विचार / लेख

 बहुत अश्लील है, यह सब
बहुत अश्लील है, यह सब
Date : 07-Oct-2019

दिनेश राय द्विवेदी

बच्चे जिन में ज्यादातर लड़कियां हैं, जो लड़कियां कुछ बड़ी हैं 10-11 बरस की, उनके साथ उनके छोटे भाई हैं। शायद उन के मां-बाप ने उनकी यौन सुरक्षा के लिए साथ भेज दिए हों। सुबह साढ़े सात बजे से ही कॉलोनी में चक्कर लगा रहे हैं। वे आवाज लगा रहे हैं - आंटीजी कन्या जिमा रहे हैं क्या?  ये बच्चे कल अष्टमी को भी दोपहर 12 बजे तक घूमते रहे। मेरे अपार्टमेंट में भी किसी ने उन्हें बुला लिया। वे पूरी बिल्डिंग में दौड़ते रहे। खेलने की उम्र है तो सारी बाधाएं टूट जाती हैं। वे किसी भी फ्लैट की घंटी बजाते हैं और नीचे से ऊपर चढ़ जाते हैं। फ्लैट वाला दरवाजा खोलता है तो कोई नजर नहीं आता। बच्चों के लिए यह खेल हैं।

अचानक कोई स्त्री उन्हें हां कह देती है। वे वहीं रुक जाते हैं। इंतजार करते हैं कि कब उन्हें भोजन और दक्षिणा में रुपए दिए जाते हैं। उन्हें भोजन में अधिक रुचि नहीं है, उन्हें कुछ नकदी चाहिए जिसका वे इच्छानुसार उपयोग करते है, पेट तो सुबह एक-दो जगह से मिले भोजन से भर ही गया है। कुछ अच्छा भोजन उन्होंने परिवार वालों के लिए भी अपने-अपने झोलों में इक_ा कर लिया है।

क्या है, यह सब? हम अष्टमी-नवमीं को कन्याओं को जिमा रहे हैं। यहां तो उनकी जाति भी कोई नहीं पूछ रहा है। हाँ, लोग ये जरूर देख रहे हैं कि उनमें कोई मुसलमान तो नहीं है। चूंकि अधिकांश बच्चे दलित या आदिवासी हैं, तो उन्हें घर के दालान में ही निपटाया जा रहा है। स्त्रियां उन्हें भोजन, माथे पर तिलक लगा दक्षिणा दे रही हैं, उनके पैर छू रही हैं। कल से इन बच्चों में से कोई उन्हें रास्ते चलते छू भी देगा तो बीस गालियां देंगी और बुरी तरह डांटेंगी, संभव हुआ तो हलकी -फुलकी पिटाई भी लगा देंगी। नहीं तो उनके साथ के मर्द तो यह जरूर कर देंगे।

हम अष्टमी और मातृ पूजा के बहाने एक बड़ी आबादी को भिखारी बन जाने कीा ट्रेनिंग दे रहे हैं। आपको यह सब बहुत अश्लील नहीं लगता?

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