राष्ट्रीय
'छत्तीसगसढ़' न्यूज़ डेस्क
पिछले कई दिनों से राजधानी दिल्ली की सीमा पर पंजाब, हरियाणा और कुछ दूसरे राज्य के किसानों का प्रदर्शन जारी है. ये किसान अध्यादेश के ज़रिए बनाए गए तीनों नए कृषि क़ानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.
इन किसानों ने बीते आठ दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया था जिसे करीब दो दर्जन विपक्षी राजनीतिक पार्टियों और विभिन्न किसान संगठनों का समर्थन मिला था.
इस प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच कई राउंड की बातचीत हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. किसान संगठनों के कुछ प्रतिनिधियों से गृहमंत्री अमित शाह की मुलाक़ात से भी कोई रास्ता नहीं निकला.

नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर जमे किसान कड़ाके की ठंड में भी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद किए हुए हैं। अब तक हुई वार्ताओं के बाद भी किसान और सरकार के बीच मामला सुलझ नहीं पाया है। ऐसे में आंदोलन खिंच रहा है।
इसी दौरान सिंघु बॉर्डर पर जमे किसानों के बीच एक न्यूजलेटर ट्रॉली टाइम्स की शुरुआत कुछ वॉलंटियर्स ने की है। सुरमीत मावी ने यह न्यूजलेटर शुरू किया है। समाचार एजेंसी एएनआई को मावी ने बताया कि यह न्यूजलेटर आंदोलन में अपनी हिस्सेदारी और अनुभव साझा करने का मंच है।
मावी ने बताया कि न्यूजलेटर की शुरुआत इसलिए भी की गई है ताकि आंदोलनरत किसानों के बीच किसी तरह की संवादहीनता और भ्रम की स्थिति न रहे। बीते दिनों किसान और सरकार के बीच वार्ता को लेकर भ्रम हो गया था।
इस अख़बार को निकलने की जरूरत इसलिए भी बताई गयी कि देश का बड़ा मीडिया इस आंदोलन के बारे में हकीकत नहीं बता रहा है, और किसान आंदोलन को कभी खालिस्तानी तो कभी पाकिस्तानी साबित कर रहा है.


