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पत्नी की हत्या कर शव के पांच टुकड़े किए, टंकी में छिपाया
24-May-2026 12:06 PM
पत्नी की हत्या कर शव के पांच टुकड़े किए, टंकी में छिपाया

नकली नोट छापने वाला आरोपी उम्रकैद का दोषी, बच्चों को मुआवजा देने की भी सिफारिश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 24 मई।
पत्नी की हत्या कर उसके शव के पांच टुकड़े करने, उन्हें पानी की टंकी में छिपाने और घर में नकली नोट छापने के मामले में विशेष न्यायाधीश (एनआईए) की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने हत्या, साक्ष्य मिटाने और नकली नोट रखने के आरोप में अलग-अलग सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने यह फैसला सुनाया।

मामला 2 मार्च 2023 का है। एंटी क्राइम यूनिट को उसलापुर स्थित गीतांजलि कॉलोनी फेज-1 में नकली नोट छापे जाने की सूचना मिली थी। पुलिस जब पवन सिंह ठाकुर के घर पहुंची तो वहां एक दिल दहला देने वाला दृश्य सामने आया। घर के पोर्च में रखी पानी की टंकी के भीतर महिला का शव पांच टुकड़ों में मिला। शव के हिस्सों को पॉलीथिन में पैक कर टेप से लपेटा गया था।

मृतका उसकी पत्नी सती साहू थी। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने पत्नी के चरित्र पर संदेह के चलते उसकी हत्या की थी। शव ठिकाने लगाने के लिए उसने बाजार से पानी की टंकी और कटिंग मशीन खरीदी थी। उसने शव के हाथ-पैर और धड़ अलग-अलग काटकर पैक किए। आरोपी ने शव जलाने की भी कोशिश की, लेकिन बदबू फैलने और लोगों को भनक लगने के डर से ऐसा नहीं कर सका। बाद में शव के टुकड़ों को टंकी में छिपा दिया।

दो महीने तक आरोपी लोगों से कहता रहा कि उसकी पत्नी घर छोड़कर चली गई है और वह उसकी तलाश कर रहा है। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से नकली नोट बनाने के उपकरण, कलर प्रिंटर, रिफिल कार्ट्रिज, जेरॉक्स पेपर, 200 और 500 रुपए के नकली नोट तथा ग्राइंडर-कटर मशीन बरामद की थी।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर और क्रूर प्रकृति का है। हत्या के बाद शव के टुकड़े कर साक्ष्य मिटाने की कोशिश समाज में भय और असुरक्षा पैदा करने वाली घटना है, इसलिए आरोपी किसी भी प्रकार की नरमी का हकदार नहीं है।

कोर्ट ने मृतका के दो नाबालिग बच्चों को मुआवजा देने की आवश्यकता भी बताई। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि अपराध पीड़ितों और मृतक के आश्रितों को राज्य सरकार की पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

अदालत ने आरोपी को धारा 302 के तहत उम्रकैद तथा धारा 201 और 489-सी के तहत पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। मामले में राज्य की ओर से अधिवक्ता दौ चंद्रवंशी ने पैरवी की।


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