राष्ट्रीय

अक्षय तृतीया के अवसर पर मुंबादेवी मंदिर में आम्र महोत्सव की धूम, रसीले आमों से किया गया मां का शृंगार
19-Apr-2026 2:05 PM
अक्षय तृतीया के अवसर पर मुंबादेवी मंदिर में आम्र महोत्सव की धूम, रसीले आमों से किया गया मां का शृंगार

 मुंबई, 19 अप्रैल । देश भर के मंदिरों में अक्षय तृतीया के अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए पहुंच रही है। उत्तर से लेकर दक्षिण भारत में भगवान विष्णु और नरसिंह भगवान को चंदन के लेप से ठंडक प्रदान की जा रही है, तो वहीं मुंबई के प्रसिद्ध देवी मंदिर मुंबादेवी में आम महोत्सव पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। मुंबादेवी मंदिर में प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी आम महोत्सव मनाया जा रहा है। मुंबादेवी मंदिर के व्यवस्थापक हेमंत जाधव बताते हैं कि महाराष्ट्र में आम की पैदावार सबसे ज्यादा होती है। यहां का हापुस आम पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। मुंबादेवी महाराष्ट्र के लोगों की कुल देवी है। इसलिए आम उत्पादन करने वाले किसान अक्षय तृतीया के दिन अपने बगीचे का आम लाकर मां के चरणों में अर्पित करते हैं। किसानों, व्यापारियों, तथा देवी भक्तों द्वारा लाए गए आमों से मां का शृंगार किया जाता है।

उन्होंने आगे बताया कि आम का निर्यात करने वाले व्यापारी भी विदेशों में अपना माल भेजने से पहले मां के चरणों में अपने व्यापार की मंगल कामना करते हैं। इस वर्ष आज ही के दिन अक्षय तृतीया पड़ रही है। इस दिन भारी संख्या में देवी भक्त एकत्रित होकर इस आम महोत्सव का दर्शन कर अपने को भाग्यशाली मानते हैं। मुंबादेवी के नाम पर ही मुंबई का नाम रखा गया था। मां को मुंबई की रक्षिका के तौर पर पूजा जाता है। पहले यह मंदिर 1737 में मेंजिस नामक की जगह पर बना था, लेकिन बाद में अंग्रेजों के शासन में मंदिर को मरीन लाइन्स-पूर्व क्षेत्र में स्थापित कर दिया गया। मंदिर को 400 से अधिक सालों से पुराना बताया जाता है। मान्यता है कि मां की स्थापना मछुआरों ने की थी। मान्यता है कि मुंबादेवी मुंबई के समुद्र और पूरे शहर की रक्षा करती है। साथ ही यह भी मानते हैं कि मां के दर्शन मात्र से ही सारी परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है और भक्त की मुराद भी पूरी होती है। यही कारण है कि भक्त दूर-दूर से मां के दर्शन के लिए आते हैं। -(आईएएनएस)


अन्य पोस्ट