राष्ट्रीय
नई दिल्ली, 8 जून । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की पिछले 12 वर्षों की पहलों ने वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सेवा, आवास, नल से जल, स्वच्छ ईंधन और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं तक लोगों की पहुंच को कई गुना बढ़ाया है। यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यालय द्वारा सोमवार को जारी एक फैक्टशीट में दी गई। फैक्टशीट के अनुसार, देश भर में गरीबों के लिए खोले गए जन धन बैंक खातों की संख्या बढ़कर 58.15 करोड़ हो गई है। इन खातों में कुल जमा राशि भी बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, जो इस योजना की सफलता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए ये खाते दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय समावेशन अभियान के रूप में देखे जाते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, जन धन खातों में से 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम पर हैं। फैक्टशीट में कहा गया है कि जन धन योजना, आधार और मोबाइल को मिलाकर बनी "जेएएम ट्रिनिटी" ने देश में वित्तीय समावेशन को नई गति दी है। इस व्यवस्था के जरिए यह सुनिश्चित किया गया है कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रिसाव (लीकेज) के सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे। बयान में बताया गया कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत जारी आयुष्मान भारत कार्डों की संख्या 44 करोड़ तक पहुंच गई है।
यह योजना 12 करोड़ परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करती है, जो कि देश की तकरीबन 40 प्रतिशत आबादी को कवर करती है। इसके अलावा, मार्च 2024 में लगभग 37 लाख आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के परिवारों को भी इस योजना में शामिल किया गया। बाद में इस योजना का विस्तार करते हुए 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को भी इसमें शामिल किया गया। ये लाभार्थी लगभग 4.5 करोड़ परिवारों से आते हैं और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना उन्हें योजना का लाभ दिया गया है। फैक्टशीट के अनुसार, गरीब परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 15.7 करोड़ नल जल कनेक्शन दिए गए हैं। इसके अलावा, जीवन स्तर सुधारने के लिए 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है, जबकि सौभाग्य योजना के तहत 2.9 करोड़ घरों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को केवल बुनियादी ढांचा निर्माण से आगे बढ़ाकर सेवा वितरण आधारित बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसमें पेयजल प्रबंधन, सुशासन और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी पाइपलाइन-आधारित पेयजल आपूर्ति के लिए संस्थागत ढांचे को भी मजबूत किया जाएगा। जल जीवन मिशन में संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सरकार ने इसकी कुल लागत बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपए कर दी है। इसमें केंद्र सरकार की कुल सहायता 3.59 लाख करोड़ रुपए होगी, जो 2019-20 में स्वीकृत 2.08 लाख करोड़ रुपए से काफी अधिक है। इस तरह केंद्र की अतिरिक्त हिस्सेदारी 1.51 लाख करोड़ रुपए होगी। फैक्टशीट में यह भी बताया गया कि गरीब परिवारों को रसोई गैस उपलब्ध कराने के लिए 10 करोड़ एलपीजी कनेक्शन जारी किए गए हैं। इसके साथ ही मोदी सरकार की आवास योजना के तहत गरीब परिवारों के लिए 4 करोड़ पक्के मकानों का निर्माण भी किया गया है, जिससे लाखों परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आया है। -(आईएएनएस


