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बेंगलुरु, 23 जनवरी । कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य में बाइक टैक्सी सर्विस पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है। इस फैसले से ओला, उबर और अन्य ऐप आधारित कंपनियों को बड़ी राहत मिली है। अब बाइक को टैक्सी के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति मिल गई है, बशर्ते सभी कानूनी नियमों का पालन किया जाए। चीफ जस्टिस एनवी अंजारिया और जस्टिस केवी अराविंद की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने सिंगल जज के उस पुराने आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा बाइक टैक्सी पर लगाए गए बैन को सही ठहराया गया था। ओला, उबर और अन्य एग्रीगेटर कंपनियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत बाइक को कमर्शियल टैक्सी सर्विस के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, अगर उचित परमिट और लाइसेंस लिए जाएं। कोर्ट ने इन कंपनियों की दलील को सही ठहराते हुए कहा कि कानून में कोई रोक नहीं है कि बाइक को ट्रांसपोर्ट व्हीकल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि बाइक मालिकों या एग्रीगेटर कंपनियों को पहले ट्रांसपोर्ट विभाग से कमर्शियल परमिट के लिए आवेदन करना होगा। राज्य सरकार को मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुसार ऐसे आवेदनों पर विचार कर परमिट जारी करने होंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि सुरक्षा, बीमा और अन्य सभी नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। यह फैसला बेंगलुरु समेत पूरे कर्नाटक में लाखों यात्रियों और युवा राइडर्स के लिए राहत लेकर आया है। पिछले कुछ सालों से बाइक टैक्सी पर विवाद चल रहा था। 2022 में राज्य सरकार ने बाइक टैक्सी पर प्रतिबंध लगाया था, जिसके खिलाफ कंपनियों ने अदालत का रुख किया।
इस फैसले से बेंगलुरु की ट्रैफिक समस्या में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि बाइक टैक्सी छोटी दूरी की यात्रा के लिए तेज और सस्ता विकल्प साबित हो सकती है, हालांकि कई लोग सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, खासकर महिलाओं और बच्चों की। कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह बाइक टैक्सी के लिए सख्त गाइडलाइंस बनाए ताकि दुर्घटना और अन्य जोखिम कम हो सकें। --(आईएएनएस)


