विशेष रिपोर्ट

गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में बढ़ा बाघों का कुनबा, हुए आधा दर्जन, केंद्र-राज्य सरकार की सीधे मॉनिटरिंग
गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में बढ़ा बाघों का कुनबा, हुए आधा दर्जन, केंद्र-राज्य सरकार की सीधे मॉनिटरिंग
Date : 20-Nov-2019

गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में बढ़ा बाघों का कुनबा, हुए आधा दर्जन, केंद्र-राज्य सरकार की सीधे मॉनिटरिंग

चंद्रकांत पारगीर

बैकुंठपुर, 20 नवंबर। कोरिया जिले में स्थित क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश का सबसे बड़े गुरू घासीदास नेशनल पार्क में एक बाघ की और बढ़ोतरी हो गई है। बाघों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए केन्द्र और राज्य सरकार के आला अफसर ना सिर्फ पार्क की स्वयं मॉनिटरिंग कर रहे हैं बल्कि इस पार्क को कैमरा ट्रैपिंग प्रोटोकाल में शामिल कर लिया गया है, जिसके तहत जहां बाघों का रहवास क्षेत्र है वहां कैमरा ट्रैपिंग करने के लिए नक्शा तैयार कर कैमरे लगाने का कार्य सरकार करेगी।

इस संबंध में गुरू घासीदास पार्क के डायेक्टर इमोत्स्यु आओ का कहना है कि बड़ी खुशी की बात है कि हमारे यहां बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है, अब केन्द्र और राज्य सरकार हमारे पार्क की मॉनिटरिंग के साथ कई तरह के संसाधन उपलब्ध करा रही है, आने वाले समय में इनके संरक्षण को लेकर और कई नई सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

जानकारी के अनुसार गुरू घासीदास नेशनल पार्क में बाघों की संख्या अब आधा दर्जन का आंकडा छू गई है। यह खुशी की बात है कि यहां लगातार बाघों की बढ़ोतरी हो रही है। सिर्फ पार्क के सोनहत परिक्षेत्र में 4 टाइगर हैं।

पार्क रेंजर एमएस मार्सकोले की माने तो फरवरी 2019 से यहां बाघों का आना शुरू हुआ है, जो आगे बढ़ता ही गया है। नया छठवां मेहमान अब हमारे यहां का ही माना जा रहा है, बाघ के दोनों ओर की धारियां किसी और स्थान के बाघ से मैच नहीं हो पाई है।

उल्लेखनीय है कि परिक्षेत्राधिकारी श्री मार्सकोले और उनकी टीम 9 माह से लगातार बाघों पर नजर बनाए हुए है। उन्होनें पार्क में वाहनों की गति पर ब्रेेक लगाई, असमाजिक तत्वों और शिकारियों पर पैनी नजर बनाने के लिए विशेष रणनीति बनाई, इसके अलावा पार्क में ग्रामीणों को बाघों के संरक्षण को लेकर समझाईश देने में कामयाबी पाई।

आमने-सामने है इलाका

सोनहत में वन्य जीवों की भारमार होने, पर्याप्त पानी और घनघोर जंगल में कई ऐसे स्थान हैं, जहां आम आदमी नहीं पहुंच सकता, यही कारण है बाघों ने अपना आशियाना बनाया है। बीते माह आए नए मेहमान ने अपना इलाका बना लिया है। सोनहत से रामगढ़ जाने वाले मुख्य मार्ग के एक ओर एक बाघ का इलाका है, जबकि सडक़ के दूसरी ओर दूसरे बाघ का इलाका है।  कई बार दोनों बाघों के साथ-साथ फुटमार्क भी मिले हैं। दूसरी ओर मादा बाघिन के साथ उसके एक शावक के फुटमार्क भी कई स्थानों पर पाए गए हंै। शावक बाघिन के पीछे ही रहता है, पार्क के अफसर यह पता नहीं लगा पाए हैं कि जन्मा शावक नर है या मादा।

कब-कब बढ़े नेशनल पार्क में टाईगर

फरवरी  2019 में पहली बार 1 नर बाघ को देखा गया 

अप्रेल   2019 में एक मादा बाघिन का पता चला

जून    2019 में बाघिन ने एक बच्चे को जन्म दिया

जुलाई  2019 में नर बाघ जनकपुर परिक्षेत्र में देखा गया, जिसमें कॉलर लगा हुआ है

जुलाई  2019 में एक बाघ पार्क के कमर्जी परिक्षेत्र में पाया गया

अक्टूबर 2019 में एक नर बाघ पार्क के सोनहत परिक्षेत्र. में पाया गया

विशेषज्ञों ने सिखाई टै्रपिंग की नई तकनीक

पार्क परिक्षेत्र में में 19 नवंबर को वाईल्ड लाईफ के विशेषज्ञों ने पार्क के वन अमला व अधिकारियों को वन्य जीवों के कैमरा टै्रपिंग प्रोटोकाल के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान कर इसकी बारिकीयों से अवगत कराया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में सीनियर वाईल्ड लाईफ रिसर्चर आशीष वालेकर, तथा सहायक संचालक तमोल पिंगला एलिफें रिजर्व के जयजीत केरकेट्टा द्वारा पार्क क्षेत्र में शेरों व टाईगरों को कैमरों से टै्रपिंग कैसे की जाये उसकी जानकारी साझा की। अभी तक दक्ष तकनीकी तौर पर जिले के वन क्षेत्रों से वन्य जीवों की टै्रपिंग की जाती थी जो पर्याप्त नहीं था। अब स्पष्ट तौर पर नक्शा तैयार कर वन्य जीवों की आधुनिक तरीके से नई तकनीक का उपयोग करते हुए टै्रपिंग की जाएगी जिससे उनकी सही स्थिति का पता चल सके।

प्रशिक्षण में बताया गया कि अब पार्क की निगरानी राज्य स्तर से किये जाने के साथ-साथ केंद्र सरकार की वाईल्ड लाईफ के अधिकारियों द्वारा सीधी निगरानी भी होगी। इधर, राज्य वाईल्ड लाईफ द्वारा पार्क का नये सिरे से नक्शा तैयार किया जा रहा है और बारिकी से इस दिशा में मॉनिटरिंग होगी।

 गौरतलब है कि जिले में स्थित गुरू घासीदास नेशनल पार्क में वर्ष के शुरूआती दौर में अधिकारियों को पार्क क्षेत्र से गुजरे मुख्य मार्ग पर शाम ढलने के बाद शेर दिखाई दिया था। इसके बाद से पार्क अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में कई तरह की पाबंदिया लगा कर शेर की निगरानी के लिए कैमरे लगाये गये थे ताकि शेर की हर गतिविधि के साथ लोकेशन को दर्ज किया जा सके।

पार्क में होंगे और कड़े नियम

अब पार्क नेशनल की सीमा में पिकनिक मनाने को पूर्ण रूप से प्रतिबंध कर दिया गया है। पार्क क्षेत्र में वाहनों की गति सीमा तय कर दी गई है, लोगों की आवाजाही पर निगरानी रखी जा रही है। अब दिन के समय आसानी से बाघ किसी को भी नजर आने लगे हैं। टाईगर के कुनबे में एक सदस्य की बढ़ोतरी के बाद से फिर पार्क अधिकारियों की हलचल बढ़ी है। बताया जाता है कि गुरू घासीदास नेशनल पार्क को केंद्र सरकार के नये प्रोजेक्ट में शामिल करने की कवायद तेज हो गई है। पूर्व में ही गुरू घासीदास नेशनल पार्क को टाईगर रिजर्व बनाने की दिशा में भी प्रस्ताव भेजा जा चुका है।

बाइक छोड़ भाग खड़ा हुआ ग्रामीण

जानकारी के अनुसार एक सप्ताह पूर्व दिन के समय रामगढ़ से सोनहत आ रहे एक बाइक सवार के सामने कुछ दूरी पर बाघ नजर आया था। बाघ चुपचाप सडक़ पार कर अपने रास्ते जंगल की ओर चला गया था। परन्तु बाईक चालक डर के मारे बाइक को सडक किनारे गड्ढे में गिरा भाग खड़ा हुआ और कुछ दूरी पर जाकर ग्रामीणों के पास पहुंचा और फिर ग्रामीणों की मदद से उसकी बाइक गड्ढे से निकाली गई थी।

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