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रास्ता खोजने के लिए मैग्नेटिक फील्ड का उपयोग करती हैं शार्क
08-May-2021 8:41 AM (75)
रास्ता खोजने के लिए मैग्नेटिक फील्ड का उपयोग करती हैं शार्क

शार्क के बारे में लंबे समय से यह साबित करने का प्रयास हो रहा था कि वे अपने आवागमन के लिए मैग्नेटिक फील्ड का उपयोग करती हैं जिसमें अब सफलता मिली है.

वैज्ञानिकों को अभी तक यह पता था कि समुद्री कछुए चुंबकीय संकेतों के जरिए यह जान पाते हैं कि उन्हों हजारों दूर मील कहां अपने अंडे छिपा रखें हैं. लेकिन अभी तक यह पता नहीं चल सका था कि शार्क आखिर हजारों किलोमीटर दूर की यात्राओं में अपना रास्ता कैसे पता लगा लेती हैं. शोधकर्ताओं का पता चला है कि इसके लिए वे भी मैग्नेटिक फील्ड पर निर्भर करती हैं.  

फ्लोरीडा स्टेटयूनिवर्सिटी कोस्टल एंड मरीन लैबोरेटरी के शोधकर्त और सेव अवर सीज फाउंडेशन के प्रजोक्ट लीटर ब्रायन केलर ने बताया कि शार्क कैसे सफलतापूर्वक इतनी सटीकता से गंतव्य तक पहुंच जाती थीं यह गुत्थी अनसुलझी ही थी. यह शोध उससे सिद्धांत का समर्थन करता है जिसके मुताबिक वे पृथ्वी की मैग्ननेटिक फील्ड का उपयोग उनका रास्ता खोजने में करती हैं. यह एक तरह का प्राकृतिक जीपीएस है.
 
शोधकर्ताओं पहले से जानते हैं कि शार्क की कुछ प्रजातियां हर साल कुछ खास गंतव्यों तक पहंचने के लिए बहुत लंबी दूरी की यात्राएं करती हैं. वे यह भी जानते थे कि शार्क इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड के प्रति संवेदनशील होती हैं. इसीलिए वैज्ञानिक लंबे समय से इसकी पड़ताल कर रहे थे कि क्या शार्क भी आवागमन के लिए मैग्नेटिक फील्ड का उपयोग करती हैं. लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इसकी जांच करने की थी. केलर बताते हैं कि वे इस प्रयोग के काम करने पर हैरान हुए थे क्योंकि 50 सालों से इस अध्ययन के प्रयास चल रहे थे.

केलर ने पाया कि अध्ययन के लिए छोटी शार्क पर प्रयोग करना आसान होगा. इसके लिए ऐसी प्रजाति वाली शार्क की जरूरत थी जो हर साल एक खास जगह पर लौट आती हैं. इसके लिए उन्होंने बोनटहेड्स यानि स्फिर्ना टीब्यूरो शार्क को चुना. ये हर साल एक ही नदी के मुहाने पर वापस आती हैं. शोधकर्ताओं ने मैग्नेटिक डिस्प्लेसमेंट प्रयोग कर 20 किशोर शार्क मछलियों को पकड़ा और पकड़े जाने की जगह से सैकड़ों किलोमीटर दूरी वैसे ही मैग्नेटिक हालात पैदा किए.
 
इससे शोधकर्ताओं का पता चल सका कि शार्क अगर मैग्नेटिक संकेतों पर निर्भर होती है तो वे कैसे खुद की दिशा तय करती हैं. अगर शार्क भूचुंबकीय क्षेत्र से मुताबिक अपनी स्थिति तय करती हैं तो उन्हें दक्षिण चुंबकीय क्षेत्र में उत्तर में की ओर जाना चाहिए और उत्तर चुंबकीय क्षेत्र में दशिण की ओर जाना चाहिए. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिस जगह से वे पकड़ी गई थीं वहां की चुबंकीय हालातों के मुताबिक शार्क ने अपनी दिशा नहीं बदली.

शोधकर्ताओं का कहना है कि शार्क में मैग्नेटिक फील्ड के आधार पर आवागमन करने की क्षमता का शार्क के जनसंख्या संरचना में भी योगदान ह सकता है. उन्हें लगता है कि उनकी बोनेटहेड शार्क पर हुए प्रयोगों के नतीजे बाकी शार्क पर ही उसी तरह से लागू हो सकते हैं. एक बड़ी सफेद शार्कके बारे में पता चला था कि वह दक्षिण अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया तक जा कर अगले साल वहीं पर वापस गई थी. केलर का कहना है कि ऐसी दुनिया में जहां लोग आवागमन के लिए जीपीएस का उपयोग करते हैं, शार्क में यह क्षमता का होना बहुत अद्भुद है.

केलर का कहना है कि भविष्य में वे शार्क पर मैग्नेटिक फील्ड के और भी प्रभावों का अध्ययन करेंगे. इनमें मानवीय स्रोतों के पैदा होने वाला मैग्नेटिक प्रभाव, जैसे वे प्रभाव जो समुद्र में नीचे बिछी तारों से होता है, शामिल है. साथ ही शार्क के दैनिक जीवन में मैग्नटिक फील्ड के असर की क्या भूमिका है, वे यह भी अध्ययन करेंगे. (news18.com)

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