विचार / लेख

सोशल मीडिया और राष्ट्रवाद
सोशल मीडिया और राष्ट्रवाद
Date : 07-Oct-2019

गिरीश मालवीय

राष्ट्रवाद की ऐसी अफीम चटाई जा रही है कि क्या पढ़ा-लिखा और क्या अनपढ़, हर आदमी बेसुध है। कभी न कभी तो यह नशा उतरेगा ही लेकिन तब हमारे पास बचा लेने को कुछ नही बचेगा।

सोशल मीडिया में इन दिनों केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की एक लेडी कांस्टेबल का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में यह महिला कांस्टेबल भारत के टुकड़े-टुकड़े जैसे नारे लगाने वालों और आतंकियों के एनकाउंटर पर मानवाधिकार का रोना रोने वालों के खिलाफ अपनी भावनाएं बेहद जोशीले अंदाज में व्यक्त कर रही हैं।

दरअसल 27 सितम्बर को दिल्ली में आईटीबीपी ने डिबेट का आयोजन किया था। टॉपिक था कि क्या मानवाधिकार का पालन करते हुए आतंकवाद से निपटा जा सकता है? कांस्टेबल खुशबू ने इस टॉपिक के विरोध में अपनी बात रखी।

खुशबू बेहद जोशीले अंदाज में वीडियो में यह भी कहते दिख रही हैं कि जब सीमा पर जवान शहीद होता है तो कोई मानवाधिकार की दुहाई नहीं देता लेकिन जब जेएनयू में भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगते हैं तो सब उनके साथ खड़े हो जाते हैं। इसी कड़ी में वह जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया पर आगे कहती हैं उठो देश के वीर जवानों..तुम सिंह सी दहाड़ दो, और एक तिरंगा झंडा उस कन्हैया के सीने में गाड़ दो।

अब इसी खबर के बरअक्स मुझे एक और खबर याद आई जिसे न मीडिया ने दिखाया और न जिसकी सोशल मीडिया पर ही ज्यादा चर्चा हुई खबर यह थी कि  सीआरपीएफ  कर्मियों के राशन भत्ते पर सरकार की कैंची चली है। सरकार की ओर से एक सूचना जारी कर कहा गया है कि सितम्बर में मंथली सैलरी में मिलने वाला उनका राशन अलाऊंस नहीं मिलेगा। सीआरपीएफ कर्मी हर महीने &,000 रुपए के इस भत्ते का इस्तेमाल कैंटीन और मैस से खाना खरीदने में करते हैं।

‘द टैलीग्राफ’ की खबर के मुताबिक बार-बार रिमाइंडर के बावजूद गृह मंत्रालय ने जुलाई, अगस्त और सितम्बर के राशन भत्ते के लिए जरूरी 800 करोड़ रुपए जारी नहीं किए हैं। सीआरपीएफ ने 22 जुलाई, 8 अगस्त और 9 सितम्बर को भेजी सूचना में गृह मंत्रालय से 800 करोड़ रुपए का अतिरिक्त फंड मांगा था ताकि सैलरी के साथ इसे दिया जा सके लेकिन गृह मंत्रालय की ओर से यह अतिरिक्त बजट नहीं आया है। लिहाजा सितम्बर 2019 से राशन अलाऊंस का पैसा नहीं दिया जा सकेगा।

कोई चर्चा नहीं हुई इस पर ओर अब सीआरपीएफ के ही एक कैडेट का ऐसा जोशीला वीडियो आ जाता है जो खूब चर्चा में है अब सीआरपीएफ का जवान कन्हैया की छाती पर झंडा गाडऩे में ज्यादा इंटरेस्टेड है उसे कोई फिक्र नहीं है कि उसे अब कभी &000 का मंथली राशन एलाउंस मिले या न मिले?

राष्ट्रवाद की ऐसी अफीम चटाई जा रही है कि क्या पढ़ा-लिखा और क्या अनपढ़, हर आदमी बेसुध है। कभी न कभी तो यह नशा उतरेगा ही लेकिन तब हमारे पास बचा लेने को कुछ नही बचेगा।

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