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कोलकाता, 11 मई। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और नीतिगत उपायों की घोषणा की, जिनमें राज्य को केंद्र की आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना में शामिल करना, सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को भूमि का हस्तांतरण और बीएनएस आपराधिक कानून को लागू करना शामिल है।
ये निर्णय पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के मंत्रिमंडल की पहली बैठक के दौरान लिए गए, जिसकी अध्यक्षता अधिकारी ने की और जिसमें शपथ लेने वाले पांच मंत्रियों के साथ-साथ वरिष्ठ नौकरशाह भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि बंगाल अब आयुष्मान भारत योजना का हिस्सा बन जाएगा, साथ ही प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, किसानों को फसल बीमा प्रदान करने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सरकारी स्कूलों के उन्नयन के लिए प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) योजना और कारीगरों एवं शिल्पकारों को समर्थन देने वाली प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना जैसी कई अन्य केंद्रीय कल्याणकारी परियोजनाओं का भी हिस्सा होगा।
राज्य में महिलाओं की शिक्षा और सशक्तीकरण के लिए ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना और रियायती दरों पर खाना पकाने के रसोई गैस प्रदान करने वाली उज्ज्वला 3.0 योजना भी लागू की जाएगी।
आरोप है कि ममता बनर्जी के पूर्व शासनकाल में राजनीतिक कारणों से इन सभी योजनाओं को राज्य के लोगों की पहुंच से बाहर रखा गया था।
अधिकारी ने कहा, “प्रधानमंत्री द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादे के अनुसार, हम अब आयुष्मान भारत योजना का हिस्सा हैं। मंत्रिमंडल ने राज्य के मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के सचिव और स्वास्थ्य सचिव को आयुष्मान भारत योजना के तत्काल कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ आवश्यक समझौतों को तैयार करने की निगरानी करने का निर्देश दिया है।”
आयुष्मान भारत और पीएम जन आरोग्य योजना का उद्देश्य गरीब और कमजोर परिवारों को द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक अस्पतालों में नकद रहित इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है।
इसके विपरीत, तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में इसी तरह की नकद बीमा सीमा के लिए अपनी स्वयं की ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना शुरू की थी।
अधिकारी ने पुष्टि की कि नयी सरकार किसी भी मौजूदा राज्य योजना को बंद नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हम मृतकों और गैर-भारतीयों जैसे अपात्र लोगों की पहचान करेंगे और उन्हें इस देश के लोगों के लिए बनी कल्याणकारी योजनाओं से वंचित कर देंगे।”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बांग्लादेश के साथ देश की खुली सीमाओं को सील करने और अवैध सीमा पार प्रवासन पर अंकुश लगाने के वादे को लागू करते हुए, अधिकारी मंत्रिमंडल ने अपनी पहली ही बैठक में सीमा पर बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करने को मंजूरी दे दी।
अधिकारी ने कहा, “हस्तांतरण प्रक्रिया तत्काल शुरू होगी और मंत्रिमंडल ने मुख्य सचिव व राज्य के भूमि एवं भू राजस्व विभाग के सचिव को अगले 45 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का अधिकार दिया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में उनके पिछले कार्यकाल के दौरान प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीमा पर बाड़ लगाने के कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक लगभग 90 प्रतिशत भूमि पहले से ही राज्य द्वारा अधिगृहित की जा चुकी है।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के तौर पर मुझे आवश्यक भूमि की सही स्थिति का पता लगाने के लिए कागजात देखने होंगे, जिसके लिए मुझे कुछ और समय चाहिए होगा।”
अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ 2,216.7 किलोमीटर की सीमा साझा करता है, जिसमें से लगभग 569 किलोमीटर की सीमा पर बाड़ नहीं लगी है।
एक महत्वपूर्ण आरोप में, अधिकारी ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) - आपराधिक कानून जिन्होंने क्रमशः भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) अधिनियमों का स्थान लिया है - संसद के दोनों सदनों द्वारा बहुत पहले पारित किए जा चुके हैं, राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त कर चुके हैं और जिनके नियम पहले ही तैयार किए जा चुके हैं और भारत के अन्य हिस्सों में लागू किए जा चुके हैं, लेकिन बंगाल में इन अधिनियमों को अब तक आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया गया है।
अधिकारी ने कहा, “संविधान के इस उल्लंघन के बारे में जानकर हमें आश्चर्य हुआ। मंत्रिमंडल ने बंगाल में इसके तत्काल प्रभाव से लागू होने की मंजूरी दे दी है।”
शाह द्वारा चुनाव पूर्व किए गए वादों को पूरा करते हुए, अधिकारी ने सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में बैठने वाले उम्मीदवारों के लिए ऊपरी आयु सीमा में पांच साल की छूट की घोषणा की।
अधिकारियों ने बताया कि इस घोषणा के बाद सामान्य वर्ग के आवेदकों को वर्तमान 40 वर्ष की आयु सीमा के बजाय 45 वर्ष तक आवेदन करने की छूट मिलेगी, और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आवेदक वर्तमान 43 वर्ष की आयु सीमा के बजाय 48 वर्ष की आयु तक नौकरियों के लिए आवेदन कर सकेंगे।
अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली ममता बनर्जी नीत तृणमूल कांग्रेस सरकार ने जनगणना संबंधी 16 जून 2025 के परिपत्र की अनदेखी की जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत भारत के महापंजीयक कार्यालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को भेजा था।
अधिकारी ने कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस सरकार ने संविधान और लोगों के साथ धोखा किया और जानबूझकर बंगाल में जनगणना का काम रोक दिया ताकि महिलाओं का आरक्षण रोका जा सके। मंत्रिमंडल ने राज्य में परिपत्र को तुरंत लागू करने की मंजूरी दे दी है।’’
शनिवार को मुख्यमंत्री के साथ शपथ लेने वाले पांच मंत्री - दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, खुदिराम टुडू, निशिथ प्रमाणिक और अशोक कीर्तनिया - मंत्रिमंडल की बैठक में उपस्थित थे। (भाषा)


