संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 29 अक्टूबर : कश्मीर में हिंदुस्तानी नहीं,  कट्टरपंथी फिरंगी सांसद!
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 29 अक्टूबर : कश्मीर में हिंदुस्तानी नहीं, कट्टरपंथी फिरंगी सांसद!
Date : 29-Oct-2019

पिछले छह बरसों का क्या कोई ऐसा भी हफ्ता गुजरा है जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को चौंका न दिया हो? और इस बार तो उन्होंने हिंदुस्तानियों के साथ-साथ योरप के लोगों को भी चौंका दिया है क्योंकि वे यूरोपीय संघ के सत्ताईस ऐसे सांसदों की मेजबानी कर रहे हैं जिन्हें धारा 370 खत्म होने के बाद का कश्मीर देखना नसीब होगा। वह कश्मीर जिसे खुद के वहां के तीन-तीन भूतपूर्व मुख्यमंत्रियों को अपनी खिड़की के भीतर से देखना नसीब नहीं हो रहा है, कश्मीर में पैदा हुए और संसद में पहुंचे हुए गुलाम नबी आजाद जैसे लोगों को नसीब नहीं हो रहा है, हिंदुस्तानी और विदेशी मीडिया को नसीब नहीं हो रहा है, दुनिया के इस महान लोकतंत्र रहे हिंदुस्तान के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को नसीब नहीं हो रहा है। ऐसे में हिंदुस्तान को डेढ़ सौ बरस गुलाम बनाकर रखने वाले अंगे्रजों के सांसदों और उनके यूरोपीय भाई-बहन गोरों को यह नसीब हो रहा है, तो यह दुनिया को चौंकाने वाली बात है।

लेकिन हिंदुस्तानी मीडिया में जो खबरें आ रही हैं, उनके मुताबिक यूरोपीय संसद के इन सत्ताईस सांसदों में से कम से कम बाईस ऐसे हैं  जो कि अपने-अपने देशों में दक्षिणपंथी या कट्टर दक्षिणपंथी माने जाते हैं। वे इटली में परदेशियों के बसने के खिलाफ हैं, जो यूके को यूरोपीय संघ से अलग करना चाहते हैं, और जो एक दूसरे देश में आवाजाही, कामकाज के खिलाफ राष्ट्रवादी सांसद हैं। इनमें से एक ऐसे हैं जो कि अभी डेढ़ बरस पहले एक नेता पर भद्दी नाजीवादी टिप्पणी करने की वजह से यूरोपीय यूनियन के उपाध्यक्ष पद से बर्खास्त किए गए थे। ईयू के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था। कुछ दूसरे सांसद ऐसे आए हैं जो कि अपने देशों में मानवाधिकार उल्लंघन पर आंखें मूंदे रखते हैं। कोई सांसद ऐसा है जिसे इस बात पर हैरानी है कि हिटलर के इतने मानव संहार के बाद इतने यहूदी बच कैसे गए थे?

एक तरफ सीपीएम के सीताराम येचुरी ने इन सांसदों, ऐसे सांसदों के कश्मीर दौरे का विरोध किया है, और साथ-साथ दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के सांसद, सुब्रमण्यम स्वामी ने इस दौरे को रद्द करने की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें हैरानी है कि विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ के सांसदों के व्यक्तिगत तौर पर जम्मू-कश्मीर इलाके का दौरा करने के इंतजाम किए हैं। उन्होंने कहा- यह हमारी राष्ट्रनीति से पीछे हटना है, मैं सरकार से यह दौरा रद्द करने की अपील करता हूं, क्योंकि यह अनैतिक है। कांगे्रस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के दौरे पर जाने के लिए योरप के सांसदों का स्वागत किया जा रहा है जबकि भारतीय सांसदों के कश्मीर दौरे पर प्रतिबंध लगाकर रखा गया है, यह बहुत गलत है। कांगे्रस के जयराम रमेश ने लिखा है- जब भारतीय नेताओं को जम्मू-कश्मीर के लोगों से मिलने से रोका जा रहा है तो सीना ठोककर राष्ट्रवाद की बात करने वालों ने क्या सोचकर यूरोपीय नेताओं को जम्मू-कश्मीर जाने की इजाजत दी? उन्होंने कहा कि यह सीधे-सीधे भारत की अपनी संसद और हमारे लोकतंत्र का अपमान है।

इन तथ्यों से यह मामला साफ है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किस तरह अंतराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर के आज के हालात पर सकारात्मक बातें कहलवाने के लिए यह काम कर रहे हैं। भारत सरकार के रूप में उनका यह काम ठीक है क्योंकि सरकार को अपने फैसले के पक्ष में डिंडोरा पीटने का हक है, यह उसकी जिम्मेदारी भी है। लेकिन जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उनसे नफे  के बजाय सरकार को नुकसान ज्यादा होते दिख रहा है। और यह नुकसान महज सरकार का नहीं है, यह पूरे देश का नुकसान है जिसकी साख इस बात से चौपट होगी कि चुनिंदा कट्टरपंथी और नफरतजीवी फिरंगी सांसदों को लाकर उनसे भारत जैसा लोकतंत्र एक चरित्र प्रमाणपत्र हासिल करने जा रहा है। आजादी की पौन सदी बाद भी अगर गोरों से सर्टिफिकेट अपनी खुद की संसद के समर्थन से अधिक मायने का समझा जा रहा है, तो यह भारतीय लोकतंत्र की बड़ी शिकस्त है और उसकी बड़ी बेइज्जती है। कश्मीर के हालात को हिंदुस्तानी संसद और सांसदों की नजरों से दूर रखकर विदेशी सांसदों को कश्मीर दिखाने पर खुद भाजपा के एक जानकार और जागरूक सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने जो कहा है, उससे अधिक हम क्या कहें? मोदी ने देश के लोगों को चौंकाने का सिलसिला इस हफ्ते भी जारी रखा है, लेकिन इससे उनके भक्तों से परे, और आए हुए कट्टरपंथियों से परे शायद ही किसी और तबके में उनका, देश का, और भारतीय लोकतंत्र का सम्मान बढ़ेगा। कश्मीर के लोगों में तो बिल्कुल भी नहीं बढ़ेगा।
-सुनील कुमार

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