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क्या था मैडम कामा का देश के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान
24-Sep-2021 11:48 AM (69)
क्या था मैडम कामा का देश के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बहुत से क्रांतिकारियों को योगदान है जिनका कभी जिक्र ठीक ढंग से नहीं किया है. या तो हम गांधीजी और कांग्रेस से जुड़े नेताओं को जानते हैं या फिर अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाने वाले कुछ क्रांतिकारियों को. इनके अलावा भी बहुत सारे लोग ऐसे थे जिन्होंने देश की आजादी के लिए बड़े काम किए हैं. इन्हीं में से एक हैं मैडम भीकाजी रुस्तम कामा जो विदेश में भारत का झंडा फहराने वाली पहली महिला के रूप में जानी जाती हैं.  लेकिन देश के लिए उनका योगदान इससे कहीं ज्यादा रहा था.

भीकाजी कामा मुंबई के संपन्न पारसी परिवार में 24 सितंबर 1861 को पैदा हुई थीं. कई भाषाओं में पारंगत भीकाजी का विवाह रुस्तम कामा के साथ हुआ था. शादी के बाद भीकाजी ने अपना ज्यादातर समय समाज सेवा और जनकल्याण की गतिविधियों में बिताया था. 1896 में बंबई प्रेसिजेंसी में आए आकाल और उसके बाद प्लेग के दौरन भीकाजी ने लोगों की बहुत सहायता की और खुद भी प्लेग से ग्रसित हो गई थीं.

ब्रिटेन में राष्ट्रवाद की ओर
इलाज के लिए उन्होंने 1902 में ब्रिटेन भेज दिया गया था. लंदन में वे श्यामजी कृष्ण वर्मा और फिर दादाभाई नौरोजी से मिली जिसके बाद वे होम रूल सोसाइटी की सहयोगी बन गईं. लंदन में ही उनसे अंग्रेज सरकार ने इस शर्त पर उनकी वापसी तय की वे लिखित दस्तावेज पर हस्ताक्षर करें कि भारत लौटकर वे राष्ट्रवादी गतिविधियों में भाग नहीं लेंगी. ऐसे करने से उन्होंने इनकार कर दिया.

यूरोप में भारत के लिए क्रांतिकारी प्रचार
1905 में वे पेरिस चली गईं, जहां उन्हें पेरिस इंडिया सोसाइटी की स्थापना की. इसके बाद उन्होंने यूरोप में कई क्रांतिकारी लेखों को प्रचारित किया जिसमें वंदेमातरम गीत भी शामिल था. बताया जाता है कि  उनके लेख भारत में तस्करी के जरिए पोंडीचेरी तक पहुंचते थे.

जर्मनी में भारत का झंडा
भीकाजी कामा को जर्मनी के स्टुटगार्ट में हुई दूसरी इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस में आमंत्रित किया गया. बताया जाता है कि इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस में हिस्सा लेने वाले सभी देशों का झंडा लगा हुआ था. भारत के लिए ब्रिटिश झंडा लगा था. मैडम भीकाजी कामा को ये मंजूर नहीं था. उन्होंने एक नया झंडा बनाया और सभा में फहराया. वे पहली भारतीय महिला बनीं जिसने विदेशी सरजमी पर सबसे पहले भारत का झंडा फहराया था.

ओजस्वी भाषण में भारत की आजादी की बात
इस सभा में मैडम कामा ने भारत में सूखे से उत्पन्न हुई भयावह स्थिति को दुनिया के सामने रखा. इसके अलवा उन्होंने भारत में मानव अधिकारों के अलावा ब्रितानी हुकूमत से स्वायत्ता की भी मांग की.  मैडम कामा का फहाराया गया झंडा भारत के वर्तमान झंडे से बहुत अलग था, इसमें हरे, पीले और लाल रंग की तीन पट्टियां थीं. सबसे ऊपर हरा रंग था, जिसपर 8 कमल के फूल बने हुए थे. ये आठ फूल उस वक्त भारत के 8 प्रांतों को दर्शाते थे. बीच में पीले रंग की पट्टी थी. पीली पट्टी पर वंदे मातरम लिखा था.

जारी रहा काम
इसके बाद मैडम Fमा ने बहुत यात्राएं की जिसमें अमेरिका और मिस्र की यात्रा प्रमुख थी. लेकिन उनकी गतिविधियों के मुख्य केंद्र पेरिस ही रहा. प्रथम विश्व युद्ध के समय ब्रिटेन और फ्रांस एक हो गए. लेकिन फिर भी फ्रांस ने ब्रिटेन को कामा का प्रत्यर्पण नहीं किया. युद्ध के दौरान उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा ,लेकिन युद्ध के बाद वे पेरिस में अपने घर लौट आईं जहां वे 1935 तक रहीं.

इस बीच बहुत ही अधिक बीमार होने के कारण उन्होंने अंग्रेज सरकार से समझौता किया और भारत लौटने की शर्तों को मानने को तैयार हो गईं. इसके बाद वे नवंबर 1935 में बंबई आईं और उसके नौ महीने बाद 74 साल की उम्र में उन्होंने पारसी जनरल हॉस्पिटल में  13 अगस्त 1936 को अपने जीवन की अंतिम सांस ली. (news18.com)

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