संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 16 अगस्त : मुख्यमंत्री की घोषणाएं और  उन पर अमल की चुनौतियां
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 16 अगस्त : मुख्यमंत्री की घोषणाएं और उन पर अमल की चुनौतियां
Date : 16-Aug-2019

अपने पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक नए जिले, और 25 नई तहसीलें बनाने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने एसटी, एससी, और ओबीसी के आरक्षण के नए पैमानों की घोषणा भी की है। जिन लोगों को सरकारी नौकरियों, और स्कूल-कॉलेज के दाखिले में आरक्षण का लाभ पाने की जरूरत होती है, वे इसके महत्व को अधिक समझ सकते हैं। इसके साथ-साथ नई तहसीलों से लोगों की जिंदगी में क्या फर्क पड़ सकता है इसे भी वे लोग जान सकते हैं जो अपने गांव-कस्बे से दूर की तहसील पर अब तक जाते रहे हैं, उन्हें तहसील पास आने से दिक्कतों में बड़ी कमी आना तय है। यह एक अलग बात है कि आज प्रदेश की तहसीलों में आम जनता के कामकाज में पिछली सरकार के समय से चले आ रहा ढर्रा जारी है, और उसे सुधारे बिना महज तहसीलें बना देने से बहुत अधिक फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन किसी जलसे की घोषणाओं में सेवाओं में बेहतरी को नहीं गिनाया जाता, सिर्फ नई बातों को, नई मंजूरी और नए निर्माण को गिनाया जाता है, इस हिसाब से 15 अगस्त का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का यह भाषण इंसानों और पालतू, बेसहारा पशुओं के लिए कई किस्म की नई मदद लेकर आया है, और इस पर अमल पर मेहनत अगर होगी, तो प्रदेश के दसियों लाख लोगों की जिंदगी पर एक बड़ा असर पड़ सकता है। 

कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के पहले से अपना ग्रामीण और खेतिहर रूझान चुनाव प्रचार के दौरान ही खुलकर सामने रख दिया था, और सत्ता में आने के बाद रफ्तार से कर्जमाफी की गई, धान के दाम को बढ़ाया गया, और धान बोनस दिया गया। इन तीनों बातों से प्रदेश की आधी आबादी पर सीधा असर पड़ा, और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का पहिया इससे उस वक्त भी घूमते रहा जब पूरे देश में ऑटोमोबाइल के पहिये थम से गए थे। बाजार का एक अंदाज बताता है कि जब पूरे देश में गाडिय़ों की बिक्री एक चौथाई घट गई थी, तब भी छत्तीसगढ़ में उस मंदी का असर नहीं पड़ा क्योंकि यहां किसान और आम लोगों के हाथ में सरकार से ताजा-ताजा मिला हुआ फायदा था, और पिछले महीनों में छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था बाकी देश की मंदी के मुकाबले कम प्रभावित रही। मुख्यमंत्री ने पिछले महीनों में राज्य सरकार की कई घोषणाओं पर अमल का ठोस ढांचा इस भाषण में गिनाया है, और राशन के पैमानों को शिथिल करते हुए अधिक चावल देने के साथ-साथ कुछ और चीजें भी कुछ इलाकों को देना शुरू किया है। 

आज जब छत्तीसगढ़ में विधानसभा और लोकसभा दोनों चुनाव निपट गए हैं, तो सरकार इन बड़े चुनावों के दबाव से तो मुक्त है, लेकिन अभी नगरीय संस्थाओं और पंचायतों के चुनाव सामने हैं। ऐसे में महज यह जरूरी नहीं है कि विधानसभा की चुनावी घोषणाओं को लागू किया जाए, बल्कि यह भी जरूरी है कि नई नीतियों और कार्यक्रमों पर अमल को असरदार बनाया जाए। सरकार के बहुत से विभाग पिछले लंबे समय से एक अलग रफ्तार से काम करते आ रहे थे, और गले-गले भ्रष्टाचार में भी डूबे हुए थे। ऐसी हालत में मुख्यमंत्री ने यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम की घोषणा तो कर दी है, लेकिन सरकारी स्वास्थ्य सेवा के ढांचे का जो हाल है, उसे देखते हुए इस बात में गहरा संदेह खड़ा है कि क्या यह घोषणा पूरी हो पाएगी? कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए कई महीने हो गए हैं, लेकिन सरकारी इलाज का हाल अभी मानो रमन सरकार के मातहत ही चल रहा है। 

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर यह गिनाया है कि स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए दो दशक बाद 15 हजार नियमित शिक्षकों की भर्ती की जा रही है। सरकार को यह भी ध्यान रखना होगा कि सरकारी नौकरियों में नियुक्ति का मामला कई राज्यों में उनके सबसे बड़े भ्रष्टाचार की वजह रहा है। छत्तीसगढ़ में ईमानदारी और पारदर्शिता से ये नियुक्तियां होनी चाहिए, और न सिर्फ शिक्षकों की नियुक्ति में, बल्कि सरकार की तमाम नौकरियों में राज्य सरकार को लोगों को समान अवसर देने की फिक्र करनी चाहिए, और चयन में होने वाले भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू से निगरानी भी रखनी चाहिए। इसी भाषण में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कुपोषण के शिकार बच्चों, और एनीमिया की शिकार माताओं का जिक्र किया है जिनके लिए पोषण आहार देने की शुरुआत की जा रही है, और यह शुरुआत गांधी जयंती से बढ़कर पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगी। मुख्यमंत्री की और भी घोषणाएं हैं जो कि सरकार का एक ग्रामीण नजरिया सामने रखती हैं, लेकिन इन पर अमल खासा मुश्किल हो जाता है, और उस मोर्चे पर अधिक मेहनत करने की जरूरत है। आज सरकार का नजरिया किसान, ग्रामीण, गरीब, मजदूर, दलित-आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, कुपोषित मां-बच्चों के लिए हमदर्दी का दिख रहा है और चुनावी घोषणापत्र के वक्त से चले आ रहे इसी नजरिये ने राज्य में कांग्रेस को इतने बहुमत से आने में मदद की थी। अब यह नजरिया ठोस योजनाओं की शक्ल में सामने आ गया है, और इस पर अमल की कामयाबी या नाकामयाबी नगरीय-पंचायत चुनावों में नतीजों की शक्ल में साबित होगी। इसलिए राज्य सरकार को खासी मेहनत करने की जरूरत है। 
-सुनील कुमार

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