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दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 24 जून : छोटी गलती, या गलत काम, बड़ी सजा और बड़ी नसीहत
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 24 जून : छोटी गलती, या गलत काम, बड़ी सजा और बड़ी नसीहत
Date : 24-Jun-2019

भारत की सरकारी एयरलाइंस एयर इंडिया की एक खबर है कि उसके एक सीनियर पायलट को सस्पेंड करके उसके खिलाफ जांच शुरू की गई है क्योंकि उस पर यह आरोप है कि ऑस्ट्रेलिया के सिडनी एयरपोर्ट पर एक दुकान से सामान चुरा लिया था। पायलट का कहना है कि वे खुशी की एक खबर के बीच एक तोहफा खरीदने गए थे और भुगतान करना भूल गए, हड़बड़ी में विमान उड़ाकर भारत आ गए। उनका कहना है कि उन्हें हिंदुस्तान से फोन पर यह खबर मिली कि वे दादा बन गए हैं, और वे अपनी बहू के लिए उपहार लेने गए थे।

यह बात सही हो सकती है कि उन्होंने इरादतन चोरी न की हो और हड़बड़ी में, खुशी में वे बिना भुगतान सामान लेकर निकल गए हों। लेकिन दूसरी तरफ यह जरूरी नहीं है कि वे मोटी तनख्वाह पाने वाले सीनियर पायलट थे, और वे भला चोरी क्यों करते। पैसे वालों लोगों में भी दुकानों से चोरी की आदत पाई जाती है, और अरबपति परिवारों से  सरकारी नौकरी में आने वाले लोग भी छोटे-बड़े सभी किस्म के भ्रष्टाचार करते मिलते हैं। लेकिन यह खबर सभी लोगों के लिए एक नसीहत देने वाली है, और उसी लिए हम यहां इस पर लिख रहे हैं। गलती हो, या गलत काम, अधिकतर मामलों में दोनों को ही सजा का हकदार पाया जाता है। सजा देते हुए उसने कमी-बढ़ोत्तरी हो सकती है, लेकिन सजा तो मिलती ही है। ऐसे में लोगों को जिंदगी के हर दायरे में एक बड़ी समझदारी और सावधानी रखनी चाहिए। 

हिंदुस्तान में दलितों और आदिवासियों के सम्मान की सुरक्षा के लिए कुछ खास कानून बनाए गए हैं जिनके तहत किसी दलित आदिवासी को उनके जातिसूचक उल्लेख का इस्तेमाल अगर अपमानजनक तरीके से किया जाता है, तो वह सजा के लायक जुर्म है। कानून कड़ा है, बचाव मुश्किल है। इस कानून की बाकी बारीकियों पर भी ध्यान देना चाहिए जिसमें कहा गया है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को घूरकर देखना भी उनका अपमान है। जब तक देश में जो कानून लागू है लोगों को उसके प्रति सावधान रहना चाहिए, क्योंकि एक छोटी सी गलती, या छोटा सा गलत काम भी लोगों को बड़ी लंबी तकलीफ में डाल सकता है।

हिंदुस्तान ही नहीं दुनिया के अधिकतर सभ्य देशों में कामकाजी महिला की सुरक्षा के लिए बड़े कड़े कानून हैं। हिंदुस्तान में हाल ही के बरसों में महिलाओं ने हौसला जुटाकर शिकायतें करना शुरू भी किया है, और पिछली केंद्र सरकार के एक मंत्री, और अपने वक्त के देश के सबसे नामीगिरामी संपादक एम.जे. अकबर ऐसी कई तोहमतों को झेलते हुए आज मानहानि का मुकदमा दायर करके अदालत में हैं, मंत्री का पद छोड़ देना पड़ा है, सामाजिक साख मिट्टी में मिल गई है। उनके खिलाफ जितनी शिकायतें हैं उसने यह अंदाज लगता है कि उन्होंने कोई गलती नहीं की, बल्कि गलत काम किया है, और यह एक लंबी सजा का मामला भी बन सकता है।

चूंकि बात गलतियों की भी हो रही है, इसलिए लोगों को यह भी याद रखना चाहिए कि देश में बाल मजदूरी के खिलाफ किस तरह का कानून है। आमतौर पर लोग घरों में बच्चों को खिलाने के लिए छोटी लड़कियों को काम पर रख लेते हैं या दफ्तर-दुकान पर चाय पिलाने के लिए छोटे लड़कों को रख लेते हैं। यह सिलसिला गैरकानूनी है, और खासा खतरनाक हो सकता है अगर कोई इसकी शिकायत कर दे, पड़ोस के लोग पीछे लग जाएं, या ऐसे बाल मजदूर के साथ कोई हादसा हो जाए। इसलिए लोगों को ऐसी गलती या गलत काम से भी दूर रहना चाहिए। 

इन दिनों लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं कि शादी का वायदा करके शारीरिक संबंध बनाए, और फिर शादी से मुकर गए तो उसके खिलाफ बलात्कार का जुर्म दर्ज हो गया। हमारी अपनी सोच बलात्कार की ऐसी परिभाषा नहीं मानती, और हम इसके खिलाफ कई बार लिख चुके हैं कि यह एक वायदाखिलाफी हो सकती है, लेकिन यह बलात्कार नहीं कहा जा सकता। लेकिन हमारे कहने से परे देश का कानून अलग है, और लोगों को उसे ध्यान में रखकर ही रिश्ते बनाने चाहिए।
एक अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में सीनियर पायलट की एक छोटी सी चूक उसकी बाकी जिंदगी किस कदर बर्बाद कर सकती है, यह लोगों को एक बड़ी नसीहत रहना चाहिए।
-सुनील कुमार

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