विशेष रिपोर्ट

बस्तर में माओवादियों का लगातार सिकुड़ता कैडर, 14 करोड़ से ज्यादा के वृद्ध इनामी दशकों से भूमिगत
बस्तर में माओवादियों का लगातार सिकुड़ता कैडर, 14 करोड़ से ज्यादा के वृद्ध इनामी दशकों से भूमिगत
Date : 16-Feb-2020

बस्तर में माओवादियों का लगातार सिकुड़ता कैडर, 14 करोड़ से ज्यादा के वृद्ध इनामी दशकों से भूमिगत

रायपुर, 16 फरवरी । देश में 38 अत्यधिक वांछित 14 करोड़ से भी अधिक के इनामी माओवादी नेता जिन्हें छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ-साथ अन्य राज्यों की सरकारों को तलाश है अब उम्रदराज हो चले हैं और पिछले दो-तीन दशकों से कुछ तो 40 से भी ऊपर भूमिगत जीवन व्यतीत कर रहें है।

राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और दिप्रिंट के पास मौजूद कागज और साक्ष्यों से यह पता चलता है कि ये 38 ऐसे दुर्दांत माओवादी नेता हैं जो छत्तीसगढ़ और अन्य राज्य महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, झारखंड, बिहार और ओडिशा के साथ अन्य दक्षिणी राज्यों में नक्सलवाद का नेतृत्व करते हैं और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के संगठन में अपना पूर्ण वर्चस्व रखते हैं। सीपीआई (एम) के संगठनात्मक निर्णयों के अलावा यही नेता पार्टी के अन्य फ्रंटल संगठनों में भी पूरा दखल रखते हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी माओवादियों की मोस्ट वांटेड सूची में करीब 21 ऐसे नेताओं का नाम शामिल है जो अन्य राज्यों के पुलिस और सुरक्षा एजेंसी के द्वारा भी वांछित हैं। इनमें सात ऐसे खतरनाक और उम्रदराज माओवादी हैं जिन पर छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षाबलों द्वारा एक करोड़ का इनाम घोषित है वहीं अन्य 14 माओवादी कमांडरों पर 40 लाख का नगद इनाम घोषित है। ये सभी 21 नेता सीपीआई(एम) में या तो पोलितब्यूरो या केंद्रीय समिति यानी सेंट्रल कमेटी के सदस्य या फिर देश में माओवाद को संचालित करने वाली पार्टी के अन्य फ्रंटल संगठनों के सदस्य अध्यक्ष हैं।

दो-तीन दशकों से भूमिगत हैं माओवादी
इनके अलावा 17 ऐसे खतरनाक वांछित माओवादी हैं जो सिर्फ छत्तीसगढ़ में नक्सल तंत्र का नेतृत्व संभाल रहे हैं। ये सभी माओवादी नेता दंडकारण्य जोनल स्पेशल कमेटी (डीकेजेडएससी) के सदस्य, पदाधिकारी या फिर राज्य में कमेटी के फ्रंटल संगठनों के संचालक का काम देखते हैं। इन माओवादियों पर करीब 25 लाख रुपये का इनाम घोषित है। मोस्ट वांटेड माओवादियों में करीब आधे ऐसे हैं जिनकी उम्र 60 से 85 के बीच है। ये माओवादी कमांडर जिसमें 3 महिला भी शामिल है करीब दो-तीन दशकों से भी ज्यादा भूमिगत जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में माओवादी विरोधी अभियान में लगे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि माओवादी नेताओं की बढ़ती उम्र के बावजूद भी उन्हें नक्सलवाद का नेतृत्व करना पड़ रहा है क्योंकि विगत 5 से 7 वर्षों में स्थानीय युवाओं और जनता का समर्थन उन्हें बहुत कम मिल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जनता का समर्थन नहीं मिलने की वजह से छत्तीसगढ़ में माओवादी मिलिशिया का कैडर बल अब आधा ही रह गया है जिससे उनकी गतिविधियां विशेषकर हमलों में काफी गिरावट आई है।

ज्ञात हो की करीब 3 महीने पहले प्रदेश सरकार ने भी सार्वजनिक रूप से यह बताया था कि पिछले 3 वर्षों के दौरान माओवादी हिंसक गतिविधियों में करीब 45त्न की गिरावट आई है।
दिप्रिंट से बात करते हुए बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी कहते हैं, ‘छत्तीसगढ़ और देश के अन्य राज्यों में माओवादी नेतृत्व अब वृद्ध हो चुका है जिसके वजह से नक्सली विचारधारा को बड़ा झटका लगा है। अब इस विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय युवा आगे नहीं आ रहे हैं। इस का मुख्य कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षबलों की भारी मात्रा में तैनाती और सरकार द्वारा चलाये जा रहे विकास के कार्य हैं।’ बस्तर पुलिस महानिरिक्षक का कहना है कि ‘पिछले पांच वर्षों में माओवादी लडाकों की संख्या करीब आधी हो चुकी है और आने वाले दिनों में और भी कमजोर पड़ेंगे।’

एक करोड़ के इनामी माओवादी
खतरनाक 21 वांछित माओवादियों में 7 ऐसे नक्सलवादी नेता हैं जिन पर छत्तीसगढ़ के साथ-साथ नक्सल प्रभावित अन्य राज्य महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, तेलंगाना और बिहार की सरकारों ने एक करोड़ रुपए का इनाम घोषित किया है। एक करोड़ के इनामी नक्सलवादियों की सूची में शामिल है 

72 वर्षीय मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ रमन्ना उर्फ गुडसा दादा (निवास करीमनगर तेलंगाना), 82 वर्षीय मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर (निवास गिरिडीह झारखंड), सीपीआईएम प्रवक्ता कोटक कम सुदर्शन उर्फ आनंद मोहन (निवास आदिलाबाद तेलंगाना), 60 वर्षीय मल्लोजुल्ला वेणु गोपाल उर्फ लक्ष्मण उर्फ सोनू (निवास करीमनगर तेलंगाना), नंबर वन केशव राव उर्फ गगन्ना (निवास जिला श्री गोकुलम तेलंगाना), 65 वर्षीय प्रशांत बोस उर्फ किशन दा (निवास जादवपुर कोलकाता) और विवेक चांदनी उर्फ प्रयाग (निवास धनबाद झारखंड) है।
मुपल्ला लक्ष्मण राव विगत 42 वर्षों से भूमिगत जीवन जी रहा है, मिसिर बेसरा करीब 30 वर्ष, सुदर्शन करीब 37 वर्ष, नम्बवाल केशव करीब 25 वर्ष और अन्य तीन करीब दो दशकों से भूमिगत जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

40 लाख के ईनामी माओवादी
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा घोषित 40 लाख के इनामी माओवादियों में जो नाम शामिल है उनमें मल्लाराजी रेडी उर्फ सतन्ना उर्फ मसन्ना, 60 वर्षीय कादरी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कोसा और गौतम उर्फ साधु, 62 वर्षीय थिप्परी तिरुपति उर्फ कुम्मा उर्फ देवन्ना और 56 वर्षीय पुल्लरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्ना उर्फ शंकरन्ना चारों तेलंगाना के करीम नगर के रहने वाले हैं।
सीपीआई (एम) के ये सेंट्रल कमेटी सदस्य विगत तीन दशकों से भूमिगत हैं। इनके अलावा सीपीआई (एम) की 55 वर्षीय एकमात्र महिला पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी सदस्य झारखंड की शोभा उर्फ शीला मरांडी, उत्तर बिहार का 65 वर्षीय प्रमोद मिश्रा उर्फ बन बिहारी उर्फ नेताजी, यवतमाल महाराष्ट्र का रहनेवाला 60 वर्षीय दीपक तलतुम्बे, रमेश उइके उर्फ चमरू दादा, नालगोंडा तेलंगाना से हनुमंथलु, हावड़ा का रहवासी रंजीत बोस और 55 वर्षीय वारंगल तेलंगाना निवासी नादेन बालकृष्ण एवं गजराला रवी भी 40 लाख के इनामी माओवादी हैं जो 2-3 दशकों से भूमगत हैं।

25 लाख के ईनामी माओवादी
ऐसे करीब 17 कट्टर नक्सली नेता हैं जिनपर छत्तीसगढ़ सरकार ने कई वर्षों से 25 लाख रुपए का इनाम घोषित किया हुआ है। ये ईनामी माओवादी ही प्रदेश में नक्सल कैडर की गतिविधियों का नेतृत्व करते हैं और सभी नेता डीकेजेडएससी के सदस्य और कमेटी के फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी भी हैं। इन नामों में प्रशासन और पुलिस के बीच प्रख्यात 55 वर्षीय स्थानीय दुर्दांत नक्सली हिडमा मांडवी उर्फ हिडमन्ना प्रमुख है। हिडमा को सीपीआई (एम) ने फिलहाल डीकेजेडएससी के पूर्व प्रभारी सचिव रमन्ना की नवंबर 2019 में एक लंबी बीमारी से हुई मौत के बाद मिलिशिया का कमान सौंपा है।

25 लाख के अन्य ईनामी नक्सली लडाकों में जिला महबूबनगर तेलंगाना की रहने वाली सुजाता नाम की 58 वर्षीय दो महिला नक्सली नेता भी शामिल हैं। एक सुजाता जिसे नक्सली अल्लुरी कृष्णा कुमारी के नाम से भी जानते हैं। वो डीकेजेडएससी की प्रवक्ता भी है।

बस्तर रेंज के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की माने तो अल्लूरी कृष्णा कुमारी डीकेजेडएससी के छत्तीसगढ़ प्रभारी के खाली पड़े पद के लिए एक प्रमुख दावेदार भी हैं। ये दोनों महिला नक्सली नेता विगत 33 वर्षों से भूमिगत हैं।
इनके अलावा 20 वर्षों से भूमिगत 60 वर्षीय लेंगा उर्फ संजीव निवासी जिला रंगारेड्डी तेलंगाना, 53 वर्षीय रवी उर्फ लोकेटी निवासी जिला निजामाबाद 25 सालों से भूमिगत, 59 वर्षीय ग्रिड्डी पवनन्दन उर्फ श्याम दादा निवासी जिला वारंगल तेलंगाना (35 सालों से भूमिगत), 55 वर्षीय विनय रेड्डी निवासी नालगोंडा तेलंगाना, 69 वर्षीय रघु उर्फ सुयालु उर्फ शिवन्ना निवासी वारंगल तेलंगाना (करीब चार दशकों से भूमिगत) और गोलापल्ली जिला सुकमा छत्तीसगढ़ निवासी 51 वर्षीय सुरेन्द्र सोढ़ी उर्फ सोमा सोढ़ी नामक नक्सली हैं।

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