विशेष रिपोर्ट

कर्ज में डूबे हाऊसिंग बोर्ड-आरडीए को एक करने तैयारी, भष्टाचार के प्रकरणों की जाँच भी
कर्ज में डूबे हाऊसिंग बोर्ड-आरडीए को एक करने तैयारी, भष्टाचार के प्रकरणों की जाँच भी
Date : 20-Oct-2019

कर्ज में डूबे हाऊसिंग बोर्ड-आरडीए को एक करने तैयारी, भष्टाचार के प्रकरणों की जाँच भी 

शशांक तिवारी
रायपुर, 20 अक्टूबर (छत्तीसगढ़)।
सरसरकार भारी भरकम कर्ज में डूबी हाऊसिंग बोर्ड और आरडीए का विलय कर सकती है। दोनों ही संस्थाओं पर सैकड़ों करोड़ का कर्ज है। दोनों को एक कर कर्ज के मकडज़ाल से मुक्त कर बेहतर संस्था बनाने की योजना पर काम चल रहा है। 

आवास एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने 'छत्तीसगढ़Ó से चर्चा में सिर्फ इतना ही कहा कि हाऊसिंग बोर्ड और आरडीए को एक करने पर विचार चल रहा है। बताया गया कि कुछ साल पहले तक हाऊसिंग बोर्ड और आरडीए को बेहतर संस्था माना जा रहा था, जिसमें हाऊसिंग बोर्ड का काम शुरूआती दौर में बेहतर रहा, लेकिन पिछले पांच सालों में यह संस्था भी भारी भरकम कर्ज के बोझ तले दब गई। इसके लिए पिछली सरकार के नीति निर्धारकों को प्रमुख रूप से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

आरडीए तो तकरीबन दिवालिएपन की कगार पर है। अकेले कमल विहार बसाने के लिए तकरीबन एक हजार करोड़ कर्ज लिए गए थे। यह योजना फेल हो गई और आरडीए पर करीब 5 सौ करोड़ का कर्जा बकाया है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आवास पर्यावरण विभाग की समीक्षा बैठक ली थी, जिसमें दोनों ही संस्था आरडीए और हाऊसिंग बोर्ड के क्रियाकलापों पर चर्चा हुई थी। दोनों ही संस्थाओं के  भारी भ्रष्टाचार और कर्ज में डूबे होने पर मुख्यमंत्री ने चिंता जताई थी। और साथ ही साथ उन्होंने भ्रष्टाचार के प्रकरणों की जांच के लिए निर्देशित किया था। इस दौरान विभागीय मंत्री मोहम्मद अकबर भी थे। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने दोनों संस्थाओं को एक करने पर भी विचार करने के लिए कहा था। सूत्रों के मुताबिक विभाग में दोनों को एक कर नया रूप देने पर मंथन चल रहा है। 

विभाग से जुड़े अफसरों का मानना है कि दोनों संस्थाओं को एक करने से स्थापना व्यय में कमी आएगी। चूंकि दोनों की काम की प्रकृति एक ही है। इसलिए इसमें दिक्कत नहीं आएगी। जहां तक दोनों संस्थाओं को कर्ज से मुक्त करने की बात है, तो इस दिशा में प्रयास चल रहा है। हाऊसिंग बोर्ड के ऐसे मकान व दुकानें, जो नहीं बिक रही हैं, उसकी कीमत कम करने की तैयारी चल रही है। इस सिलसिले में जल्द ही कैबिनेट की बैठक में फैसला हो सकता है। 12 सौ करोड़ के 7 हजार से अधिक मकान व दुकानें नहीं बिक पाई हैं। इनमें से 27 सौ मकान व दुकानें ऐसी हैं, जिन्हें बने एक साल से  ज्यादा हो गया है, फिर भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। कीमत कम करने से लोग बड़ी संख्या में मकान लेने के लिए आगे आने की उम्मीद है और इससे बोर्ड को कर्ज से उबरने में भी मदद मिलेगी। कुछ इसी तरह आरडीए को भी कर्ज से उबारने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। 

 कमल विहार और अन्य संपत्तियों को बेचकर कर्जे से बाहर निकलने की कोशिश हो रही है। रायपुर विकास प्राधिकरण की माली हालात खराब है। कमल विहार के कारण खराब हुई माली हालत के कारण रायपुर विकास प्राधिकरण कोई नई योजना पर काम ही नहीं कर रहा है। बहरहाल, कर्ज मुक्ति के उपायों के बाद दोनों संस्थाओं को एक कर नया स्वरूप दिया जा सकता है। 

आरडीए-हाऊसिंग बोर्ड में  अनियमितता की पड़ताल...
सरकार आरडीए और हाऊसिंग बोर्ड व नया रायपुर में अनियमितता पर सख्ती दिखाई है। फिलहाल डिटेल ऑडिट कराकर आय-व्यय की विस्तृत जानकारी ली जा रही है। ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद अनियमितता के प्रकरणों पर कार्रवाई की जाएगी।

Related Post

Comments