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पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला से विशेष बातचीत
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 14 फरवरी। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के बाद शहर की कानून व्यवस्था, ट्रैफिक, नशा, साइबर अपराध और नाबालिगों में बढ़ते अपराध जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि जवाबदेही और जनभागीदारी का नया दौर है। डॉ. शुक्ला ने नाबालिगों में बढ़ते अपराध पर चिंता जताई है, और माता-पिता को सलाह दी है कि वो बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखें।
आईपीएस के वर्ष-2003 बैच के अफसर डॉ. संजीव शुक्ला रायपुर में पले बढ़े हैं, और यहां एसएसपी रह चुके हैं। वे दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, व रायगढ़ में एसपी, और फिर बिलासपुर में आईजी के पद पर पोस्टेड हुए। डॉ. शुक्ला राजधानी रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर बनाए गए। उन्होंने ‘छत्तीसगढ़’ अखबार के यूट्यूब चैनल इंडिया आजकल से चर्चा की।
अपने ही शहर में अंतिम 11 महीनों की सेवा के लिए तैनात डॉ. शुक्ला ने माना कि यह पोस्टिंग उनके लिए भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कमिश्नरेट सिस्टम का उद्देश्य केवल पदनाम बदलना नहीं, बल्कि सुपरविजन का स्तर बढ़ाना, विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति करना और तेज निर्णय प्रणाली स्थापित करना है। रायपुर शहर का तेजी से विस्तार, बढ़ता ट्रैफिक, नई कॉलोनियां, बाहरी आबादी का आगमन और साइबर अपराधों की बढ़ती प्रवृत्ति ऐसे कारण हैं जिनके चलते कमिश्नरी की जरूरत महसूस की गई।
नाबालिग अपराध पर चिंता
नाबालिगों में बढ़ते अपराधों को लेकर डॉ. शुक्ला ने स्वीकार किया कि बच्चों में अपराध की प्रवृत्ति बढ़ी है और इसके पीछे मोबाइल, इंटरनेट और अनियंत्रित डिजिटल एक्सपोजर बड़ी वजह है। उन्होंने कहा कि आज सारी दुनिया मोबाइल में मौजूद है — अच्छी भी और बुरी भी। बच्चों की चंचल बुद्धि गलत दिशा में आसानी से भटक सकती है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिस अंतिम विकल्प है। बच्चों को सही दिशा देना परिवार और स्कूल की प्राथमिक जिम्मेदारी है। रोजाना 15 मिनट बच्चों से संवाद करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता यदि सिर्फ सुनना शुरू कर दें, तो आधी समस्या वहीं हल हो सकती है।
नाबालिग प्रेम संबंधों में वीडियो बनाकर ब्लैकमेल, गैंग अपराध और आत्महत्या तक की घटनाओं पर उन्होंने चेतावनी दी कि डिजिटल कंटेंट कभी मिटता नहीं। किसी भी फोटो या वीडियो का दुरुपयोग कभी भी हो सकता है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि किसी पर अंधा विश्वास न करें और ऐसी कोई स्थिति न बनने दें जिससे भविष्य खतरे में पड़े। उन्होंने नशे पर कहा कि यह न सिर्फ रायपुर बल्कि देश के सभी शहरों के लिए चैलेंज है। यह एक पूरी जनरेशन को खा रहा है। उसके खिलाफ भी हम लोग बड़ी संजीदगी से लगे हैं, और हम जानते हैं कि इसको रोकने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका हमें ही निभाना है। हमारी पूरी टीम इस पर काम कर रही है। सप्लाई लाइन को हम लोग काटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नशे को रोकने में 50 फीसदी भूमिका सप्लाई लाइन की होती है, और 50 फीसदी भूमिका डिमांड की होती है। समाज को मिलकर ऐसा वातावरण बनाना पड़ेगा कि बच्चों के बीच से यंग जनरेशन के बीच से ये डिमांड ही जनरेट ना हो। हम, और आप मिलकर काम करेंगे, तो नशे पर हम लोग प्रभावी अंकुश लगा सकते हैं।
नाबालिगों के गाड़ी चलाते पाए जाने पर माता-पिता भी..
शहर में नाबालिगों द्वारा तेज रफ्तार बाइक और कार चलाने की घटनाओं पर कमिश्नर ने साफ किया कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत माता-पिता भी कानूनी रूप से जिम्मेदार होते हैं। जुर्माना, वाहन जब्ती और मामला न्यायालय तक ले जाने का प्रावधान है। नाबालिग बच्चा गाड़ी चलाते हुए पाए जाते हैं, तो पैरेंट्स के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
उन्होंने बताया कि रायपुर में 500 से अधिक कैमरों वाला इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम सक्रिय है और अब नाबालिग ड्राइविंग, तीन सवारी, रॉन्ग साइड और स्टंट ड्राइविंग को प्राथमिकता से चिन्हित किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि समझाइश के बाद भी उल्लंघन जारी रहा तो कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
साइबर अपराध...
साइबर अपराधों को लेकर पुलिस कमिश्नर डॉ. शुक्ला ने कहा कि देश की सारी इनफोर्समेंट एजेंसी इस बात को अनुभव कर रही है कि जितने फिजिकल अपराध होते हैं उससे कहीं ज्यादा अब साइबर अपराध होने लगे हैं। उन्होंने कहा कि लोग लालच या भय में फंसते हैं। ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग करने वाले नागरिकों को डिजिटल रूप से जागरूक होना जरूरी है। किसी अज्ञात लिंक, कॉल या ऑफर पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
जनभागीदारी ही समाधान
डॉ. शुक्ला ने कहा कि कोई भी लॉ इनफोर्समेंट एजेंसी अकेले व्यवस्था नहीं बदल सकती। यदि व्यापारी दुकान के सामने अतिक्रमण न करें, वाहन चालक सही पार्किंग करें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें, तो शहर की आधी समस्या स्वत: समाप्त हो जाएगी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब शहर के लोग व्यवस्था को अपना ‘प्राइड’ बना लेते हैं, तब वास्तविक बदलाव आता है। ट्रैफिक, बच्चों का अनुशासन, नशा नियंत्रण और साइबर सुरक्षा— ये चार क्षेत्र ऐसे हैं जहां पुलिस और समाज को मिलकर काम करना होगा। नाबालिग को वाहन न दें, हेलमेट अनिवार्य पहनें, ओवरलोडिंग से बचें।
संदिग्ध गतिविधि की सूचना दें
कमिश्नर ने कहा कि पुलिस कार्रवाई के लिए नहीं, सहयोग के लिए है। लेकिन कानून तोडऩे वालों के लिए नरमी स्थायी नीति नहीं होगी। उन्होंने संदिग्ध गतिविधियों की पुलिस को सूचना देने की भी अपील की।


