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450 से अधिक सब्जी कारोबारियों को राहत
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 8 मई। बृहस्पति बाजार से सब्जी कारोबारियों को हटाने की नगर निगम की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लग गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बाजार से व्यापारियों को बेदखल करने की प्रक्रिया पर स्थगन आदेश जारी करते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश से बाजार में वर्षों से व्यवसाय कर रहे 450 से अधिक प्लेटफॉर्म धारकों को बड़ी राहत मिली है।
दरअसल, नगर निगम बिलासपुर ने बृहस्पति बाजार के दुकानदारों और चबूतरा धारकों को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर दुकानें खाली करने के निर्देश दिए थे। निगम ने कारोबारियों को नए प्रस्तावित रिवर व्यू अथवा मुन्नू लाल शुक्ला स्कूल परिसर में स्थानांतरित होने के लिए कहा था।
निगम की इस कार्रवाई को व्यापारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में कहा गया कि निगम बिना वैकल्पिक पुनर्वास व्यवस्था किए कारोबारियों को हटाने का प्रयास कर रहा है, जो कानून सम्मत नहीं है। व्यापारियों ने अदालत को बताया कि नए स्थल पर न तो शेड बनाए गए हैं, न चबूतरे तैयार किए गए हैं और न ही अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
याचिका में यह भी कहा गया कि निगम भविष्य में मल्टीलेवल सब्जी बाजार बनने के बाद दुकानों के पुनः आवंटन की बात तो कर रहा है, लेकिन इसके लिए अब तक कोई स्पष्ट गाइडलाइन तय नहीं की गई है। व्यापारियों का आरोप है कि निगम अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं हैं कि किसे दुकान मिलेगी, कितनी जगह दी जाएगी और किन शर्तों पर आवंटन होगा।
इसके साथ ही प्रस्तावित दुकानों का किराया, प्रीमियम अथवा अन्य शुल्क क्या होंगे, इसकी भी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। कारोबारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में उन्हें व्यवसाय की असुरक्षा और भविष्य को लेकर संशय बना हुआ है।
मालूम हो कि शहर के सबसे बड़े सब्जी बाजार, बृहस्पति बाजार को आधुनिक मल्टीलेवल सब्जी बाजार में बदलने की योजना पिछले करीब दो वर्षों से चल रही है। हालांकि इस दौरान निगम परियोजना के लिए स्थायी और उपयुक्त वैकल्पिक स्थल भी तय नहीं कर पाया। अब निगम प्रशासन फिर से पूरी प्रक्रिया शुरू करने की बात कह रहा है।
पिछले कुछ दिनों से निगम की टीम बाजार क्षेत्र का सर्वे कर रही है। सर्वे में दुकानों में होने वाले व्यवसाय, दुकानदारों की स्थिति,वे किरायेदार हैं या स्वामी, दुकानों का क्षेत्रफल और अन्य जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
बताया गया कि 16 दिसंबर 2025 को निगम कर्मचारियों ने बाजार की सभी दुकानों पर नोटिस चस्पा कर सात दिनों के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया था। नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय के बाद निगम एकतरफा तोड़फोड़ की कार्रवाई करेगा।
अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद निगम की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लग गई है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत पुनर्वास व्यवस्था और निगम की नीति को लेकर विस्तृत जवाब मांग सकती है।


