विशेष रिपोर्ट

पत्थलगांव-ठाकुरपोड़ी में आए 11 हाथी, कॉलर आईडी से मिल रही जानकारी
पत्थलगांव-ठाकुरपोड़ी में आए 11 हाथी, कॉलर आईडी से मिल रही जानकारी
Date : 15-Sep-2019

पत्थलगांव-ठाकुरपोड़ी में आए 11 हाथी, कॉलर आईडी से मिल रही जानकारी

जितेन्द्र गुप्ता

छत्तीसगढ़ संवाददाता
पत्थलगांव, 15 सितंबर। 
वन मण्डल कापु से शनिवार सुबह 4 बजे हाथियों का दल पत्थलगांव से 7 किलोमीटर की दूरी में स्थित ग्राम ठाकुरपोड़ी के कक्ष क्रमांक पी 991 पहुंचा जिसकी सूचना पत्थलगांव वनमंडल के अधिकारियों को भी मिली एवं आसपास के गाँव वालों को एहतियात के तौर पर सतर्क करते हुए फारेस्ट की टीम को हाथियों पर नजर रखने कहा। पत्थलगांव के एसडीओ के साथ सभी स्टॉफ लगे हुए हैं। वहीं 11 हाथियों के दल में एक गौतमी हाथी भी है जो फीमेल है। उसके गले में कॉलर आईडी लगी हुई है। जिससे वह विभाग के अधिकारियों को सेटेलाईट के द्वारा हर छ: घंटे में सूचना प्राप्त होती रहती है। हाथियों के दल में निगरानी करने में वन विभाग को काफी आसानी हो जाती है। 

 मुख्य बातें जैसे ही गौतमी हाथी दल के पत्थलगांव में आने की खबर लगी तो पत्थलगांव एसडीओ आर.आर. पैकरा ने अंकित कुमार एवं उनके दो सहयोगियों के साथ हमारे संवाददाता जितेंद्र गुप्ता को साथ लेकर ग्राम ठाकुरपोड़ी  में आये गौतमी हाथी के दल को देखने निकल गए। अंकित कुमार का परिचय बता दें ये केंद्र सरकार से डेपुटेशन में छतीसगढ़ तीन साल के लिए आये हैं। ये हाथी के विशेषज्ञ है। इनका काम है हाथियों के आने-जाने के रास्तों से लेकर उनके फोटो लेकर डाटा कलेक्ट करना जिससे उन्हें हाथियों के बारे में रिसर्च किया जा सके। अंकित कुमार एवं इनकी पूरी टीम ने ही वर्ष 2018 जून में सरगुजा के मैनपाट में गौतमी हाथी को बेहोश कर उसके गले में कॉलर आईडी लगाई थी। कॉलर आईडी लगाने वाली टीम  के मुख्य हिस्सा रहे हैं। 

रास्ते में हमारे संवाददाता को उन्होंने बताया कि अभी पूरे छतीसगढ़ में हाथियों के 6 दल में रेडियो कॉलर आईडी लगाई गई थी जिसमें से 3 कॉलर आईडी खराब हो गई है। वर्तमान में तीन दल जिसमें एक गौतमी दल, एक गणेश दल एवं एक प्यारे दल में रेडियो कॉलर आईडी लगी हुई है जिससे इन तीनों दलों के लोकेशन की जानकारी हमें हर 6 घंटे में प्राप्त होती रहती है। कुछ 20 मिनट के सफर के बाद हम ठाकुरपोड़ी पहुँच गए और सड़क से लगभग एक से दो किलोमीटर अंदर खेत से लगी हुई काफी पेड़ों के बीच हाथियों के दल अपने खाने-पीने के लिए जद्दोजहद कर रही थी, वहीं कुछ दूर में ही गाँव के लगभग 500 से 700 आदमी इन हाथियों को देखने पहुंचे हुए थे। उन सभी को हाथियों से काफी दूर रहने कहा गया था।

उस समय 5 बजकर 35 मिनट हो रहे थे एक से डेढ़ घंटे में अँधेरा होने को था और अँधेरा होने पर उन  हाथियों को ढूंढना इतना आसान नहीं इसलिए जल्दी-जल्दी हाथी के विशेषज्ञअंकित एवं उनके दो सहयोगियों के साथ हमारे संवाददाता जितेंद्र गुप्ता साथ गये। हाथी से करीब 70 से 80 मीटर की दूरी  में उन्होंने हमारे संवाददाता को रोककर इससे ज्यादा नजदीक जाने से मना कर दिया एवं उनके ंसाथ आये हाथियों के जानकार सहयोगी में से एक व्यक्ति को मेरे साथ रहने कहकर अंकित एवं एक महावत हाथी के काफी नजदीक लगभग 50 मीटर तक पहुंचकर पेड़ की ओट से अपने लाये कैमरे से हाथियों के फोटो लिए। लगभग 30 से 40 फोटो अलग-अलग एंगल से लेकर जिसमें गौतमी हाथी भी थी उनके कई फ़ोटो लिए खासकर रेडियो कॉलर आईडी लगी गौतमी हाथी के काफी फोटो लिए लगभग 40 से 60 मिनट के बाद अँधेरा हो ही गया और फिर हम सभी को वहां से वापस लौटना पड़ा। 

 हाथियों के विशेषज्ञ अंकित कुमार ने बताया वो इतनी दूर से आए ही इसीलिए थे की गौतमी हाथी एवं उस दल का फोटो ले सकंू जिससे गौतमी हाथी लगे रेडियो कॉलर आईडी के सही लगे होने एवं उन सभी हाथियों के बारे में कई जानकारी को एकत्रित कर सकंू। गौतमी हाथी के लगे कॉलर आईडी के बारे में बताया कि उसमें हमेशा नजर रखी जाती है कि उसके लगे होने से हाथी को कोई नुकसान तो नहीं हो रहा है। उसमें बैटरी लगी हुई है। उस बैटरी की उम्र 6 साल है। हमें 6 साल तक जानकारी मिलती रहेगी। उन्होंने हाथियों के बारे में कई अहम जानकारी दिया जिसमें उन्होंने कहा कि हमारे छतीसगढ़ में छोटे छोटे जंगल होने के कारण इन हाथियों को यहां वहां भटकना पड़ता है। जंगलों का कम होना जंगलों के आसपास घर बनाकर रहते लोगों बिजली की बड़ी लाईनों के जंगलों के पास से गुजरना एवं जंगलों में सड़क बनाने जैसी बातों के चलते हाथियों के जंगल बंटते जा रहे हंै। वे जंगल का एरिया छोटा होने के कारण हाथियों को काफी मुश्किलें हो रही है।  उन्हें खाने पीने के लिए पर्याप्त मात्रा में भोजन जंगलों में उपलब्ध नहीं हो रहे है एवं उन जंगलों में भी लोगों का आना-जाना बना रहता है जिससे हाथियों को इधर-उधर भागना पड़ता है। हाथी हिंसक नहीं होते हैं। उन्हें परेशान करने की वजह से वे आक्रामक हो जाते हैं। इसलिए इन हाथियों से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।

हाथियों के नजदीक कभी भी नहीं जाना चाहिए। ज्यादा नजदीक जाने पर ही ये हाथी लोगों के ऊपर हमला कर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि हाथी से काफी दूरी बना कर रहे। इस गौतमी दल के बारे में अपने लैपटॉप से जानकारी निकालकर उन्होंने बताया कि पिछले साल भी ये दल यहीं से गुजरा है एवं हो सकता है कि बगल के कुनकुरी जंगल तक जाए क्योंकि पिछले वर्ष लगभग एक हफ्ते तक ये दल कुनकुरी के जंगलों में बिताया था। हाथी जहां-जहां जाते हंै। वो जगह इनके घूमने की जगह बन जाती है। जहां-जहां हाथी कभी भी जाते हैं उन जगहों में हाथी वापस आ सकते है। संभावना ये भी रहती है कि हाथी के दल की स्थिति के अनुसार वे अपने रहने एवं उस जगह से दूर चलने की सोचते हं।  जिसमें महिला हाथियों के प्रेग्नेंट होने एवं बच्चे देने के कारण कुछ दिन वो दल रूक भी जाते हैं। अभी इस दल में तीन हाथियों में दांत है। तीन छोटे-छोटे बच्चे भी साथ है। कुल मिलाकर 11 हाथी विचरण कर रहे हैं।

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