महासमुन्द

बसना-बागबाहरा-पिथौरा के आम बगीचे में घने बौर, किसानों को बम्पर उत्पादन की उम्मीद
12-Feb-2026 4:24 PM
बसना-बागबाहरा-पिथौरा के आम बगीचे में घने बौर, किसानों को बम्पर उत्पादन की उम्मीद

अंधड़-ओलावृष्टि न हो तो आम लोगों को सस्ते दामों पर मिल सकेगा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

महासमुंद,12 फरवरी। इस साल आम के वृक्षों में लगे घने बौर से अच्छी फसल की संभावना है। महासमुंद जिले के बसना, बागबाहरा तथा पिथोरा में सर्वाधिक आम के बगीचे हैं जहां आम में झूम झूमकर बौर आया है। इस वक्त जिला मुख्यालय सहित बसना और आसपास के क्षेत्रों में आम के बौर ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरा हुआ है। मालूम हो कि महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र को आम की पैदावार के लिए विशेष पहचान प्राप्त है और इस वर्ष यहां के बगीचों में मंजर (बौर) की स्थिति को देखकर किसानों को बम्पर उत्पादन की उम्मीद है।

उद्यानिकी विभाग के जानकारों का मानना है कि यदि आगामी कुछ सप्ताह मौसम का मिजाज अनुकूल रहा, तो स्थानीय बाजारों में आम की उपलब्धता भरपूर रहेगी। जिससे आम जनता को कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाले रसीले आम मिल सकेंगे।

बागबाहरा जैसे क्षेत्रों से जब देसी और उन्नत किस्म के आमों की खेप पहुंचेगी, तो कीमतों में भारी गिरावट आने की संभावना है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि वे इस बार अच्छी आय की उम्मीद कर रहे हैं। बशर्ते तेज अंधड़ या ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदा से फसल सुरक्षित रहे।

 

विभागीय जानकारी के अनुसार महासमुंद जिले में लगभग 4,300 से 4,500 हेक्टेयर भूमि पर आम के बगीचे प्रमुख क्षेत्रों में आता है जहां आम का बगीचा फैला हुआ है। यह जिला छत्तीसगढ़ के उन जगहों में शामिल है जहां आम की पैदावार बड़े पैमाने पर होती है। बागबाहरा क्षेत्र के आम की गुणवत्ता बेहतर रहती है जबकि बसना क्षेत्र में पैदावार आम की खुशबू और मिठास का कारण यहां की मिट्टी और जलवायु को माना जाता है। इस बार पेड़ों पर फलों की लदान और शुरुआती स्थिति काफ ी सुखद है।

जिले के स्थानीय बाजारों में आमतौर पर बाहरी आम की आवक अधिक होती हैं, लेकिन कुछ सालों से बसना पिथोरा और बागबाहरा के आम की मांग अधिक है। पिछले कुछ वर्षों के रुझान को देखें तो यदि आने वाले हफ्तों में लू,तेज गर्म हवा, और ओलावृष्टि नहीं होती है, तो उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 15 से 20फीसदी अधिक हो सकता है। यहां जब स्थानीय फसल बाजार में आती है, तो बाहरी राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश या उत्तर प्रदेश से आने वाले आमों पर निर्भरता कम हो जाती है और कीमतें भी कम रहती हैं।

पिथौरा और बसना ब्लॉक में आम के पुराने और नए बगीचों की संख्या सबसे अधिक है। यहां मुख्य रूप से लंगड़ा, दशहरी, चौसा और स्थानीय देशी आम की भारी फसल होती है। यहां के किसान अब आम्रपाली और मल्लिका जैसी फसल भी लेते हैं। किसान इसके अलावा कुछ उन्नत किस्मों पर भी ध्यान दे रहे हैं।


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