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कोलकाता, 6 मई। उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में एक दशक बाद 7 परिवारों के 16 सदस्य बुधवार को अपने गांव सरबेरिया लौट आए। ये लोग 2016 में तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय गुंडों के आतंक से अपने घर छोड़कर भाग गए थे।
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, इन लोगों की वापसी भाजपा के सहयोग से हुई है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के प्रभावशाली नेता शेख शाहजहां और उसके सहयोगियों का आतंक अब खत्म हो गया है।
वापसी की वजह
ये सभी लोग पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हुए थे। 2016 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने पार्टी में “अपराधी तत्वों” के घुसने का विरोध किया था। इन्हें CPM से जुड़े गुंडों को पार्टी में लाने का विरोध करने की सजा मिली। विरोध करने वालों पर हमले, धमकियां, जमीन हड़पने और परिवारों पर अत्याचार शुरू हो गया, जिसके बाद उन्हें घर छोड़ना पड़ा।
पीड़ितों के बयान
शेख अताउर रहमान (43 वर्ष), किसान “2016 के चुनाव नतीजे आने के एक दिन बाद शेख शाहजहां के नेतृत्व में करीब 100 हथियारबंद गुंडों ने मेरे घर पर हमला किया। उन्होंने मेरे ऊपर 13 राउंड गोलियां चलाईं। मैं चावल के खेतों में छिपकर जान बचाने में सफल हुआ।” उन्होंने बताया कि बाद में उनके माता-पिता और बड़ी बहन पर भी अत्याचार हुआ, जिसके बाद पूरा परिवार भाग गया। 2017 में उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली।
सिराजुल शेख (54 वर्ष) “मैं तृणमूल कांग्रेस का संस्थापक सदस्य था, लेकिन जब मैंने पार्टी में अपराधियों के घुसने का विरोध किया तो शाहजहां के गुंडों ने मुझे मारने की कोशिश की।” “दस साल तक घर-परिवार से दूर, बिना स्थिर आय के निर्वासन की जिंदगी जीनी पड़ी। 2018 में भाजपा जॉइन की और अब घर लौट सका हूँ।”
इन दोनों ने कहा कि शाहजहां के करीबी गुंडे, खोकन शेख, हबीबुर शेख, सैफुद्दीन मोल्ला और मोंताज अली ने उन्हें निशाना बनाया था।
भाजपा का दावा
भाजपा सूत्रों ने बताया कि ऐसे कम से कम 100 और विस्थापित लोग भी संपर्क में हैं, जो जल्द ही अपने घर लौटने वाले हैं।
संदेशखाली से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक सनातन सरकार ने कहा,
“अब डर का माहौल पूरी तरह खत्म हो गया है। आने वाले दिनों में और भी कई लोग वापस लौटेंगे। हम संदेशखाली में शांति बहाल करने की कोशिश करेंगे। लोगों का दुःस्वप्न अब समाप्त हो गया है।”
संदर्भ
संदेशखाली 2024 में महिलाओं के बड़े आंदोलन के बाद चर्चा में आया था, जिसमें शेख शाहजहां पर जमीन हड़पने, धमकाने और महिलाओं के शोषण के गंभीर आरोप लगे थे। उस आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान खींचा था।
द टेलीग्राफ के अनुसार, इन परिवारों की वापसी को संदेशखाली में राजनीतिक और सामाजिक माहौल के बड़े बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है।


