विशेष रिपोर्ट

बीजापुर, कुपोषण की मार, बीजापुर में 36 फीसदी बच्चे जद में, करोड़ों खर्च पर, साल दर साल बढ़ रहा आंकड़ा
बीजापुर, कुपोषण की मार, बीजापुर में 36 फीसदी बच्चे जद में, करोड़ों खर्च पर, साल दर साल बढ़ रहा आंकड़ा
Date : 05-Aug-2019

कुपोषण की मार, बीजापुर में 36 फीसदी बच्चे जद में, करोड़ों खर्च पर, साल दर साल बढ़ रहा आंकड़ा

मोहम्मद ताहीर खान

बीजापुर, 5 अगस्त (छत्तीसगढ़)। बीजापुर की स्थिति कुपोषण के मामले में बेहद ही दयनीय है। यहां 36 फीसदी बच्चे अब भी कुपोषण की जद में है। जिले में  27886 नौनिहालों में से 10732 बच्चे यानि कि 36 फीसद बच्चे कुपोषण जैसी गंभीर बीमारी का दंश झेल रहे हैं। कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार द्धारा करोड़ों रूपये फूंके जाने के बाद भी इसमें में कोई सुधार नहीं आ सका है बल्कि स्थिति और भी भयावह हुई है।

बीजापुर जिला न केवल नक्सलवाद से बल्कि कुपोषण जैसी गंभीर बीमारी का भी दंश झेलने को मजबूर है। यहां 0 से 5 वर्ष के 27886 बच्चों में से 10732 बच्चे कुपोषण से ग्रसित है। जिसमें से 3633 बच्चे ऐसे हैं जो गंभीर रूप से कुपोषण के शिकार हैं। कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए जिले के कोने कोने में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 1090 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित किये जा रहे हैं। यहां संचालित अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति भी बहुत ज्यादा बेहतर नहीं है। 1090 आंगनबाडी केद्रों में से 348 आंगनबाडी केन्द्र तो ऐसे हैं जो किराये के मकान या फिर झोपडिय़ों में संचालित हैं।  इस तरह कुपोषण से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से जिन आंगनबाडिय़ों का संचालन सरकार द्वारा किया जा रहा है उन्हे ही पोषण की जरूरत है।  

पिछले कुछ सालों से  कुपोषण का ये आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 2014 में 7078 बच्चे कुपोषित पाये गये। साल  2015 में ये आंकड़ा बढक़र 10868 के पास पहुंच गया। जबकि 2016 में 10600 बच्चे कुपोषण के शिकार पाये। तो वहीं 2017 में 10160 बच्चे कुपोषित पाये गये।  

वर्ष 2018 में 3633 बच्चे ऐसे पाये गये जो कुपोषण से गंभीर रूप से बीमार थे। ऐसे बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्रों में लाकर 15 दिनों तक डायटिशिन की निगरानी में  पौष्टिक आहार खिलाकर सुपोषित किया जाता है। जिले में इस वक्त स्वास्थ्य विभाग द्वारा 4 पोषण पुनर्वास केन्द्र संचालित किये जा रहे है। इन पोषण पुनर्वास केन्द्रों में साल 2018 में केवल 558 बच्चे ही सुपोषित हो पाये हैं। और इस साल के 7 महीनों में केवल 135 बच्चे ही सुपोषित हो पाये हैं।

इस मामले को लेकर सीएमएचओ डॉक्टर बीआर पुजारी का कहना है कि अभी स्वास्थ्य विभाग द्वारा चार पोषण पुनर्वास केंद्र( एनआरसी)चलाया जा रहा है। बीजापुर ,भोपालपटनम में दस-दस तथा भैरमगढ़ व उसूर में पांच पांच बैड के केंद्र चल रहे है। डॉक्टर पुजारी ने बताया कि उन्हें आईसीडीएस से जो आंकड़े मिले है। उनके मुताबिक 3 हज़ार 500 सौ बच्चों को एनआरसी में भर्ती करने की जरूरत हैं। उन्होंने बताया कि इसमें गंभीर कुपोषित बच्चों को 15 दिनों तक डायटीशियन डॉक्टरों की देख रेख में भर्ती किया जाता है। दिन में आठ टाइम उन्हें स्पेशल टाइड दिया जाता है। श्री पुजारी के मुताबिक अभी गंगालूर में भी एक एनआरसी खोलने पर विचार चल रहा है। ताकि उस क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिल सके।

 

 

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