राष्ट्रीय
किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश जस्टिस शरद ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन करना किसानों का मौलिक अधिकार है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन को लेकर अदालत कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी. हालाँकि जस्टिस बोबडे ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन के तरीक़े को देखा जा सकता है. जस्टिस बोबडे ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन से आम लोगों को दिक़्क़त नहीं होनी चाहिए.
जस्टिस बोबडे ने कहा, ''कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करना किसानों का मौलिक अधिकार है और इसे रोका नहीं जा सकता. इसे ज़रूर देखा जा सकता है कि किसी की ज़िंदगी को कोई नुक़सान न हो. जब तक विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण और बिना कोई संपत्ति का नुक़सान पहुँचाए हो रहा है तब तक संवैधानिक है. अगर विरोध-प्रदर्शन का मक़सद हासिल करना है तो संवाद शुरू करना होगा. पुलिस इस बात को सुनिश्चित करे कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन में बल का इस्तेमाल न करे.'' (bbc.com)


