि गोलियां उन तक नहीं पहुंची हैं।"

एक बड़े फैसले में, गोवा सरकार ने 10 मई को अपने कोविड उपचार प्रोटोकॉल में संशोधन किया था, जिसमें सिफारिश की गई थी कि 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों को वायरल लोड को रोकने के लिए आइवरमेक्टिन की पांच गोलियां लेनी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री विश्वजी राणे ने कहा था कि सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों और महिला एवं बाल विकास अधिकारियों के साथ-साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से टैबलेट मुफ्त में वितरित किए जाएंगे।

चोडनकर ने हालांकि आइवरमेक्टिन टैबलेट की खरीद में घोटाले का आरोप लगाया है और अब मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत से यह बताने का आग्रह किया है कि टैबलेट अभी भी मुफ्त वितरण के लिए उपलब्ध क्यों नहीं थे।

चोडनकर ने कहा, "मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत को गोवा के लोगों को बताना चाहिए कि लगभग 22.50 करोड़ रुपये की ये गोलियां कहां गायब हो गई हैं।" (आईएएनएस)

मिशन 2022: UP चुनाव को लेकर BJP-RSS के बीच बैठकों का दौर शुरू, अब लखनऊ में संघ पदाधिकारी से मिले भाजपा नेता
25-May-2021 8:32 AM (180)

 

-कुमारी रंजना

लखनऊ. मिशन 2022 की तैयारियों के लिए 7 महीने ही बचे हैं. ऐसे में 403 विधानसभा क्षेत्र वाले उत्तर प्रदेश में हर क्षेत्र की तैयारियों के लिए घंटों में ही समय बचा है. इसे देखते हुए दिल्ली में पार्टी के रणनीतिकारों में से कुछ दिग्गजों ने बैठक की, जिसमें उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर गहन मंथन चला. आखिर यूपी के लिए क्या रणनीति हो? इस बीच दिल्‍ली के अलावा लखनऊ में भी भाजपा नेताओं ने राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले से मुलाकात की. इन बैठकों के बाद अध्यक्ष बदलने से लेकर डिप्टी सीएम तक को हटाने की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं.

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोविडकाल में लगे दाग को छुड़ाने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं. 30 मई तक उत्तर प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह भी लखनऊ पहुचेंगे. महामंत्री संगठन सुनील बंसल जो अभी दिल्ली में हैं वो भी लखनऊ पहुंच जाएंगे. चुनावी तैयारी के लिए समय की कमी को देखते हुए पार्टी आलाकमान कुछ बड़े फैसले भी ले सकता है. मार्च तक जिन पांच राज्यों में चुनाव हैं वे राज्य हैं गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश.

बहादुर पाठक कहते हैं कि हमें मिशन 2022 जीतना है

उत्तर प्रदेश में चुनाव के लिए अप्रैल तक समय था. लेकिन शेष चार राज्यों में मार्च तक चुनाव करा लेने होंगे. क्योंकि चुनाव एक साथ होंगे. ऐसे मे उत्तर प्रदेश में भी चुनाव  मार्च तक हो जाएंगे. क्या बीजेपी में बेचैनी समयाभाव के चलते है या फिर पंचायत चुनाव परिणाम और कोविडकाल ने जो डेंट मारा है उसके चलते हैं. पार्टी नेतृत्व के लिए ये सभी कारण मायने रखते हैं. उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि हमें मिशन 2022 जीतना है और एक राजनीतिक दल के नाते पार्टी वो रणनीतिक रुप से वो सब कुछ करेगी जो पार्टी हित के लायक होगा. (news18.com)

बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई को लेकर बवाल, कांग्रेस ने CM योगी से पूछा- क्‍या ये है भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति?
24-May-2021 8:05 AM (194)

-राजीव पी. सिंह

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई के दावे किये जाते हैं, जिसके चलते अब सरकार के ही बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी द्वारा अपने भाई का गरीब कोटे से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति कराने के लग रहे आरोपों से हडकंप मच गया है. इस वजह से जहां एक ओर अब इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर योगी सरकार की नीति और नियत पर सवाल उठाये जा रहे हैं, तो वहीं अब समाजवादी पार्टी के साथ ही साथ कांग्रेस भी बेसिक शिक्षा मंत्री पर लगे इन आरोपों को लेकर योगी सरकार पर जमकर निशाना साधते नजर आ रही है.

न्यूज़ 18 से बात करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि यूं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर मंच और सदन में भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई का दावा करते हैं, लेकिन अब तो योगी सरकार के ही बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने खुद आपदा में अवसर तलाशते हुए अपने भाई अरुण द्विवेदी की ईडब्‍ल्‍यूएस यानी की गरीबी कोटे से सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति कराकर एक बड़ा भ्रष्टाचार किया है. ऐसा करके बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने न सिर्फ गरीबों के हक पर डाका डाला है बल्कि उन तमाम अभ्यर्थियों के हक को भी मारा है जिन्होंने इस पद के लिये वर्षों से मेहनत की थी. ऐसे में अब देखना ये होगा कि क्या मुख्यमंत्री अपने बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई अरुण द्विवेदी की गरीबी का प्रमाण पत्र बनाने वाले और उनकी नियुक्ति करने वालों के खिलाफ भी क्या अपनी भ्रष्टाचार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई करेंगे या फिर ऐसा करने की सिर्फ बयानबाजी ही करेंगे?

बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने दी सफाई

हालांकि विपक्ष द्वारा लगातार इस मुद्दे को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधने के चलते बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने भी इस मामले पर अपनी सफाई दी है. उन्‍होंने कहा है कि एक अभ्यर्थी ने आवेदन किया और विश्वविद्यालय ने अपनी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए साक्षात्कार के माध्यम से उसका चयन किया है. इस मामले में मेरा कोई दखल नहीं है, न ही कुछ कहना है. अगर किसी को लगता है कि मैं मंत्री हूं, विधायक हूं, तो मेरा भाई कैसे EWS (आर्थिक रूप से कमजोर) हो गया? तो क्या आपका भाई अगर 3-4 करोड़ का पैकेज पाता है, तो क्या उसका भाई उस आय का अधिकारी माना जाता है? भाई की अलग पहचान है. उसने अपने पहचान के आधार पर आवेदन किया है.प्रशासन ने प्रमाण पत्र दिया है और विश्वविद्यालय ने अपनी निर्धारित प्रक्रिया के तहत चयन किया है. जिसे आपत्ति है, वो इस मामले की जांच करा सकता है.

लालू की बेटी रोहिणी आचार्या का ट्विटर अकाउंट ब्लॉक, सुशील मोदी ने की थी शिकायत
22-May-2021 9:39 AM (213)

-संजय कुमार

पटना. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा ट्विटर पर भाजपा नेता सुशील मोदी पर लगातार हमले किए जा रहे हैं. हमले के बाद उनका अकाउंट ट्विटर ने ब्लॉक कर दिया है. दरअसल, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने रोहिणी आचार्य के खिलाफ ट्विटर से शिकायत की थी. सुशील मोदी ने इस बारे में एक और ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी साझा की. सुशील मोदी ने ट्वीट में लालू प्रसाद की दो बेटियों के डॉक्टर होने और तेजस्वी प्रसाद यादव को सरकारी आवास के बजाय पटना में अर्जित मकानों में से किसी एक को कोविड-19 अस्प्ताल बनाने की नसीहत देने के बाद रोहिणी आचार्य सुशील मोदी पर लगातार हमले किए जा रही थीं.

बीजेपी सांसद के ट्वीट करने के बाद रोहिणी आचार्य ने तल्ख तेवर अख्तियार कर लिया था. सुशील मोदी पर लगातार हमला बोलते हुए रोहिणी आचार्य ने ट्वीट कर लिखा था कि यह तो आपकी किस्मत अच्छी थी कि हम वहां पर नहीं थे. रोहिणी ने ट्वीट में सृजन घोटाले की भी चर्चा की और सुशील मोदी को आड़े हाथों लिया था. सुशील मोदी ने इन मुद्दों को लेकर ट्वीट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. सुशील मोदी ने ट्वीट कर पूछा कि मंत्री बनाने के एवज में जो 2 मंजिला भवन गिफ्ट किया गया था. उसमें या राबड़ी देवी के पास जो फ्लैट बचे हैं उसमें आप अस्पताल क्यों नहीं खोल लेते.

उन्होंने इसे केवल नाटक करार दिया था

एक दूसरे ट्वीट में सुशील मोदी ने यह भी ट्वीट किया कि यदि राजद नेतृत्व में गरीबों की सेवा के लिए तत्परता और गंभीरता होती तो अस्पताल शुरू करने के पहले सरकार से अनुमति ली जाती और उसके मानकों का पालन भी किया जाता. बगैर डॉक्टर स्वास्थ्यकर्मी उपकरण के किसी परिसर में केवल लगा देने से अस्पताल नहीं बन जाता उन्होंने इसे केवल नाटक करार दिया था. (news18.com)

एमपी में विधायक के समर्थन में कांग्रेस की लामबंदी
21-May-2021 9:00 AM (218)

भोपाल, 20 मई| मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार के आवास पर एक महिला द्वारा आत्महत्या किए जाने पर पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने और गिरफ्तारी की लटकी तलवार के बीच कांग्रेस लामबंद हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो गुरुवार को पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ के आवास पर 25 से ज्यादा विधायक जमा हुए और लंबी बैठक चली। इस दौरान विधायक सिंघार के मामले पर चर्चा हुई और तय हुआ कि पुलिस और सरकार की ज्यादती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही पुलिस आगे किसी तरह की कार्रवाई करती है तो कांग्रेस एकजुट होकर मुकाबला करेगी।

ज्ञात हो कि इससे पहले पांच विधायकों का दल पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग कर चुका है। साथ ही पुलिस के मामला दर्ज करने पर सवाल उठा चुका है। कांग्रेस के विधायकों का कहना है कि जिस महिला ने विधायक के आवास पर खुदकुशी की है, उसके बेटे और मां ने सिंघार पर किसी तरह का आरोप नहीं लगाया फिर भी पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया।

हरियाणा के अंबाला की रहने वाली 39 वर्षीय सोनिया भारद्वाज की कांग्रेस विधायक सिंघार से मित्रता थी और उसका सिंघार के घर पर आना जाना था। वह पिछले कई दिनों से उनके आवास पर थी और रविवार को उसने दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। महिला पहले से शादीशुदा थी और उसका एक बेटा भी है। पुलिस को मौके पर सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। हां उस पत्र में सिंघार का कई बार नाम है और लिखा है कि 'अब सहन नहीं होता, वे गुस्से में बहुत तेज हैं।'

पुलिस ने मोबाइल चैट और पूछताछ के आधार पर सिंघार के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है। वहीं सोनिया के बेटे ने सिंघार पर किसी तरह का आरेाप नहीं लगाया है।  (आईएएनएस)

लालू की बेटी रोहिणी ने बीजेपी नेता सुशील मोदी को बताया राजस्‍थानी मेंढक, बोलीं- आकर मुंह ठुर देंगे
20-May-2021 8:27 AM (340)

पटना. लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य और बीजेपी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के बीच ट्विटर वॉर चल रहा है. पटना में आरजेडी नेता तेजस्‍वी यादव की ओर से सरकारी आवास में कोविड केयर सेंटर खोलने को लेकर बयानबाजी का दौर शुरू हुआ है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा कोविड केयर सेंटर के संचालन को लेकर एक वीडियो जारी किया गया. इसी को आधार बनाकर पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एक ट्वीट किया. इसी पर रोहिणी आचार्य ने पलटवार किया है. उन्होंने सुशील मोदी को राजस्थानी मेंढक तक कह दिया.

सुशील मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'तेजस्वी को सरकारी आवास के बजाय अवैध तरीके से पटना में अर्जित दर्जनों मकानों में से किसी को कोविड अस्पताल बनाना चाहिए था, जहां गरीबों का मुफ्त में इलाज होता. कांति देवी ने मंत्री बनने के बदले जो दो मंजिला भवन तेजस्वी यादव को गिफ्ट किया था, उसमें या राबड़ी देवी के पास जो 10 फ्लैट बचे हैं, उनमें अस्पताल क्यों नहीं खोला गया?' इसके अलावा सुशील मोदी ने एक अन्य ट्वीट में लिखा- तेजस्वी यादव के परिवार में दो बहनें एमबीबीएस डॉक्टर हैं. कोरोना संक्रमण के दौर में उनकी सेवाएं क्यों नहीं ली गईं?

रोहिणी बोलीं- मुंह ठुर देंगे

लालू की बेटी व तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य सुशील मोदी के ट्वीट पर बुरी तरह से भड़क गईं. उन्होंने ट्वीट करके कहा- आज के बाद से मेरा या मेरी बहनो का नाम लिया न ये लीचर तो मुंह ठुर देंगे आकर! भाग यहां से राजस्थानी मेंढक. (news18.com)

Bihar : अफसर संभालेंगे बिहार में पंचायतों की कमान या बढ़ेगा मुखिया-सरपंच का कार्यकाल? सत्ता पक्ष और विपक्ष में रार
20-May-2021 8:23 AM (230)

-संजय कुमार

पटना. कोरोना वायरस के कहर के बाद बिहार में राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव टाल दिए हैं. मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए पंचायत चुनाव नहीं होने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर अब सत्ता पक्ष और विपक्ष में तकरार शुरू हो गई है. पंचायत चुनाव टलने की स्थिति में जब पंचायत के प्रतिनिधियों और कार्यकाल पूरा हो जाएगा तो फिर इसकी वैकल्पिक व्यवस्था का क्या होगा, इसे लेकर दो तरह की राय बन रही है.

इन दिनों वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में पंचायतों को अफसरों के हाथों में सौंप दिए जाने या फिर मुखिया-सरपंच सहित अन्य पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल आगे बढ़ाने जैसे दो प्रमुख उपायों पर मंथन जारी है. विपक्षी दलों का कहना है कि 15 जून के बाद भी मौजूदा निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही पंचायत के कामकाज के संचालन का अधिकार दिया जाए. हालांकि सत्ताधारी दल इसके ठीक विपरीत राय रखते नजर आ रहे हैं. उनका मानना है कि सरकार इस पर उचित फैसला ले सकती है.

भाजपा और जेडीयू का ये है मत

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो मौजूदा जनप्रतिनिधियों के कामकाज को लेकर भाजपा की स्पष्ट राय है कि कार्यकाल बढ़ाया नहीं जाए. पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद की मानें तो निर्वाचित प्रतिनिधियों का अपना कार्यकाल पूरा करने के लिए 5 साल का समय मिल चुका है और इस दौरान उन्होंने अपनी जिम्मेवारी भी निभाई है. ऐसे में अगर कोई काम पूरा नहीं हो पाया है, तो सरकार उसे अपने स्तर पर पूरा कर लेगी. हालांकि सत्तारूढ़ दल का एक घटक जदयू इस मामले में अब तक कोई स्पष्ट राय नहीं बन सका है. जदयू नेताओं की मानें तो अभी करोना संकट के बीच कुछ भी कहना सही नहीं है बल्कि उचित समय पर सरकार इस मामले में खुद से फैसला कर लेगी .

उधर मुख्य विपक्षी दल राजद का मत अलग ही है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में नजर आते हैं. जबकि कांग्रेस भी प्रजातांत्रिक व्यवस्था में पंचायतों के मामले में अफसरशाही के न्यूनतम हस्तक्षेप को ही बेहतर स्थिति मानती है. (news18.com)

राजस्थान: हेमाराम के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में सियासत गरमायी, पायलट खेमे के दूसरे MLA भी खोलने लगे मोर्चा
19-May-2021 7:07 PM (115)

 

-दिनेश शर्मा

जयपुर. कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी के इस्तीफे के बाद अब पायलट खेमे के अन्य विधायक भी मुखर होने लगे हैं. सियासी संकट में पायलट खेमे का साथ देने वाले एक और विधायक ने कांग्रेस के वर्तमान हालात को लेकर सवाल उठाए हैं. चाकसू से कांग्रेस विधायक वेद सोलंकी ने हेमाराम चौधरी के इस्तीफे पर कहा है कि वे ईमानदार और स्वच्छ छवि के नेता होने के साथ ही ग्रास रुट के नेता हैं.

सोलंकी ने कहा कि पार्टी को उनके इस्तीफे की वजह देखनी चाहिए. आलाकमान को उन्हें मनाना चाहिए ताकि कांग्रेस को कोई नुकसान ना हो. सोलंकी ने कहा कि कई बार अपनी पीड़ा बयां करते हुए हेमाराम चौधरी की आंखों से आंसू निकलते थे. हो सकता है कि उनके संयम का बांध अब टूट गया हो और इसीलिए उन्होंने इस्तीफा दिया हो।. सोलंकी ने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि आखिर उन्होंने इस्तीफा देने जैसा कदम क्यों उठाया ?

अफसरशाही हावी, कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा

मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में देरी से खफा पायलट खेमे के विधायक वेद सोलंकी ने सत्ता के विकेन्द्रीकरण की जरुरत जाहिर की. सोलंकी ने कहा कि इसमें कोई दोराय नहीं है कि सरकार में अफसरशाही हावी है. कई मंत्रालय बिना मंत्रियों के चल रहे हैं और अफसर अपनी मनमानी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कोविड काल में भी राजनीतिक नियुक्तियां हुई हैं लेकिन पार्टी के लिए खून-पसीना बहाने वाले लोगों को उनमें स्थान नहीं मिल रहा है.
दूसरे सब काम हो रहे हैं तो मंत्रिमंडल विस्तार क्यों नहीं

सोलंकी ने कहा कि जब कोरोना काल में दूसरे सब काम हो रहे हैं तो मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में देरी क्यों हो रही है ? सोलंकी ने कहा कि पार्टी में ब्लॉक और जिला लेवल की कमेटियां तक नहीं बन पा रही है और कार्यकर्ताओं का भी मनोबल टूटा हुआ है. उन्होंने कहा कि हेमाराम चौधरी जैसे सीनियर नेता की बात तक आलाकमान सुनने को तैयार नहीं है.

राजनीतिक नियुक्तियों में अफसरों को तवज्जो क्यों ?

विधायक वेद सोलंकी ने बोर्ड आयोगों में अफसरों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्या इन लोगों ने पार्टी के लिए खून-पसीना बहाया है ? उन्होंने कहा कि एक ओर जहां कोरोना काल में अफसरों को राजनीतिक नियुक्तियां दी जा रही है वहीं कार्यकर्ता निराश है. उन्होंने कहा कि अगर मैं अपने क्षेत्र की जनता के काम नहीं करवा पाता तो मैं भी इस्तीफा दे देता.

अपने काम साम,दाम, दण्ड, भेद की नीति से करवा लेता हूं

हालांकि उन्होंने कहा कि मैं अपने काम साम,दाम, दण्ड, भेद की नीति से करवा लेता हूं लेकिन हेमाराम चौधरी जैसे गांधीवादी नेता अपने काम कैसे करवाएं. उन्होंने हेमाराम चौधरी के इस्तीफे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि चौधरी जैसे नेता विरले होते हैं और अगर वो पार्टी से टूटते हैं तो यह पार्टी के लिए बड़ा नुकसान है.

गुड़ामालानी मेरा परिवार- हेमाराम

इस बीच इस्तीफा देने वाले विधायक हेमाराम चौधरी ने एक ट्वीट कर कहा है कि गुड़ामालानी विधानसभा क्षेत्र मेरा परिवार था, है और आगे भी ताउम्र रहेगा. अपने ट्वीट में हेमाराम चौधरी ने लिखा है कि गुड़ामालानी की जनता के लिए जीवन भर मैंने अपना कर्तव्य निभाया है. चाहे मैं विधायक पद पर रहा या पद पर नहीं रहा. उन्होंने कहा कि आगे भी अंतिम सांस तक गुड़ामालानी की जनता के काम के लिए प्रयास करता रहूंगा. इस्तीफा देने के बाद विधायक हेमाराम चौधरी का यह पहला सार्वजनिक बयान सामने आया है.(news18.com)

केरल : विजयन की नई टीम में शैलजा नहीं, दामाद रियाज को किया शामिल
19-May-2021 8:11 AM (155)

तिरुवनंतपुरम, 18 मई| केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने माकपा और सरकार में 'अंतिम शब्द' होने की अपनी शैली के अनुरूप, मंगलवार को अपने फैसले से सबको चौंका दिया। उन्होंने प्रशंसित स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा को अपने नए मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी, जबकि अपने दामाद पी.ए. मोहम्मद रियाज को मंत्री पद दिया। विजयन के 21 सदस्यीय कैबिनेट में माकपा के 12, भाकपा के चार, केरल कांग्रेस (एम), राकांपा और जनता दल (एस) के एक-एक और दो अन्य सहयोगी दलों में से एक-एक शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक के पास एक विधायक है।

लोकतांत्रिक जनता दल, एकमात्र सहयोगी दल है, जिसे कैबिनेट का पद नहीं मिला।

मंत्रिमंडल की घोषणा पार्टी में और इसके बाहर कई लोगों के लिए एक झटके के रूप में आई है। मंत्री पद न मिलने पर शैलजा ने कहा कि वह एक अनुशासित पार्टी कार्यकर्ता हैं और पार्टी के फैसले का पालन करेंगी।

अन्य सभी नाम अपेक्षित तर्ज पर थे और केवल एक ही मानदंड था और वह था विजयन के प्रति अडिग निष्ठा। नए मंत्रिमंडल में शामिल हैं पूर्व राज्यसभा सदस्य पी. राजीव और के.एन. बालगोपाल, महिलाओं में प्रोफेसर आर. बिंदु जो माकपा सचिव ए. विजयराघवन की पत्नी हैं। इनके अलावा पत्रकार व दूसरी बार विधायक बनीं वीना जॉर्ज शामिल हैं।

अन्य मंत्रियों में शामिल हैं विजयन के सबसे करीबी सहयोगी एम. गोविंदन जो कन्नूर से हैं। इसके अलावा, पूर्व राज्यमंत्री साजी चेरियन और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के. राधाकृष्णन भी मंत्री बनाए गए हैं जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित त्रिशूर निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए हैं।

वी. शिवनकुट्टी को भी मंत्री पद दिया जाना तय था, क्योंकि उन्होंने राज्य की राजधानी की नेमोम सीट पर भाजपा के मजबूत उम्मीदवार कुम्मनम राजशेखरन को हराया है।

मंत्रिमंडल में वी. अब्दुरहीमान को भी शामिल किया गया है जो मुस्लिम बहुल मलप्पुरम जिले से हैं, हालांकि उनकी पार्टी नेशनल सेक्युलर कांफ्रें स गठबंधन में शामिल नहीं है, बल्कि उसे माकपा का समर्थन प्राप्त है।

वी.एन. वसावन माकपा के एक अन्य नेता हैं, जो विजयन के वफादार माने जाते हैं, उन्हें भी मंत्री पद दिया गया है।

दो बार के लोकसभा सदस्य एम.बी. राजेश जो पलक्कड़ से 2019 का चुनाव हार गए थे, लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव जीते हैं, उन्हें सदन के अध्यक्ष पद के लिए चुना गया है।

इस बीच खबरें सामने आई हैं कि माकपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने शैलजा को नए मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने पर नाराजगी जताई है।  (आईएएनएस)