विशेष रिपोर्ट

कृषि मंत्री की नोटशीट से विभाग थर्राया, वर्मी-कम्पोस्ट खरीदी में अनियमितता की जांच, सप्लायरों-अफसरों पर एफआईआर करने कहा
कृषि मंत्री की नोटशीट से विभाग थर्राया, वर्मी-कम्पोस्ट खरीदी में अनियमितता की जांच, सप्लायरों-अफसरों पर एफआईआर करने कहा
Date : 17-Feb-2020

कृषि मंत्री की नोटशीट से विभाग थर्राया, वर्मी-कम्पोस्ट खरीदी में अनियमितता की जांच, सप्लायरों-अफसरों पर एफआईआर करने कहा

शशांक तिवारी

रायपुर, 17 फरवरी (छत्तीसगढ़)। कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे की एक नोटशीट से पूरा विभाग थर्रा गया है। चौबे ने वर्मी बेड-कम्पोस्ट की ऊंची दर पर खरीदी की शिकायत पर सख्त आदेश दिए हैं। उन्होंने न सिर्फ भुगतान पर रोक लगा दी है बल्कि सप्लायरों-अफसरों की भूमिका की जांच कर एफआईआर कराने के लिए कह दिया है। 

श्री चौबे के अधीन उद्यानिकी विभाग में करीब 8 करोड़ से अधिक वर्मी बेड-कम्पोस्ट की खरीदी हुई थी। यह खरीदी करीब 3 माह पहले हुई थी। यह शिकायत आई कि वर्मी बेड-कम्पोस्ट की ऊंची दर पर खरीदी की गई है। इसमें सप्लायरों को काफी फायदा पहुंचाया गया है। इस खरीदी में विभाग के अफसरों की भूमिका रही है। शुरूआत में तो इन शिकायतों पर ज्यादा कुछ नहीं हुआ, लेकिन जिलों से इसकी शिकायत आनी शुरू हो गई। 

यह बताया गया कि कई जगहों पर गुणवत्ताहीन वर्मी बेड-कम्पोस्ट की सप्लाई हुई है। यह शिकायत कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे तक पहुंची, तो उन्होंने विभाग के लोगों से जानकारी ली। यह बात सामने आई है कि दोगुनी-तिगुनी दर पर वर्मी बेड-कम्पोस्ट की सप्लाई की गई है। इनमें से कुछ सप्लायर रायपुर के ही हैं। इन शिकायतों को कृषि मंत्री ने काफी गंभीरता से लिया। उन्होंने विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती डॉ. मनिन्दर कौर द्विवेदी को कड़ा नोटशीट भेजा है। सूत्रों के मुताबिक कृषि मंत्री ने न सिर्फ भुगतान रोकने के आदेश दिए हैं बल्कि पूरी शिकायत पर जांच प्रतिवेदन तलब किया है। साथ ही यह भी लिख दिया है कि दोषी सप्लायर-अफसरों के खिलाफ तुरंत एफआईआर कराई जाए। 

कृषि मंत्री की नोटशीट से विभाग में हडक़ंप मच गया है। सप्लायरों का भुगतान रोक दिया गया है। प्रकरण की अभी जांच ही चल रही है। सूत्रों के मुताबिक जांच में करीब आधा दर्जन से अधिक अफसर लपेटे में आ सकते हैं। इन अफसरों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश हैं।  उल्लेखनीय है कि ये सभी सप्लायर पिछले सालों में उद्यानिकी विभाग में सैकड़ों-करोड़ों की सप्लाई कर चुके हैं। कई बार शिकायतें आई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई है। तब पिछली सरकार के प्रभावशाली लोगों का इन सप्लायरों को संरक्षण रहा है। सरकार बदलने के बाद भी यही ढर्रा चलता रहा।

पहले तो विभागीय बैठकों में कृषि मंत्री ने साफ शब्दों में सप्लाई आदि में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के लिए हिदायत दी थी। बावजूद इसके गड़बड़ी जारी रही। इसके बाद पहली बार सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अभियान चल रहा है। ऐसे में वर्मी बेड-कम्पोस्ट से न सिर्फ जैविक फसलों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है, बल्कि यह रासायनिक खाद की तुलना में काफी सस्ता होता है। यही वजह है कि पिछले वर्षों में काफी खरीदी हुई है। 

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